Vande Mataram: स्कूलों, सरकारी कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों मे राष्ट्रगीत वंदेमातरम का गायन अनिवार्य हो चुका है. अब 6 छंद यानी पूरा वंदेमातरम गाना अनिवार्य है. लेकिन देश में जो आहत लोग पहले वंदे मातरम के सिर्फ 2 छंद गाने का विरोध करती थी, अब उसने 6 छंद गानेवाले फैसले पर शाब्दिक प्रहार कर रहे हैं. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी ऐसा ही संगठन है, जिसके नाम में तो इंडिया है लेकिन भावनाएं कितनी भारतीय है उनकी एक चिट्ठी पढ़कर पता लग जाता है. जिसमें उन्होंने लिखा, वंदेमातरम गायन का आदेश संविधान विरोधी है. धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है. धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है. मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है.
मौलाना अरशद मदनी ने एक पोस्ट लिखी- ‘मुसलमानों से वंदे मातरम गवाना संविधान के आर्टिकल 25 का उल्लंघन है. वंदे मातरम जरूरी बनाना देशभक्ति का इजहार नहीं है. ऐसे फैसले देश की शांति, एकता और डेमोक्रेटिक मूल्यों को कमजोर करके संविधान की भावना कमजोर करते हैं. देश के लिए प्यार का असली पैमाना नारों में नहीं, बल्कि किरदार और कुर्बानी में है.
AIMPLB की चिट्ठी-अरशद मदनी की पोस्ट
क्रांतिकारी, दार्शनिक और विद्वान अरविंद घोष ने कहा है कि वंदे मातरम् गीत नहीं पवित्र मंत्र है जो राष्ट्रीय आत्मा को जागृत करता है. कहा जा रहा है कि हम मुसलमान है इसलिए वंतेमातरम नहीं गाएंगे. ऐसे में भारतीय नागरिक होने के नाते भी इस जिम्मेदारी का निर्वाह किया जा सकता है. देश में बहुत सारे मुसलमान हैं, जिन्हें वंदे मातरम गाने से कोई दिक्कत नहीं है. देश की बड़ी मुस्लिम आबादी वंदे मातरम गाती रही है, परेशानी चंद लोगों को है.
तर्क है कि वंदेमातरम में देश को माता के रूप में बताया गया है. चलिए ये ठीक है. लेकिन मां का सम्मान तो सभी धर्मों में होता है. कहा जा रहा है वंदेमातरम का गायन मुसलमानों के धार्मिक मामलों और धार्मिक आजादी में दखल है. किसी धार्मिक स्थल पर वंदेमातरम का गायन अनिवार्य नहीं किया गया है. स्कूल और अन्य सरकारी कार्यक्रमों में ही वंदेमातरम का गायन अनिवार्य है.
राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान को लेकर हम आपको कुछ इस्लमिक देशों के बारे में जरूरी जानकारी देना चाहेंगे. मलेशिया में राष्ट्र गान का सम्मान नहीं करने पर 100 रिंगिट का जुर्माना या एक महीने की जेल हो सकती है. यहां राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े नहीं होने को भी प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जाता है. रिंगिट मलेशिया की करेंसी है.
तुर्किए में राष्ट्रीय प्रतीकों जिसमें राष्ट्रीय गान भी शामिल है के अपमान पर 6 महीने से 2 साल की सजा हो सकती है. सऊदी अरब में फ्लैग लॉ के तहत राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान पर 1 से 3 साल की सजा और भारी जुर्माना हो सकता है. ईरान में राष्ट्रीय गान के अपमान पर अदालत जितने दिन चाहे उतने दिन की जेल की सजा सुना सकती है. सजा में कोड़े मारने का भी प्रावधान है. ये इस्लामिक देश हैं. लेकिन नियम बहुत साफ हैं. चाहे किसी भी धर्म, वर्ण या रंग का आदमी को उसे राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना होगा. ऐसा नहीं करने पर सजा और जुर्माना हो सकता है. आप सोचिए आस्था के पर्दे में वंदेमातरम का विरोध करने वालों के तर्क कितने सही हैं.
