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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि काशी के खिलाफ एक प्रपंच रचा जा रहा है. ऐसे प्रोपेगेंडा का जवाब देने के लिए योगी आदित्यनाथ खुद मैदान में उतरे. काशी की मणिकर्णिका घाट को सुंदर बनाने, लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए निर्माण कार्य चल रहा है. नवनिर्माण के लिए कुछ पुराने निर्माण को तोड़ा गया. इस दौरान काम को जल्दी पूरा करने के लिए बुलडोजर एक्शन हुआ, जिसका पिछले कुछ दिनों से विरोध हो रहा है. सीएम योगी ने मणिकर्णिका घाट को लेकर लग रहे आरोपों का एक-एक कर जवाब दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है. AI से वीडियो बनाकर दुष्प्रचार किया जा रहा है. मंदिर तोड़ने का झूठा दावा किया जा रहा है.

मणिकर्णिका घाट को समझिए

कहा जाता है कि मणिकर्णिका घाट पर मृत्यु अंत नहीं, बल्कि उत्सव है. लेकिन इसी मणिकर्णिका घाट पर पुराने भवनों को तोड़े जाने पर विवाद हो रहा है. इसके मूल में भी आस्था है. जो लोग विरोध कर रहे है उनका तर्क है कि घाट पर बुलडोजर चलाना आस्था और परंपरा से खिलवाड़ है. मशीनों से हुई तोड़फोड़ से घाट की प्राचीनता को नुकसान पहुंचा है. मणिकर्णिका घाट पर हर पत्थर का महत्व है, यहां तोड़फोड़ शास्त्रों के विरुद्ध है.

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सनातनियों की आस्था का सम्मान करते हुए फिलहाल यहां निर्माण कार्य रोक दिया गया है. लेकिन काम रोके जाने के बाद भी विपक्ष सरकार पर निशाना साध रहा है. कांग्रेस ने इसे काशी की पहचान मिटाने की साजिश बताया है. काशी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधा जुटाने के उद्देश्य से मणिकर्णिका घाट पर एक पुरानी संरचना को तोड़ा गया है. किसी बड़े मंदिर या दूसरे धार्मिक स्थल को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है.

 

काशी में कहा जाता है कि जिस दिन मणिकर्णिका पर कोई अंतिम संस्कार नहीं होगा, दुनिया का अंत हो जाएगा. फिलहाल मणिकर्णिका घाट पहुंचने के लिए तंग गलियों से होकर गुजरना पड़ता है. यहां दाह संस्कार की मूलभूत सुविधाएं बेहद जर्जर और गंदगी से भरी पड़ी थीं. यहां जलने वाली चिताओं से निकलने वाली भस्म काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक आती हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में अब जब कॉरिडोर बिल्कुल मणिकर्णिका घाट से सट गया है, इसके कायाकल्प की जरूरत महसूस की जा रही थी. मणिकर्णिका का नवनिर्माण इसी आवश्यकता से जुड़ा था.

सरकार मणिकर्णिका घाट को विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ नए सिरे से विकसित कर रही है. यहां बड़ा प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा ताकि एक साथ अंतिम संस्कार की बेहतर व्यवस्था हो सके. इसके लिए पहले चरण में 35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. यूपी की सरकार ने मणिकर्णिका के प्रस्तावित नए स्वरूप की तस्वीरें भी जारी की हैं जिनमें इस ‘महाश्मशान’ के भविष्य के स्वरूप को देखा जा सकता है. इस प्रोजेक्ट की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि अंतिम संस्कार के लिए बना ये घाट कायाकल्प के बाद कैसा दिखाई देगा. 

निर्माण से पहले स्थानीय लोगों की बात सुनी जाए

विध्वंस और नवनिर्माण का प्रश्न काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान भी उठा था. उस समय भी मंदिरों को तोड़ने का आरोप लगाया गया था. लेकिन आज काशी विश्वनाथ कॉरिडोर काशी की दिव्यता और भव्यता का प्रतीक बन गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उस समय की याद दिलाकर विपक्ष पर निशाना साधा.

आस्था संवेदनशील होती है. इसलिए मणिकर्णिका घाट पर हो रहे नवनिर्माण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. जरूरी है कि निर्माण से पहले स्थानीय लोगों की बात सुनी जाए. प्रशासन यही कोशिश कर रहा है कि पहले काशी निवासियों की आपत्ति को समझा जाए. उनकी आपत्तियों को दूर किया जाएगा, फिर नवनिर्माण की शुरुआत होगी. लेकिन झूठी तस्वीरों के सहारे आस्था को भड़काना महापाप है. मुख्यमंत्री ने ऐसा करने वालों को चेतावनी दे दी है.