राजनीति में कभी-कभी ऐसे मोड़ आते हैं जो सब कुछ बदल देते हैं. महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ महीनों से एक बड़ी खबर उड़ रही थी. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो गुटों का फिर से एक होना. शरद पवार और अजित पवार के बीच की दरार खत्म होने वाली थी, लेकिन अजित पवार की असमय मौत ने सब पर पानी फेर दिया. फिर भी, पार्टी के नेता कह रहे हैं कि ये प्रक्रिया रुकी नहीं है, बस थोड़ा वक्त लगेगा. आइए, इस पूरी कहानी को थोड़ा करीब से समझते हैं.
8 फरवरी को होने वाला था दोनों गुटों का ऐलान
इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट 8 फरवरी को औपचारिक रूप से फिर से एक होने की घोषणा करने वाले थे. लेकिन अजित पवार के अचानक निधन ने इस पूरी प्रक्रिया को बड़ा झटका दे दिया. सूत्रों के मुताबिक, मर्जर को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी और ज़िला परिषद चुनावों के नतीजों के बाद औपचारिक ऐलान की पूरी तैयारी थी.
मर्जर बातचीत बहुत आगे आ चुकी है, प्रक्रिया जारी
एनसीपी नेताओं का कहना है कि अजित पवार के निधन से भले ही तत्काल टाइमलाइन को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई हो, लेकिन राजनीतिक प्रक्रिया अब भी जारी है. सूत्रों ने बताया कि बुधवार देर रात, अजित पवार को श्रद्धांजलि देने बारामती पहुंचे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने एक अहम बैठक की. इस बैठक में बदलते राजनीतिक हालात के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा हुई.
सरकार में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम?
सूत्रों के अनुसार, दोनों गुटों का एक होना शरद पवार के नेतृत्व वाले NCP गुट के सरकार में शामिल होने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा था. फिलहाल स्थिति यह है अजित पवार के नेतृत्व वाला NCP गुट सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा है. जबकि NCP (SP), शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के साथ महाविकास अघाड़ी में शामिल है.
अजित पवार थे दोनों गुटों के बीच अहम कड़ी
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार दोनों NCP गुटों के बीच सबसे अहम कड़ी माने जाते थे. उन्होंने न सिर्फ शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट से बातचीत के रास्ते दोबारा खोले, बल्कि खुद आगे बढ़कर मर्जर वार्ता का नेतृत्व किया. द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों को मुताबिक बताया है कि मर्जर की बातचीत फाइनत स्टेज में थी. सूत्रों के मुताबिक, यह बातचीत उस स्तर तक पहुंच चुकी थी, जहां संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को शामिल करने पर भी अनौपचारिक चर्चा शुरू हो गई थी.
जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे का बयान
अजित पवार के निधन को “हम सभी के लिए बड़ी क्षति” बताते हुए सूत्रों ने कहा, “हाल के दिनों में दोनों गुटों की लगातार बैठकें हो रही थीं. 16 जनवरी को हम मेरे घर पर मिले थे, जहां साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर बातचीत फाइनल हुई. 17 जनवरी को शरद पवार जी के घर पर बैठक हुई.”
“अब सच्चाई सामने लाना जरूरी है. अजित पवार ने कहा था कि नगर निगम चुनावों के बाद हम एक साथ आएंगे. इस पर बैठकें भी हुई थीं. अजित दादा ने यह बात शरद पवार की ओर देखते हुए मार्गदर्शन के लिए कही थी. आगे की प्रगति अब इसी दिशा में होगी,”
नगर निगम चुनावों से बढ़ा भरोसा
जब NCP के दोनों गुटों ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव एक साथ लड़े, तभी से एकजुटता की चर्चा तेज हो गई थी. सार्वजनिक बयानों और मीडिया रिपोर्टों से दोनों खेमों के बीच नरमी के साफ संकेत मिलने लगे थे. नेताओं ने भी सार्वजनिक तौर पर अपने रुख नरम किए, जिससे यह साफ हुआ कि अंदरूनी मतभेद सुलझाने की कोशिशें जारी हैं.
जिला परिषद चुनाव मर्जर की परीक्षा
भरोसा मजबूत करने के लिए आने वाले ज़िला परिषद चुनाव भी साथ लड़ने की रणनीति बनाई गई थी. NCP (SP) के एक नेता ने बताया, “यह हालात को परखने और जिला परिषद के नतीजों के बाद मर्जर का ऐलान करने की रणनीति का हिस्सा था. 8 फरवरी की तारीख इसी वजह से तय की गई थी.”
रैलियों में भी अजित पवार ने दिए थे संकेत
अजित पवार ने सार्वजनिक रैलियों में भी दोनों गुटों के फिर से एक होने के संकेत दिए थे. मर्जर पर सवाल उठाने वालों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा था, “अगर हम एक साथ आते हैं तो कुछ लोगों को इससे परेशानी क्यों हो रही है?”
