
आम बोलचाल की भाषा में नसीहत देने के लिए लोग कह देते हैं कि वह अपनी कब्र खोद रहा है. हालांकि असल में 80 साल के एक बुजुर्ग ने अपनी कब्र खुदवाई है. वह कहते हैं कि यह मेरा घर है और इसे मैंने खुद तैयार किया है. यह उनकी आखिरी आरामगाह है. वह रोज उसकी देखभाल करते हैं. इस बूढ़े आदमी ने ग्रेनाइट के पत्थरों के पास पौधे भी लगवाए हैं. दूर से शायद लोगों को लगे कि यह कोई बगीचा होगा.
हालांकि यहां किसी ने अपनी मौत का इंतजाम कर रखा है. यह नक्का इंद्रय्या की कब्र है. तेलंगाना में हैदराबाद से करीब 200 किमी दूर जगतियाल जिले में उन्होंने अपना आखिरी घर खुद बनवाया है. आमतौर पर कब्र घरवाले बनवाते हैं. उन्होंने अपनी पत्नी की कब्र के पास की जगह अपने लिए चुनी है. उन्होंने अपने चार बच्चों से यह काम करने के लिए नहीं कहा. किस्मत पर भी उन्होंने नहीं छोड़ा.
हर सुबह अब वह पौधों को पानी देते हैं. आसपास की सफाई करते हैं और कब्र के पास कुछ देर चुपचाप बैठते हैं. जो बात दूसरों को परेशान करती है, वह उन्हें परेशान नहीं करती. वह कहते हैं, ‘यहीं मुझे मेरी मौत के बाद दफनाया जाएगा इसलिए मैंने इसे अपनी पसंद के हिसाब से डिजाइन कराया है.’
इंद्रय्या की कब्र 5 फीट गहरी, 6 फीट से थोड़ी ज्यादा लंबी है. यह पूरी तरह से ग्रेनाइट से बनी है ताकि खराब न हो. इस पर करीब 12 लाख रुपये खर्च हुए हैं. तमिलनाडु के एक राजमिस्त्री ने इसे बनाने में मदद की. इंद्रय्या ने यह भी बता रखा है कि मरने के बाद उन्हें कैसे दफनाया जाएगा.
वह बोले कि बस एक ऊपर रखे ग्रेनाइट को हटाना है. जब मुझे दफना दिया जाए तो ग्रेनाइट को वापस धकेल कर सील कर दिया जाए.
जब उनके पिता की मौत हुई, तब वह 10 साल के थे. इसके तुरंत बाद इंद्रय्या ने काम करना शुरू कर दिया. पहले उन्होंने मजदूरी की फिर दुबई के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 45 साल बिताए. कुछ साल पहले उनकी पत्नी की मौत हो गई. वह अपनी बचत, अकेलेपन और साफ सोच के साथ घर लौटे.
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता था. मौत से डरने की कोई जरूरत नहीं है. हर कोई मरेगा. मुझे पता है कि मैं भी मरूंगा. मुझे यह भी पता है कि मुझे कहां दफनाया जाएगा. हर दिन, वह आदमी कब्र से चलकर लक्ष्मीपुर गांव में अपने घर वापस आता है. उसके पीछे की जगह तैयार है.
