SC Hearing On SIR: देश के सवैंधानिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि जब किसी सीटिंग सीएम ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखी. पश्चिम बंगाल SIR मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ममता बनर्जी को कई बार टोका, लेकिन वह बार बार उन्हें सुनने का आग्रह करती रही. लगभग 20 मिनट उन्होंने अपनी बात रखी. सुप्रीम कोर्ट में वैसे तो मामलों की सुनवाई साढ़े दस बजे से शुरु होती है, लेकिन सुनवाई शुरू होने से 20 मिनट पहले ही ममता बनर्जी कोर्ट पहुंच गई थीं. उनकी तरफ से वकील श्याम दीवान ने SIR प्रकिया में गड़बड़ी का हवाला देते हुए अपनी दलील रखी.
ममता ने कोर्ट से बार बार आग्रह किया
ममता बनर्जी ने कोर्ट में कहा,’ हमारे वकील शुरुआत से केस लड़ रहे है, लेकिन हमे कहीं इंसाफ नहीं मिल रहा है. इंसाफ दम तोड़ रहा है. मैंने कई बार चुनाव आयोग को लिखा है. उन्हें 6 पत्र लिखें गए है. पर कोई जवाब नहीं आया है. मै कोई बहुत खास नहीं हूं. मैं बेहद सामान्य परिवार से आती हूं, लेकिन मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं.’ ममता को टोकते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि आपके पास पैरवी करने के लिए पहले ही श्याम दीवान और कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ वकील है. हम पूरी कोशिश करेंगे कि समाधान निकले और किसी वाजिब मतदाता का नाम वोटर लिस्ट न छूटे. पर ममता ने उनसे आग्रह किया कहा कि उन्हें सिर्फ 10 मिनट बोलने दिया जाए.
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SIR के रिए नाम काटे जा रहे
ममता ने कोर्ट में अखबारों में छपी हुई कुछ तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि हकीकत ये है कि SIR की प्रक्रिया सिर्फ नाम हटाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है. अगर कोई बेटी शादी के बाद ससुराल चली जाती है, तो उससे सवाल किया जा रहा है कि वह पति का सरनेम क्यों इस्तेमाल कर रही है. ऐसी कई बेटियां हैं जो शादी के बाद ससुराल गईं और उनका नाम लिस्ट से हटा दिया गया. गरीब कहीं और शिफ्ट हो जाते हैं,तो उनका नाम भी हटा दिया जा रहा है. ममता बनर्जी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले सिर्फ बंगाल को ही निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा,’ सिर्फ बंगाल ही क्यों असम क्यों नहीं’. ममता ने कहा कि बंगाल के लोग बहुत खुश थे कि इस कोर्ट ने आधार कार्ड को एक सबूत के रूप में मानने का आदेश दिया, लेकिन उन्होंने इसकी इजात नहीं दी. दूसरे राज्यों में डोमिसाइल सर्टिफिकेट, फैमिली रजिस्टर कार्ड, सरकारी आवास कार्ड, हेल्थ कार्ड जैसे दस्तावेज मान्य हैं, लेकिन बंगाल में नहीं है, जो काम 2 साल में होता है, उसे 2 महीने में किया जा रहा है. जब त्योहारों का मौसम है, जब फसल कटाई का समय है, जब लोग शहर में रहने की हालत में नहीं हैं, तब नोटिस देकर लोगों को परेशान किया जा रहा है. 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. BLO ने चुनाव आयोग की परेशानियों के कारण पत्र लिखते-लिखते जान दे दी. कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं.
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माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति पर सवाल
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि 8,000 माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं, जो BLO के अधिकार को दरकिनार कर नाम हटाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग व्हाट्सऐप के जरिये अनौपचारिक निर्देश दे रहा है. उन्होंने इसे इलेक्शन कमीशन नहीं व्हाट्सएप्प कमीशन बताया. चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि राज्य सरकार ने SIR के काम के लिए पर्याप्त ग्रुप B अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराया, जबकि चुनाव आयोग ने कई बार याद दिलाया था. इसी वजह से चुनाव आयोग को माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त करने पड़े. सुनवाई के अंत में बेंच ने ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और उनसे अगले सोमवार तक जवाब मांगा।माइक्रो-ऑब्ज़र्वर के मसले पर कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार SIR के काम के लिए उपलब्ध कराए जा सकने वाले ग्रुप B अधिकारियों की सूची दे देती है, तो माइक्रो-ऑब्जर्वरों को हटाया जा सकता है.
