
Jamia Millia Islamia: जामिया की परीक्षा में ऐसा सवाल पूछा गया जो वैचारिक दुष्प्रचार का चरम है. जिसका मकसद देश की बदनामी है. भारत में सामाजिक समस्या विषय के तहत सवाल पूछा गया कि ‘भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की चर्चा कीजिए और इसका उचित उदाहरण दीजिए’. ये सवाल बीए ऑनर्स के सोशल वर्क डिपार्टमेंट के पहले सेमेस्टर में पूछा गया जिसकी परीक्षा सोमवार को हुई थी. हैरानी की बात ये है कि किसी यूनिवर्सिटी की परीक्षा में इस तरह का सवाल कैसे पूछा जा सकता है. यूनिवर्सिटी भी ऐसी जो केंद्र सरकार के पैसे से चलती है. इस तरह के आरोप कुछ कट्टरपंथी लगाते हैं. ऐसी बात राजनीतिक पार्टियों के नेता करते हैं. भला वो सरकारी यूनिवर्सिटी की परीक्षा में सवाल कैसे बन सकता है.
मुस्लिमों पर अत्याचार का सवाल
इस विषय पर परीक्षा में प्रश्न पूछा जाना ये दिखाता है कि पढ़ाई के दौरान क्लासरूम में इसकी चर्चा की जाती होगी, छात्रों को यही पढ़ाया जाता होगा. क्योंकि सिलेबस के बाहर का सवाल आम तौर पर पूछा नहीं जाता है. छात्रों को उदाहरण समेत ये विषय पढ़ाया जाता होगा, तभी तो परीक्षा में उदाहरण समेत उत्तर मांगा गया है. छात्रों के दिमाग में अतिवाद का ये कैसा जहर भरा जा रहा है. परीक्षा में अगर इस तरह के प्रश्न पूछे जाएंगे तो दुनिया में क्या संदेश जाएगा. इस सवाल को उदाहरण बनाकर दुनिया में भारत विरोधी तत्व दुष्प्रचार करेंगे. वो कहेंगे कि भारत में मुसलमानों पर अत्याचार होता है क्योंकि सरकारी यूनिवर्सिटी में छात्रों को ये पढ़ाया जा रहा है. जो छात्र ये पढ़ रहे हैं, वो तो हमेशा-हमेशा के लिए इसे सच मान बैठेंगे.
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दीपू दास की लिंचिग
आज जब बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बर्बर हिंसा हो रही है, उस समय भारत के एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में इस प्रकार का प्रश्न पूछा जा रहा है. ये देश के विरुद्ध, हिंदुओं के विरुद्ध और शिक्षा में निष्पक्षता के विरुद्ध एक सोची-समझी साजिश लगती है. आज समय ये सवाल पूछने का है कि बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या घटकर इतनी कम क्यों हो गई? आज सवाल ये पूछने का है कि हिंदुओं के खिलाफ बांग्लादेश में हिंसा के पीछे जिम्मेदार कौन है? आज क्या ये पूछने का है कि भारत में अल्पसंख्यक पड़ोसी देशों की तुलना में कितने सुरक्षित हैं? लेकिन उस समय सवाल पूछा जा रहा है कि उदाहरण के साथ भारत में मुसलमानों पर अत्याचार की चर्चा कीजिए. आखिर किस अत्याचार की बात जामिया यूनिवर्सिटी कर रही है.
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सवाल की आड़ में अपना एजेंडा सेट कर रहे
इसी दिल्ली में पिछले महीने पहले एक ब्लास्ट हुआ था जिसमें बेकसूर लोगों की जान गई थी. सवाल तो इस आतंकवाद को लेकर बनता है. लेकिन जामिया में सवाल सेट करने वाले प्रोफेसर झूठे अत्याचार की तस्वीर पेश कर रहे हैं. सवाल की आड़ में अपना एजेंडा सेट कर रहे हैं. जामिया वही यूनिवर्सिटी है जहां बटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों की बरसी मनाई जाती है. यहां के कुछ छात्र एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों को शहीद का दर्जा देते हैं. इन छात्रों को तो भटका हुआ नौजवान कहकर खारिज किया जा सकता है. लेकिन जब खुद यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले शिक्षक भारत विरोधी नैरेटिव बनाएं तो ये देश से साजिश लगती है.
डॉक्टर के नाम पर आतंकवादी तैयार किए
अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब देश को फरीदाबाद की उस अल फलाह यूनिवर्सिटी के बारे में पता चला, जहां पढ़ाई के नाम पर देश विरोधी गतिविधियां चल रही थीं. डॉक्टर के नाम पर आतंकवादी तैयार किये जा रहे थे. वैसे अल फलाह और जामिया के बीच अंतर ये है कि अल फलाह प्राइवेट यूनिवर्सिटी है. अल फलाह की फंडिंग सरकार नहीं करती है. लेकिन जामिया तो केंद्र सरकार की यूनिवर्सिटी है. केंद्र सरकार के पैसे से ये यूनिवर्सिटी चलती है. हमारे और आपके टैक्स से इसके प्रोफेसर को वेतन मिलता है. लेकिन इसके बावजूद जामिया में देश विरोधी नैरेटिव चलाया गया. ये कोई पहला अवसर नहीं है जब जामिया पर हिंदू विरोधी होने के आरोप लगे हैं. नवंबर 2024 में कॉल फॉर जस्टिस नाम के एक NGO ने जामिया में गैर-मुस्लिम छात्रों और फैकल्टी से भेदभाव का आरोप लगाया था. जामिया में धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन या दबाव बनाने के आरोप भी लग चुके हैं. दिवाली के लिए बनाई गई रंगोली को पैरों से कुचलने का आरोप लगा
प्रोफेसर को किया सस्पेंड
भारत विरोधी नैरेटिव वाले जामिया के सवाल को लेकर Zee News की ओर से यूनिवर्सिटी प्रशासन से भी जवाब मांगा. इसके जवाब में जामिया प्रशासन ने सवाल सेट करने वाले प्रोफेसर के खिलाफ एक्शन लेने की घोषणा की है. जामिया के मुताबिक प्रोफेसर वीरेंद्र बालाजी शहारे की लापरवाही को गंभीरता से लिया गया है. प्रोफेसर वीरेंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. वीरेंद्र जामिया के डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वर्क के प्रोफेसर हैं. इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन भी किया गया है. उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मामले में ऐसा फैसला आएगा जो सटीक उदाहरण बनेगा. ऐसा उदाहरण जो शिक्षा को वैचारिक हथियार बनाने से रोके.
