Mani Shankar Aiyar statement: कभी कांग्रेस पार्टी की टॉप लीडरशिप की आंखों का तारा और सिर का ताज रहे मणिशंकर अय्यर, वर्तमान पीढ़ी के कांग्रेस नेताओं को फूटी आंख नहीं सुहा रहे हैं. कहावत है कि ‘बातहि हाथी पाइये, बातन हाथी पांव’ यानी आप अपनी जुबान की मिठास से किसी राजा का दिल जीतकर उससे इनाम में हाथी पा सकते हैं. वहीं राजा को कटुवचन बोलने की सजा हाथी के पैरों तले कुचल कर होने वाली मौत हो सकती है. शायद इसीलिए किसी शायर ने कहा था- ‘दुश्मनी लाख कीजिए मगर खत्म न कीजिए रिश्ता… दिल मिले ना मिले हाथ मिलाते रहिए’. लेकिन आजकल की राजनीति में शब्दों की शुचिता और भाषा की मर्यादा का पहले जितना ध्यान नहीं रखा जाता. इसलिए एक बार किसी ने अपने से बड़े या छोटे के लिए कड़वे बोल बोल दिए तो उसकी पीड़ा ताउम्र सताती है. कड़वी बात की पीड़ा जिंदगीभर सताती है. ये सभी बातें कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर और कांग्रेस पार्टी के वर्तमान नेतृत्व के ऊपर एकदम फिट बैठती हैं.
राहुल गांधी से कितने खफा हैं अय्यर?
विज्ञान का नियम है कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, शायद इसलिए पॉलिटिक्स में सियासी बयानबाजी एक बार शुरू हो जाए तो आसानी से बंद होने का नाम नहीं लेती. पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस पार्टी के वर्तमान नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए कहा, ‘राहुल गांधी भूल गए हैं कि वह पार्टी के सदस्य हैं. इसलिए, मैं गांधीवादी हूं, मैं नेहरूवादी हूं, मैं राजीववादी हूं, लेकिन मैं राहुलवादी नहीं हूं.’
