महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में सियासी फाइट दिलचस्प होती जा रही है. ठाकरे भाई मिल गए हैं उधर चाचा-भतीजा खटास भूल साथ खड़े होकर मुस्कुरा रहे हैं. इस बीच शिवसेना के दोनों गुटों के साथ-साथ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के वोटों में सेंध लगाने वाली एक और ‘सेना’ मैदान में आ गई है. हां, ये है कभी बाल ठाकरे के पसंदीदा ‘गैंगस्टर’ रहे अरुण गवली की अखिल भारतीय सेना. शॉर्ट में कहें तो अभासे. बाद में दूरी ऐसी बढ़ी कि बाल ठाकरे की शिवसेना की तर्ज पर गवली ने 1997 में नई पार्टी ही बना ली.
अब BMC चुनाव के लिए गीता गवली और योगिता गवली-वाघमारे ने अखिल भारतीय सेना (ABS) के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है. 15 जनवरी 2026 को होने जा रहे चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, गवली की पार्टी भायखला क्षेत्र के अपने महत्वपूर्ण गढ़ को फिर से हासिल करना चाहती है.
ABS की ताकत इसके संस्थापक अरुण गवली या गावली से ही है जिसे कुछ लोग ‘डैडी’ कहते रहे हैं. भायखला के दगड़ी चॉल में रहते हुए गवली ने कभी दाऊद इब्राहिम की नाक में दम कर दिया था. बाद में शिवसेना प्रमुख से ऐसे रिश्ते खराब हुए कि गवली राजनीति में आ गए.
गवली की पार्टी खुद को सामाजिक कल्याण पहलों के साथ-साथ ‘माटी के लाल’ वाली इमेज प्रमोट कर रही है. 1990 के दशक और 2000 के दशक की शुरुआत में भायखला में गवली की तूती बोलती थी. अपने इलाके में यह खुद ‘सरकार’ था. यह लोगों के झगड़े निपटाते और जरूरत पड़ने लोगों की पैसों से मदद भी करते.
अखिल भारतीय सेना के प्रभाव की बात करें तो वार्ड 212 और 207 में इसका दबदबा है. यह मुख्य रूप से भायखला, मझगांव और डॉकयार्ड के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है. ABS ने ऐतिहासिक रूप से भायखला और चिंचपोकली बेल्ट में दिग्गजों के वोटों में सेंध लगाई है. हां, पार्टी समय के साथ एक ‘किलर’ के रूप में उभरी जिसने शिवसेना और कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाई.
पहली बार 2002 के BMC चुनावों के दौरान गवली की पार्टी सुर्खियों में आई, जब इसके उम्मीदवार सुनील घाटे ने शिवसेना के उम्मीदवार को हराया. यह गवली की पार्टी के एक ताकत के रूप में उभरने का संकेत था. 2004 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के संस्थापक अरुण गवली ने चिंचपोकली सीट जीत ली. पार्टी ने नगरपालिका राजनीति में अपनी उपस्थिति बनाए रखी. 2007 के बीएमसी चुनावों में पार्टी ने दो सीटें जीतीं, जिसमें गीता गवली पहली बार पार्षद चुनी गईं.
2012 के चुनावों में पार्टी ने अपनी पकड़ बनाए रखी. गीता गवली ने अपनी सीट बचाई जबकि अरुण गवली की भाभी वंदना गवली ने वार्ड 207 से जीत हासिल की. 2017 के BMC चुनावों में गवली की पार्टी एक सीट तक सिमट गई, जिसमें गीता गवली अकेली विजेता बनकर उभरीं.
अब 2026 के बीएमसी चुनाव गवली की पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है. पहली बार अरुण गवली की दोनों बेटियां – गीता गवली और योगिता गवली-वाघमारे चुनाव मैदान में हैं. एक पारिवारिक झगड़े ने मुकाबले को मुश्किल बना दिया है. वंदना इस बार शिवसेना (शिंदे गुट) का साथ दे रही हैं. इससे वार्ड 207 में सीधा मुकाबला हो गया है. साफ है कि इससे पारंपरिक दगड़ी चाल का वोट बैंक गवली की पार्टी और शिवसेना के बीच बंटेगा.
