
Supreme Court: देश भर में बाबर के नाम पर किसी भी मस्जिद के निर्माण या नामकरण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया. याचिका में कहा गया था कि मुगल शासक बाबर एक विदेशी आक्रांता था, जिसने हिंदुओं की हत्या की थी. उस जैसे धर्मांध शासक के नाम पर देश में कोई मस्जिद नहीं बननी चाहिए.
याचिकाकर्ता का पक्ष
अयोध्या के रहने वाले वकील देवकीनंदन पांडेय ने यह याचिका दायर की थी, याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और टीएमसी के पूर्व नेता हुमायूं कबीर को पक्षकार बनाया गया गया था.
‘बाबर हिंदू विरोधी के साथ देश विरोधी भी था’
याचिका में बाबरनामा के कई हिस्सों के हवाला दिया. याचिकाकर्ता के मुताबिक बाबरनामा में बाबर ने खुद कहा है कि इस्लाम के लिए उसने काफिरों और हिंदुओं के खिलाफ युद्ध किया. उसने हिंदुओं की हत्या की, याचिकाकर्ता मुताबिक बाबर न केवल हिंदू विरोधी था,बल्कि देश के खिलाफ था.
मंदिरों पर हमले किए
बाबरनामा में भारत को दुश्मनों का देश यानि दारुल-हरब कहकर संबोधित किया. उसने मुगल बादशाह रहते हुए देश में विभिन्न मंदिरों और हमला किया. देश की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को नष्ट किया. बाबर के कहने पर उसके सेनापति मीर बाकी ने अयोध्या में श्रीराम के जन्मस्थान पर 1528 में बाबरी मस्जिद का निर्माण किया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है और इससे दोनों समुदाय के बीच चल रहे विवाद पर रोक लग गई है लेकिन हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का निर्माण कर इस मुद्दे को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, इसके चलते कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है. देश का सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है.
कोर्ट का रुख
आज यह याचिका जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने लगी. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आलोक मिश्रा पेश हुए. उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर एक मस्जिद का निर्माण होने का हवाला दिया. वकील ने कहा कि बाबर ने हिंदुओं का गुलाम बनाया, उनकी हत्या की. उसके नाम पर किसी मस्जिद का निर्माण नहीं होना चाहिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया.
