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Mumbai Police Encounter Specialist: 11 जनवरी 1982. ये तारीख मुंबई पुलिस के इतिहास में बहुत खास है. इसी दिन मुंबई पुलिस के दो अधिकारियों राजा तंबट और इसाक बगवान ने गैंगस्टर मण्या सुर्वे का एनकाउंटर किया था. आज से 44 साल पहले मुंबई पुलिस ने ऑन रिकॉर्ड पहला एनकाउंटर किया था. मुंबई पुलिस पहली पुलिस थी जिसने अंडरवर्ल्ड के खिलाफ सीधा मोर्चा खोला था. उसके बाद मुंबई को गैंगस्टर मुक्त करने के लिए शूटआउट की शुरुआत हो गई.

1990 के दशक में एनकाउंटर 20 गुना से ज्यादा बढ़ गए. 2003-2004 तक मुंबई में 1200 से ज्यादा एनकाउंटर दर्ज किए गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक 1982 से 2004 के बीच पुलिस ने एनकाउंटर में 1000 कुख्यात बदमाशों को मारा. मतलब अभी जो आप यूपी में देख रहे हैं..हाफ और फुल एनकाउंटर की ख़बर सुनते हैं. वीडियो देखते हैं. वो तब के मुंबई वाले शूटआउट के सामने कुछ भी नहीं था.

लोखंडवाला में माया डोलस का हुआ एनकाउंटर

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मुंबई पुलिस का सबसे चर्चित एनकाउंटर 1991 में हुआ. जब लोखंडवाला में गैंगस्टर माया डोलस और उसके 6 साथी मारे गए थे. पुलिस ने 4 घंटे लगातार फायरिंग की थी. इस एनकाउंटर ने मुंबई पुलिस को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था. बाद में इस एनकाउंटर पर फिल्म भी बनी.

1995 में एक साल में 100 से ज्यादा शूटआउट हुए. मतलब हर तीसरे दिन एक एनकाउंटर हुआ. 1990 से 2000 के बीच हर हफ्ते में दो से तीन एनकाउंटर होते थे. इसका रिजल्ट भी मिला. हत्या, फायरिंग कर शहर को डराने वाले गैंगस्टर मारे गए. दाऊद जैसे अंडरवर्ल्ड सरगना को मुंबई से भागना पड़ा. 

इस दशक में मुंबई पुलिस के कुछ अधिकारी अपराधियों के खिलाफ एक्शन के पोस्टर ब्वॉय बन गए. 1990 के दशक को समझने के लिए इन पुलिसवालों का रिकॉर्ड भी देखना दिलचस्प होगा. अधिकारियों के इस ग्रुप को बैच ऑफ 83 भी कहा जाता है. ये 1983 में नासिक के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल से पास आउट हुए थे. इनमें सबसे चर्चित चेहरा हैं, प्रदीप शर्मा. इन्होंने 114 एनकाउंटर किए.

इन पुलिसवालों से कांपते थे बदमाश

वहीं विजय सालसकर ने करीब 80 एनकाउंटर किए. जबकि दया नायक ने 80 से ज्यादा एनकाउंटर किए. एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहलाने वाले रवींद्रनाथ आंग्रे ने 50 से ज्यादा एनकाउंटर किए. प्रफुल्ल भोसले ने 70 से ज्यादा एनकाउंटर किए. जबकि सचिन वाझे ने 60 से ज्यादा एनकाउंटर किए.

मुंबई को डराने वाले गैंगस्टर्स में इन अधिकारयों का ऐसा खौफ था कि कई गैंगस्टर्स ने डर से मुंबई छोड़ दिया. एनकाउंटर वाली पॉलिसी और अधिकारियों के साहस के कारण मुंबई पुलिस को डिटेक्शन रेट यानी केस सॉल्व करने में दुनिया के बेहतरीन फोर्स में गिना जाने लगा.

एनकाउंटर के डर और पुलिस के खौफ से मुंबई में शांति लौटी. इसका रिजल्ट ये रहा कि एनकाउंटर घट गए. NCRB के आंकड़ों के मुताबिक 2016 से 2022 तक पूरे महाराष्ट्र में 33 एनकाउंटर हुए. इस दौरान उत्तर प्रदेश में 110 से ज्यादा और छत्तीसगढ़ में 250 से ज्यादा एनकाउंटर हुए.

अब फिर से पुराने रूप में दिखेगी मुंबई पुलिस

आकंड़े बताते हैं मुंबई में एनकाउंटर 95 प्रतिशत तक कम हो गए. लेकिन पिछले दो साल से मुंबई में फिर क्राइम सिंडिकेट सिर उठा रहा है. बाबा सिद्दकी की हत्या, सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग. अब रोहित शेट्टी, रणवीर सिंह, आयुष शर्मा को जिस तरह डराया जा रहा है उससे फिर लॉ एंड ऑर्डर की समस्या खड़ी होती दिख रही है. 

मुंबई में कहने के लिए आज भी दाऊद और छोटा राजन जैसे गैंगस्टर्स का सिंडिकेट एक्टिव है. लेकिन बड़ा खतरा है लॉरेंस बिश्नोई. लॉरेंस जेल में बैठकर फायरिंग करा रहा है, फिरौती मांग रहा है.धमकी दे रहा है. इससे खौफ का माहौल बन रहा है. 

44 साल पहले अंडरवर्ल्ड के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली मुंबई पुलिस को मालूम है कि संगठित क्राइम सिडिंकेट को खत्म करने के लिए एनकाउंटर सबसे कारगर हथियार है. ये काम मुंबई पुलिस पहले भी कर चुकी है. इसलिए अब फिर मुंबई पुलिस 1980 के दौर में वापस जाने की तैयारी कर रही है.