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नई दिल्ली: आज बीजेपी ने एक Tool Kit को सार्वजनिक करते हुए ये आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कोरोना महामारी को देश और देश की सरकार के ख़िलाफ़ एक टूल की तरह इस्तेमाल किया. बीजेपी (BJP) ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सरकार के ख़िलाफ़ जो भी एजेंडा बनाया गया, उसकी रुपरेखा पहले ही बना ली गई थी.

आपको याद होगा जब 26 जनवरी को दिल्ली में लाल किला पर हिंसा भड़की थी, उसके बाद भी एक ऐसी ही Tool Kit सामने आई थी. उस दौरान भी इसी तरह Tool Kit में हिंसा की पूरी स्क्रिप्ट लिखी गई थी. जो Tool Kit आज बीजेपी ने सार्वजनिक की है, उसमें भी देश को बदनाम करने की पूरी स्क्रिप्ट लिखी है.

‘पीएम की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश’

बीजेपी का आरोप है कि प्रधानमंत्री की छवि को नुक़सान पहुंचाने के लिए ये Tool Kit कांग्रेस ने बनाई थी. हालांकि कांग्रेस ने इस ToolKit को फर्जी बताया है और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और संबित पात्रा पर FIR दर्ज करने की मांग की है. आपको यह बात आपको स्पष्ट कर दें कि Zee News इस Tool Kit की सत्यता की पुष्टि नहीं करता. हम आपको आज वही बताएंगे, जो आरोप बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाए हैं और ये Tool Kit उपलब्ध कराई है.

टूलकिट की 8 बड़ी बातें समझिए

सबसे पहले आपको ये बताते हैं कि इन दस्तावेज़ों में 8 बड़ी बातें क्या लिखी हैं? यानी इस स्क्रिप्ट के 8 बड़े Dialogues क्या हैं?
पहली बात – ये Tool Kit कहती है कि हरिद्वार में आयोजित कुम्भ मेले को Super Spreader के तौर पर पेश किया जाएगा. यानी इस Tool Kit में ये लिखा है कि कुंभ से कोरोना फैला ये बात सब जगह बोली जाए और ईद एक सामाजिक मेल मिलाप का त्योहार है, इसे इस तरह से पेश किया जाए.

दूसरी बात – पूरे देश और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का इस्तेमाल किया जाए.

तीसरी बात – ToolKit में लिखा है कि कोरोना महामारी का इस्तेमाल करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि ख़राब की जाए.

चौथी बात – वायरस के नए Strain के लिए Indian Strain शब्द का इस्तेमाल किया जाए. यानी दुनियाभर में भारत की बदनामी करना और नए स्ट्रेन की पहचान भारत के साथ स्थापित कर देना.

पांचवीं बात – कोरोना से जान गंवाने वालों की जलती हुई चिताओं की तस्वीरों का प्रयोग करना ताकि दुनियाभर में भारत की ग़लत छवि बनाई जा सके.

छठी बात – बुद्धिजीवियों की मदद से PM Cares Fund को निशाना बनाया जाए. यानी ऐसा करके आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा करना.

सातवीं बात – Central Vista Project यानी नई संसद भवन के निर्माण को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का निजी घर बताकर लोगों को भ्रमित किया जाये ताकि लोग इसके लिए प्रधानमंत्री की आलोचना करें.

और आख़िरी बात – गुजरात को निशाना बनाना. यानी ये Tool Kit कहती है कि लोगों के बीच ये झूठ फैलाया जाए कि प्रधानमंत्री कोरोना के इस संकट में गुजरात को ज़्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं. यानी ऐसा करके राज्यों को आपस में लड़वाना और लोगों के बीच नफ़रत घोलना.

ये वो आठ Point हैं, जो इस Tool Kit में लिखे हैं. हम आपको एक बार फिर से बता दें कि हम इस Tool Kit की सत्यता की पुष्टि नहीं करते लेकिन अगर ये Tool Kit सही है तो ये कई गम्भीर प्रश्न खड़े करती है. इससे कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं.

सरकार के खिलाफ असंतोष फैलाने की साजिश

अब हम आपको विस्तार से इस Tool Kit के बारे में बताते हैं. ये Tool Kit असल में भारत के लोगों के बीच असंतोष फैलाने का एक दस्तावेज़ है, जिसमें ये बताया गया है कि किस तरह से कोरोना महामारी के बीच लोगों की पीड़ा से राजनीतिक लाभ उठाया जा सकता है.

बीजेपी की ओर से उपलब्ध कराई गई इस Tool Kit में कांग्रेस पर ये आरोप है कि उसने भारत और भारत की सरकार की ग़लत छवि गढ़ने के लिए एक रुपरेखा बनाई और अब तक सबकुछ इसी के आधार पर हो रहा था. यानी ये Tool Kit इस पूरे एजेंडे का मार्ग दर्शन कर रही है. 

आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि को ख़राब करने के लिए कांग्रेस कुम्भ को भी निशाना बना रही थी. यानी इस Tool Kit का पहला Point कुंभ मेला ही है. ये Tool Kit कहती है कि हिन्दुओं की आस्था से जुड़े कुम्भ मेले को कोरोना काल में Super Spreader कुंभ का नाम दिया जाएगा. इससे लोगों की ये राय बनाई जाएगी कि कुंभ के आयोजन से देश में कोरोना का संक्रमण फैला. आपको याद होगा कि पिछले महीने जब कुंभ का स्नान हुआ था तो भारत ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इसकी तस्वीरों को प्रमुखता से छापा था.

