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Parliament Budget Session 2026:   राज्यसभा में सोमवार 2 फरवरी 2026 को भाजपा के सासंद सी सदानंदन मास्टर ने सदन की मेज पर अपने आर्टिफिशियल पैर रख दिए. इसको लेकर काफी हंगामा देखने को मिला. यह घटना तब देखने को मिली जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा हो रही थी. भाजपा सांसद की इस हरकत से सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया. वहीं उनका कहना था कि वह देश और जनता के सामने यह दिखाना चाहते हैं कि आखिर लोकतंत्र क्या है. 

दुर्घटना का किया जिक्र 

भाजपा सांसद सदानंदन मास्टर ने कहा,’ जो लोग आज लोकतंत्र का शोर मचा रहे हैं उन्होंने 31 साल पहले केरल में मुझ पर हमला किया था. मैं घर लौट रहा था कि तभी संगठित अपराधियों ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, सड़क पर गिरा दिया और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए मेरे पैर काट दिए.’ RSS से जुड़े रह चुके सांसद ने अपने साथ हुई दुर्घटना को याद करते हुए इसका आरोप CPM कार्यकर्ताओं पर लगाया. इसके बाद सदन में CPM की ओर से विरोध प्रदर्शन होने लगे.  

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जॉन ब्रिटास ने जताई आपत्ति 

सदानंद मास्टर की इस हरकत को लेकर CPM के सांसद जॉन ब्रिटास ने तुरंत सवाल खड़े करते हुए सदन में कृत्रिम अंगोंल के  प्रदर्शन पर आपत्ति जताई और वस्तुओं के प्रदर्शन के खिलाफ नियमों का हवाला दिया. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सदानंदन ने कहा,’ आप हमेशा लोकतंत्र, सहिष्णुता और मानवता की बात करते हैं, लेकिन आपकी प्रतिबद्धता राजनीतिक हिंसा पर आधारित है और यह लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है.’ हालांकि, ब्रिटास की ओर से आपत्ति जताने के बाद उन्होंने कृत्रिम अंगों को मेज से हटा दिया गया. 

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ब्रिटास के शब्दों को हटाया गया 

सदन में ब्रिटास ने अध्यक्ष से कहा,’ आपने वस्तुओं के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया है. वह (सी सदानंदन मास्टर ) कई दिनों से कृत्रिम अंगों के सहारे सदन में आते रहे हैं. दुर्भाग्य से उन्होंने उन्हें खो दिया.’ इसको लेकर राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन ने बाद में कहा कि कृत्रिम अंगों को चर्चा से हटा दिया गया है और आगे कहा,’ आप भी उसी सख्ती का पालन करें और मैं देखना चाहता हूं कि आपका रुख भी वही रहे.’ मास्टर ने तीखे बयान के साथ अपने संबोधन को खत्म किया और कहा,’ मुझे खेद है कि CPI-M की ओर से की गई यातना के कारण मैं अपना पहला भाषण देते समय खड़ा नहीं हो सका.’ वहीं सदन के नेता जेपी नड्डा ने बाद में अध्यक्ष से आग्रह किया कि ब्रिटास की ओर से बहस के दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को हटा दिया जाए, जिससे सदन में मर्यादा बनी रह सके.