आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने एक बार फिर 75 साल में रिटायरमेंट की बात कही है. मुंबई में ‘संघ यात्रा के 100 साल’ पर आयोजित कार्यक्रम के दूसरे दिन बोलते हुए भागवत ने संघ के भीतर पदानुक्रम (हाइरैरिकी) समझाया. उन्होंने कहा कि 40 प्रांत प्रतिनिधि होते हैं. उनके पीछे एक अखिल भारतीय प्रतिनिधि होता है. ये सरकार्यवाह और क्षेत्र संघचालकों का चुनाव करते हैं. और उनके साथ प्रांतीय प्रतिनिधि मिलकर प्रांत, विभाग, जिला संघचालकों का चुनाव करते हैं. बाकी सब लोगों की नियुक्ति ये लोग करते हैं. अपवाद एक है सरसंघचालक. सरसंघचालक जो है वो अगले की नियु्क्ति करता है. उसमें निर्वाचन… यह एक श्रद्धा का स्थान माना जाता है. वहां चुनाव वगैरह नहीं है.
भागवत ने कहा कि वो व्यक्ति का मान नहीं है, आसन का मान है. अब नियुक्ति ऐसे होती है, निवृत्ति कभी भी हो सकती है. कार्य से निवृत्ति जीवनभर नहीं होती. मरते दम तक लोग कार्य करते रहते हैं, लोग ऐसे भी हैं. जब तक शरीर चलता है तब तक काम करते हैं. लेकिन सामान्यत: ऐसा सोचते हैं हम कि 75 की आयु के बाद बिना दायित्व के काम करना चाहिए.
