Mallikarjun Kharge: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है. इसके बाद लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है, राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी का विश्वासघात अब सामने आ गया है. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ट्रेड डील पर फिर से बातचीत नहीं कर पाएंगे और फिर से सरेंडर कर देंगे. वहीं खड़गे ने कहा कि नरेंद्र मोदी की लीडरशिप वाली केंद्र सरकार की बिना किसी जानकारी वाली फॉरेन पॉलिसी है या उसने US के सामने एकतरफा सरेंडर कर दिया है.
जॉइंट स्टेटमेंट की आलोचना की
वहीं खड़गे ने पूछा कि केंद्र ने अंतरिम ट्रेड डील करने से पहले US कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया. X पर एक पोस्ट करते हुए उन्होंने जॉइंट स्टेटमेंट की आलोचना की. उन्होंने लिखा कि जॉइंट स्टेटमेंट में भारत को कई अमेरिकी एक्सपोर्ट पर जीरो टैरिफ, भारत की खेती को अमेरिकी सामान के लिए खोलने, USD 500 बिलियन के US सामान इंपोर्ट करने की योजना, हमारी एनर्जी सिक्योरिटी को नुकसान पहुंचाने वाले रूसी तेल की खरीद पर रोक लगाने और डिजिटल मोर्चे पर कई टैक्स छूट की बात कही गई थी.
किसने डाला सरकार पर दबाव
आगे लिखा कि बिना जानकारी वाली विदेश नीति या एकतरफा सरेंडर? मोदी सरकार ने टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया और फिर एक TRAP DEAL में फंस गई. भारत के राष्ट्रीय हित और स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी से समझौता करने के लिए आप पर किसने या किसने दबाव डाला? आगे सवाल किया कि क्या GOI अपनी गहरी नींद से जागेगी और एक सही ट्रेड डील करेगी जो 140 करोड़ भारतीयों के आत्म-सम्मान और हमारे किसानों, मजदूरों, छोटे बिजनेस और व्यापारियों के हित की रक्षा करे? इसके अलावा कहा कि पीएम मोदी को भारतीयों के सामने खड़े होकर सच बताना चाहिए.
The PM is compromised.
His betrayal now stands exposed.He can’t renegotiate.
He will surrender again.— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 21, 2026
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया फैसला
बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए भारी टैरिफ को रद्द कर दिया है.सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से फैसला सुनाया कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर इंपोर्ट टैरिफ लगाकर अपने कानूनी अधिकार का गलत इस्तेमाल किया. ये फैसला उनकी अंतरराष्ट्रीय ट्रे़ड नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. जिसके बाद से इसपर सियासी बहस भी होने लगी है. (ANI)
