
Karnataka Congress News: कर्नाटक सरकार ने हाल में 54 नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है. ये लोग अलग-अलग बोर्ड, निगम या प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं लेकिन अब तत्काल प्रभाव से इन्हें मंत्री का दर्जा दिया गया है. इस तरह कर्नाटक में मंत्रियों और दर्जा प्राप्त मंत्रियों को मिलाकर कुल संख्या 149 हो गई है. जिस कर्नाटक में विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या 224 है, वहां 149 नेता मंत्री बन गए हैं. जिस कर्नाटक में कांग्रेस के विधायकों की संख्या 134 है, वहां 149 नेता मंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं. यानी कांग्रेस के जितने विधायक नहीं हैं, उससे भी ज़्यादा मंत्री हो गए हैं.
कर्नाटक में इतने ज्यादा मंत्री कैसे बन गए?
हैरानी की बात ये है कि कर्नाटक में इतने ज्यादा मंत्री कैसे बन गए? जबकि संविधान ये कहता है कि कुल विधायकों के 15 प्रतिशत से ज़्यादा विधायक मंत्री नहीं बन सकते. यानी कर्नाटक में 34 से ज़्यादा मंत्री नहीं बन सकते. फिर 149 मंत्री कैसे बन गए. इसका जवाब ये है कि बाक़ी लोगों को मंत्री का दर्जा दे दिया गया है. यानी वो संविधान के मुताबिक तो मंत्री नहीं कहलाएंगे लेकिन सुविधाएं उन्हें मंत्री वाली मिलेंगी. संविधान में दर्जा प्राप्त मंत्री का ज़िक्र नहीं है, ये शपथ भी नहीं लेते, लेकिन इसके बावजूद इन्हें मंत्रियों वाली सुविधाएं मिलेंगी.
149 मंत्रियों का पूरा हिसाब-किताब जानें
इनमें से पूरी तरह से मंत्री यानी Full fledged Minister 32 ही हैं. बाक़ी दर्जा प्राप्त मंत्री हैं. 43 विधायकों को कैबिनेट रैंक दी गई है. 9 ऐसे लोगों को भी कैबिनेट रैंक दी गई है जो विधायक नहीं हैं. इसके अलावा 11 विधायकों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है और अब 54 गैर-विधायकों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है. इस तरह ये आंकड़ा 149 पर पहुंच जाता है. संविधान के मुताबिक 34 मंत्री बन सकते हैं. लेकिन उतने लोगों को मंत्री नहीं बनाया गया है. 32 ही Full fledged Minister हैं. बाक़ी 117 लोगों को सरकार ने बैकडोर से मंत्री बना दिया है. 2003 के 91वें संविधान संशोधन के तहत जंबो कैबिनेट पर रोक लगाई गई थी, लेकिन कर्नाटक सरकार ने बड़ी संख्या में दर्जा प्राप्त मंत्री बनाकर उसे दरकिनार कर दिया. DNA मित्रो, सिद्धारमैया सत्ता का ये तुष्टीकरण अपनी जेब से नहीं कर रहे हैं. उनके क़रीबी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर इस मेहरबानी की क़ीमत आम जनता चुकाएगी. आप और हम जो टैक्स के पैसे देते हैं, उसी से मंत्रियों के वेतन, भत्ते और सुविधाओं का खर्च उठाया जाएगा. आपको जानना चाहिए कि मंत्रियों को कितना वेतन और भत्ता हर महीने दिया जाता है.
मंत्रियों का वेतन
दर्जा प्राप्त मंत्रियों का वेतन 50 हज़ार रुपये है. इसके अलावा मेहमानों के स्वागत के लिए 3,000 रुपये दिए जाते हैं. यात्रा भत्ता के रूप में हर दिन 2,500 रुपये मिलते हैं यानी 30 दिनों के महीने में 75 हज़ार रुपये यात्रा भत्ता के रूप में दिया जाता है. गाड़ी के लिए ईंधन भत्ता के रूप में महीने में 1 लाख रुपये मिलते हैं. आवास भत्ता के रूप में 80 हज़ार रुपये दिए जाते हैं. स्टाफ के खर्च के रूप में 20 हज़ार रुपये मिलता है. इस तरह एक मंत्री पर सरकार हर महीने लगभग 3 लाख 28 हज़ार रुपये खर्च करती है. यानी एक दर्जा प्राप्त मंत्री के तुष्टीकरण की क़ीमत एक महीने में 3 लाख 28 हज़ार रुपये है जो टैक्स पेयर की जेब से जाता है. अगर हम Full fledged Minister को छोड़ दें तो ऐसे मंत्रियों की संख्या 117 हैं. यानी एक महीने में 3 करोड़ 84 लाख रुपये के आसपास इन दर्जा प्राप्त मंत्रियों पर खर्च होगा. साल के हिसाब से देखें तो लगभग 46 करोड़ रुपये इन दर्जा प्राप्त मंत्रियों पर खर्च आएगा. सोचिए सत्ता के तुष्टीकरण की क़ीमत हर साल 46 करोड़ रुपये है.
दर्जा प्राप्त मंत्री का ये दायरा कर्नाटक तक ही सीमित नहीं
पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में 35 नेताओं को दर्जा प्राप्त मंत्री बनाया गया. यहां 14 Full fledged Minister हैं. इस तरह 49 मंत्री हो जाते हैं जबकि यहां बीजेपी के 54 विधायक हैं. इसके अलावा यूपी में भी दर्जा प्राप्त मंत्री का रिवाज़ रहा है.
