
Centre Sends Notice To X: इंटरनेट पर आए दिन लगातार अश्लीलता बढ़ती जा रही है. इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इसके AI फीचर ‘Grok’पर लोग तस्वीरों से जुड़े कई रिक्वेस्ट कर रहे हैं. इनमें अश्लीलता भी शामिल है, जिसपर ध्यान देते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इनफर्मेंशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 के तहत ‘X’ को कड़ा नोटिस जारी किया है.
ग्रोक से बनवाए जा रहे भद्दे फोटोज
सरकार की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 72 घंटों के अंदर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) भेजने का आदेश दिया गया, जिसमें अपनाए गए उपायों, मुख्य अनुपालन अधिकारी की भूमिका और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ( BNSS) 2023 के तहत आवश्यक रिपोर्टिंग के पालन का डीटेल देना जरूरी है. मंत्रालय की ओर से उन रिपोर्टों पर गंभीर चिंता जाहिर की गई है कि, जिसमें ग्रोक का गलत इस्तेमाल कर महिलाओं को टारगेट करके उनके अश्लील, अभद्र और यौन रूप से स्पष्ट इमेज बनाने और शेयर करने के लिए किया जा रहा है.
ये भी पढ़ें- भारत को अपनी रक्षा का हक, पाकिस्तान को एस जयशंकर ने लगाई लताड़; चीन को भी नहीं बख्शा
सरकार ने भेजा नोटिस
लेटर में यह भी कहा गया है कि यूजर्स ने ग्रोक की AI क्षमता का गलत इस्तेमाल करके अपमानजनक तरीके से AI फोटोज और वीडियो बनाए हैं, जिससे प्राइवेसी और मर्यादा का उल्लंघन हुआ है. मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि ऐसी हरकत यौन उत्पीड़न को नॉर्मल बनाते हैं और कानूनी सुरक्षा उपायों को कमजोर करते हैं. मंत्रालय ने ‘X’ को आदेश दिया कि वह इलिगंल कंटेंट के बनाने से रोकने के लिए ग्रोक के टेक्निकेल और गवर्नेंस स्ट्रक्चर पर ध्यान दें.
ये भी पढ़ें- ‘एक पार्ट टाइम नेता भारत केवल नफरत फैलाने के लिए आते हैं….,’ वोट चोरी पर गौरव भाटिया का विपक्ष पर हमला, बंगाल को बताया जंगलराज
लागू करनी होगी स्ट्रि्क्ट यूजर पॉलिसी लागू
नोटिस में कहा गया कि ग्रोक को स्ट्रि्क्ट यूजर पॉलिसी लागू करनी होगी, जिसमें इन्हें फॉलो न करने वालों को सस्पेंड करना और उनकी मेंमबरशिप खत्म करना शामिल है. इसमें यह भी कहा गया कि सभी आपत्तिजनक कंटेंट को बिना सबूतों से छेड़छाड़ किए तुरंत हटा दिया जाना चाहिए. मंत्रालय ने कहा कि इन नियमों का पालन न होने पर इनफर्मेंशन टेक्नोलॉजी एक्ट 79 के तहत सुरक्षित आश्रय का भारी नुकसान हो सकता है. इससे BNS, महिलाओं के अश्लील चित्रण अधिनियम और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम समेत कई कानूनों के तहत कार्रवाई शुरु हो सकती है.
