Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में इसी साल विधानसभा चुनाव होना है, इससे पहले सियासा पारा हाई हो गया है. पिछले चुनाव में 77 सीटें पाने वाली भाजपा इस चुनाव में सत्ता परिवर्तन के इरादे से सियासी अखाड़े में उतर आई हैं. वहीं TMC फिर से सत्ता हासिल करने के इरादे से राज्य में अपना दमखम लगा रही है. भाजपा लगातार ममता सरकार पर आरोप लगा रही है, इसके बावजूद भी ममता बनर्जी की लोकप्रियता पूरी तरह से बरकरार है. इसके पीछे की वजह है डबल M, इन दोनों के इर्द-गिर्द ही सीएम ममता बनर्जी की चुनावी स्ट्रैटजी घूमती है. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार के साथ.
मजबूती से खड़ी रहीं ममता
मुस्लिम और महिला, सरकार में आने के बाद ममता बनर्जी ने इन्हें हमेशा प्राथमिकता दी और इनकी ईमानदारी के साथ सेवा की. कई मौकों पर देखा गया है जब ममता बनर्जी ने खुद को एक ताकतवर महिला के रूप में पेश किया. इसका आलम सुप्रीम कोर्ट में भी देखने को मिला, बीते दिन स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के खिलाफ अपना केस लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं. सीएम कोर्ट नंबर 1 में घंटों तक खड़ी रहीं और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने अपना केस रखा. इसी रणनीति के साथ ही ममता बनर्जी फिर मैदान में उतर रही हैं.
पट्टी बांधकर उतरीं मैदान में
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक साल 2021 की TMC पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, उस दौरान कट मनी और सिंडिकेट कल्चर चर्चा में थे. ममता बनर्जी पार्टी छोड़ने वालों से जूझ रही थीं. इस दौरान भी ममता बनर्जी ने खुद को सशक्त महिला के रूप में पेश किया. जब से आरोप लगे तो कई लोग पार्टी छोड़कर भागने लगे, हालांकि ममता बनर्जी इस दौरान पट्टी बांधकर रैलियों में जाने लगीं और खुद को ऐसे नेता के तौर पर पेश किया जिसे दबाया नहीं जा सकता है. उन्होंने बांग्ला निजेर मेये के चाहिए (बंगाल अपनी बेटी चाहता है) एक कैंपेन चलाया और इसका असर कुछ ऐसा हुआ कि पिछले चुनाव TMC को 294 सीटें मिली और भाजपा 77 सीटें मिली.
मुस्लिम हितैषी ममता
ममता बनर्जी की मुस्लिमों में हमेशा से अच्छी पकड़ रही है. सीएम ममता बनर्जी खुद को मुस्लिम हितैषी के रूप में पेश करती रहीं हैं. SIR के खिलाफ ये लड़ाई लड़कर वो मुस्लिमों में अपनी पकड़ और मजबूत कर रही हैं. कई चुनावों में इसका परिणाम भी देखने को मिला है, हालांकि अगर इस बार के चुनाव की बात करें तो हुमायूं कबीर इस बार अलग होकर चुनाव लड़ने की बात कर चुके हैं. ओवैसी की पार्टी के साथ कबीर मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं. अगर ऐसा रहा तो फिर ममता बनर्जी के वोटबैंक को काफी नुकसान पहुंच सकता है.
लक्ष्मीर भंडार स्कीम
महिलाओं के लिए ममता सरकार की लक्ष्मीर भंडार स्कीम वरदान साबित हुई. ममता सरकार ने जब प्रदेश का अतंरिम बजट पेश किया तो उन्होंने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) स्कीम पर जोर दिया. सरकार ने महिला लाभार्थियों के लिए लक्ष्मीर भंडार स्कीम के लिए दिए जाने वाले पैसे बढ़ा दिए और Class 10 की परीक्षा पास करने वाले बेरोज़गार युवाओं के लिए स्टाइपेंड की घोषणा की.
लक्ष्मीर भंडार का बढ़ाया पैसा
लक्ष्मीर भंडार में हर महीने Rs 500 की बढ़ोतरी के बाद, अब अनुसूचित जाति (SCs) और अनुसूचित जनजाति (STs) की महिलाओं को हर महीने Rs 1,500 मिलेंगे.साल 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई यह स्कीम महिलाओं के बीच हिट साबित हुई थी. ठीक वैसे ही जैसे लाडली बहना और माझी लड़की बहिन जैसी स्कीमों ने मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में BJP को मजबूत किया है. अब तक, लक्ष्मीर भंडार से 2.2 करोड़ महिलाओं को फायदा हुआ है, जिसमें 29 लाख SC महिलाएं और 4.78 लाख आदिवासी महिलाएं शामिल हैं.
