Mumbai Airport Plane Collision: मुंबई एयरपोर्ट पर मंगलवार को बड़ा विमान हादसा उस समय होते होते टल गया जब दो फ्लाइट की जमीन पर ही टक्कर हो गई. सबसे चिंता की बात यह है कि इन दोनों ही फ्लाइट में यात्री मौजूद थे. यह घटना तब हुई जब एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2732 डिपार्चर के लिए पीछे हट रही थी, उसी समय इंडिगो की फ्लाइट 6E 791 लैंडिंग के बाद टैक्सी कर रही थी. हालांकि राहत की बात यह है कि इस टक्कर में कोई यात्री घायल नहीं हुआ और सभी सुरक्षित हैं.
कैसे हुई दोनों विमानों की टक्कर?
मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार शाम को एअर इंडिया की फ्लाइट AI 2732 मुंबई से कोयंबटूर जाने के लिए टैक्सीवे पर थी. उसी समय इंडिगो की फ्लाइट 6E 791 हैदराबाद से मुंबई पहुंचने के बाद टैक्सी कर रही थी. इसी समय आगे बढ़ते हुए इंडिगो विमान का पंख खड़े एअर इंडिया विमान के पंख से टकरा गया. टक्कर जमीन पर हुई. टक्कर होते ही विमान में झटका महसूस हुआ और यात्रियों में हड़कंप मच गया. हालांकि टक्कर मामूली थी जिससे बड़ा नुकसान नहीं हुआ. लेकिन अगर टक्कर थोड़ी तेज होती या रनवे पर होती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी. यह ग्राउंड हैंडलिंग में चूक दिखाता है.
Mumbai Airport | While Air India AI2732 was taxiing from C1 towards M4 for departure, and the IndiGo arrival flight was taxing joining B1, the right wing tips of both the aircraft touched each other. Both aircraft were taxiing at the time of the incident. Both aircraft returned… pic.twitter.com/hZXxlrrx9l
— ANI (ANI)
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यह चूक फ्लाइट की तकनीक पर एक बड़ा सवालिया निशान भी खड़े कर रही है. आज के दौर में जब ₹10 लाख की कार में 360-डिग्री कैमरा हो सकता है तो ₹500 करोड़ के विमान ‘अंधेरे’ में आखिर सफर क्यों कर रहे हैं? दो बड़े विमानों के विंग्स आपस में रगड़ना सामान्य नहीं है. यह बड़े हादसे में भी बदल सकता था. लेकिन इस घटना ने उस ‘तकनीकी खाई’ को उजागर कर दिया है जिसे हम नजरअंदाज कर रहे थे.
आपकी कार स्मार्ट है पर करोड़ों की हवाई जहाज ‘बेबस’?
आज के इस दौर में नार्मल स्मार्टफोन में प्रॉक्सिमिटी सेंसर होता है जो कान के पास जाते ही स्क्रीन बंद कर देता है. ₹8-10 लाख की कारों में ADAS यानी Advanced Driver Assistance Systems का सपोर्ट मिलने लगा जो टक्कर होने से पहले खुद ब्रेक लगाने का सिग्नल देने लगता है. कई कार में तो खुद ही ब्रेक अप्लाई कर देता है. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया के सबसे महंगे ट्रांसपोर्ट सिस्टम यानी हवाई जहाज के विंग्स जो काफी ज्यादा क्षेत्र को कवर करते हैं, उनपर अभी भी ऐसे सेंसर्स नहीं लगे हैं जो पायलट को बता सकें कि बगल वाले प्लेन से दूरी कितनी है.
क्यों फेल हो रही है करोड़ों की तकनीक?
हवाई जहाज में आसमान के लिए TCAS यानी Traffic Collision Avoidance System होता है. यही सिस्टम दो प्लेन को आपस में टकराने से बचाता है. लेकिन जमीन पर आते ही विमान पूरी तरह से इंसानी आंखों, ग्राउंड स्टाफ और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर अधिकारी के निर्देशों पर होता है. पायलट की कॉकपिट से फ्लाइट के बड़े विंग्स के आखिरी छोर दिखाई नहीं देते हैं. ऐसे में विंग्स की दूरी और दूसरी फ्लाइट की दूरी का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है. विंग-टिप्स पर कैमरे या अल्ट्रासोनिक सेंसर न होना एक बहुत बड़ा टेक-गैप है.
Ground Collision को रोकने वाली टेक पर कंजूसी क्यों?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि विमानों के विंग्स परHigh-Res कैमरों और सेंसर्स का होना जरूरी है. इस पर विमानन कंपनियों का तर्क है कि ऐसे सेंसर लगाने से ड्रैग यानी हवा का दबाव बढ़ता है और ईंधन की खपत बढ़ती है. लेकिन क्या ईंधन बचाने की कीमत सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा से समझौता किया जा सकता है? मुंबई की घटना बताती है कि अब विजुअल जजमेंट के भरोसे रहने का समय निकल चुका है.
कितना खतरनाक हो सकता था ये हादसा
आपको बता दें कि प्लेन के विंग्स दिखते तो काफी बड़े हैं, लेकिन अंदर से खोखले होते हैं. इन्हीं विंग्स में जेट फ्यूल को स्टोर किया जाता है. अगर इसके अलावा फ्यूल को कहीं और स्टोर किया जाए, तो प्लेन का ही वजन बढ़ेगा. अगर मुंबई एयरपोर्ट पर हुई ये टक्कर और रफ्तार से हुई होती तो यह एक बड़े धमाके का भी रूप ले सकती है. इसके पीछे का कारण है फ्लाइट के विंग्स में मौजूद जेट फ्लूल. टक्कर से आग लगने का खतरा रहता है.
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क्या Taxibots है समाधान?
इस चूक ने Taxibot टेक्नोलॉजी को लेकर एक बार फिर से चर्चा शुरू कर दी है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह एक रिमोट-कंट्रोल रोबोटिक ट्रैक्टर होता है जो विमान को रनवे तक ले जाता है. इसमें लगे सेंसर्स यह तय करते हैं कि प्लेन किसी भी चीज से न टकराए. अगर मुंबई में ऐसी ऑटोमेटेड तकनीक होती तो यह ‘विंग-किस’ कभी नहीं होता. मुंबई एयरपोर्ट की यह घटना एक चेतावनी है. हमें यह समझने और जानने की जरूरत है कि जब हम 6G और AI की बातें कर रहे हैं तब करोड़ों के विमानों का पुराने ढंग से टैक्सी करना किसी बड़े खतरे को दावत देना है.
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