Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र में अक्सर पक्ष-विपक्ष में किसी न किसी बात को लेकर तकरार छिड़ी रहती है. शिंदे के दोनों गुट किसी न किसी बात को लेकर एक दूसरे पर हमलावर रहते हैं. इसी बीच निकाय चुनाव को लेकर तकरार छिड़ी है. चुनावी समर के बीच उद्धव और राज ठाकरे ने हाथ मिला लिया है. दोनों के साथ आने से जहां एक तरफ हलचल मची है वहीं दूसरी तरफ सूबे के मुखिया देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि ठाकरे अब कोई ब्रांड नहीं रहे. इसके अलावा उन्होंने और क्या कहा आइए जानते हैं?
ब्रांड तो एक ही ठाकरे थे
मीडिया से बात करते हुए सीएम ने कहा कि ठाकरे अब कोई ब्रांड नहीं रहे, सिर्फ एक ठाकरे ब्रांड थे और वह थे स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे, अगर ठाकरे के चचेरे भाई 2009 में एक साथ आए होते, तो नतीजा कुछ और होता, अब एक साथ आने से कोई फायदा नहीं है, उनका वोट परसेंटेज बहुत कम है. न तो मराठी मानुष और न ही गैर-मराठी उन्हें वोट देंगे, इसलिए, हमें उनके एक साथ आने की चिंता नहीं है, उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना (UBT) और MNS के गढ़ एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं.
महायुति से होगा मेयर
इसके अलावा कहा कि हमारे वोट कभी नहीं बदले, वे एक जैसे रहे, उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच पहले से ही मतभेद हैं, मुंबई का मेयर कौन होगा? इस सवाल पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मेयर महायुति से होगा वह वह एक हिंदू और एक मराठी होगा, मुंबई और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर कामों को लेकर कहा कि ये प्रोजेक्ट्स उनके आइडिया नहीं थे लेकिन उनके सीएम बनने के बाद पूरे हुए.
अटल सेतु का प्रस्ताव
अटल सेतु का प्रस्ताव 1962 में JRD टाटा ने रखा था. पृथ्वीराज चौहान CM थे और वह हमेशा कहते थे कि कोस्टल रोड उनका पसंदीदा प्रोजेक्ट है. उनके सेना के साथ अच्छे रिश्ते थे और मनमोहन सिंह PM थे, वह रेगुलर दिल्ली जाते थे लेकिन कुछ नहीं किया. मैंने प्रोजेक्ट्स की स्टडी की, दिक्कतों को समझा, सेंटर के साथ कम से कम पांच मीटिंग कीं, और अटल सेतु और कोस्टल रोड के लिए क्लीयरेंस दिलवाई.