कुंभ को सुपर स्प्रेडर बताया जाए

महत्वपूर्ण बात ये है कि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने भी इन तस्वीरों के साथ जो Headline दी, उनमें कुंभ मेले को Super Spreader ही कहा गया. यही बात ये Tool Kit भी कहती है. जहां ये Tool Kit कुम्भ को बदनाम करने की बात करती है तो दूसरी तरफ़ ये कहती है कि ईद के त्योहार को कोरोना से जोड़ कर पेश न किया जाए. यानी आरोप है कि इसकी आड़ में हिन्दुओं की आस्था से जुड़े कुंभ मेले की छवि को भी ख़राब किया गया.

कुम्भ मेले के अलावा इस Tool Kit में PM Cares Fund के बहाने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि ख़राब करने की पूरी योजना लिखी है. ये Tool Kit कहती है कि लोगों के बीच ये भ्रम फैलाया जाए कि PM Cares Fund प्रधानमंत्री से जुड़ा एक निजी ट्रस्ट है, जिसमें जमा पैसा सरकार लोगों पर ख़र्च नहीं करेगी.

इसके अलावा इस Tool Kit में ये भी लिखा है कि देश के पूर्व Civil Servants का इस्तेमाल PM Cares Fund पर सवाल उठाने के लिए किया जाए. जैसा इसमें लिखा है, वैसा ही हुआ भी था.

इसी साल 16 जनवरी को देश के 100 पूर्व Civil Servants ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक खुला खत लिखा था, जिसमें उन्होंने PM Cares Fund पर सवाल उठाए थे.

हर्ष मंदर-जूलियो रिबेरो चला रहे अभियान

अहम जानकारी ये है कि इन Civil Servants में हर्ष मंदर का नाम भी शामिल है, जो UPA सरकार के दौरान सोनिया गांधी द्वारा संचालित National Advisory Council का हिस्सा थे. इसमें एक और नाम Julio Ribeiro का है, जो अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बोलते हैं.

हाल ही में इस पूर्व Civil Servant ने दिल्ली पुलिस को भी एक खत लिखा था, जिसमें उन्होंने दिल्ली दंगों में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस बीजेपी के लोगों को बचा रही है.

कहने का मतलब हमारा ये है कि PM Cares Fund पर सवाल उठाने वाले पूर्व Civil Servants में से अधिकतर कांग्रेस के क़रीबी माने जाते हैं. ये Tool Kit भी यही कहती है. यानी जैसे एक फ़िल्म का निर्देशन होता है, ठीक वैसा ही इस मामले में इस Tool Kit ने किया. आप कह सकते हैं कि इस पूरी फिल्म की डायरेक्टर ये Tool Kit है.

इस Tool Kit में एक जगह ये भी लिखा है कि जो Celebrity PM Cares Fund में पैसा Donate करता है, ऐसे लोगों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जाए. ऐसा कई बार हुआ भी. यानी जो Tool Kit में लिखा था, सबकुछ ठीक वैसा ही हुआ.

पीएम केयर्स फंड पर निशाना

पिछले दिनों IPL के दौरान जब ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट खिलाड़ी Pat Cummins ने 50 हज़ार डॉलर यानी लगभग 38 लाख रुपये PM Cares में दान दिए तो सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया गया. शायद इसी का परिणाम था कि कुछ दिनों के बाद Pat Cummins ने अपनी डोनेशन PM Cares Funds से निकाल कर UNICEF Australia’s India Covid Crisis Appeal में डाल दी.

जबकि सच ये है कि देश में पहले चरण की 80 प्रतिशत वैक्सीन का ख़र्च PM Cares Funds से ही उठाया गया था. एक महत्वपूर्ण बात ये है कि ये पैसा और भी अधिक हो सकता था, अगर इसमें दान करने वाले लोगों को निशाना नहीं बनाया जाता.

अब आपको इस Tool Kit का एक और Point बताते हैं. इस Tool Kit में लिखा है कि Central Vista Project को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के घर के तौर पर लोगों के बीच स्थापित किया जाए. यानी लोगों को ये रटा दिया जाए कि नए संसद भवन का निर्माण सिर्फ़ प्रधानमंत्री के लिए हो रहा है.

‘नई संसद को मोदी का का निजी घर बताओ’

ये Tool Kit कहती है कि हर Platform पर ये कहा जाए कि Central Vista Project प्रधानमंत्री मोदी का निजी घर है. ये आरोप इसी में लिखा है. इसके अलावा कोर्ट में भी इसके ख़िलाफ़ अपील की बात ToolKit में लिखी है. जैसा लिखा है, वैसा हुआ भी.

69 पूर्व Civil Servants ने प्रधानमंत्री को एक खत लिख कर इस Project को रोकने की अपील की थी. दिलचस्प बात ये है कि इस खत पर भी हर्ष मंदर और Julio Ribeiro के हस्ताक्षर थे.

देखें वीडियो- DNA: किसने तैयार की भारत की छवि खराब करने वाली ‘Toolkit’?

भले ये दस्तावेज़ कुछ भी कहें लेकिन सच्चाई ये है कि Central Vista Project आज के भारत की ज़रूरत है. मौजूदा संसद भवन की लोक सभा में सिर्फ़ 552 सीटें हैं. जबकि आने वाले समय में लोक सभा सदस्यों की संख्या 800 तक जा सकती है और राज्य सभा के सदस्यों की संख्या भी 350 से ऊपर जा सकती है. यानी दोनों सदनों में 1200 सीटों वाली संसद भवन की इस समय देश को ज़रूरत है और Central Vista Project इसी मांग को पूरा करता है.

हर 25 साल में बढ़नी चाहिए सांसद संख्या

लोक सभा सदस्यों की संख्या इसलिए बढ़ाने की ज़रूरत है क्योंकि आख़िरी बार वर्ष 1976 में ऐसा किया गया था. नियमों के मुताबिक़ हर 25 वर्ष में लोक सभा सदस्यों की संख्या आबादी के हिसाब से बढ़ाई जानी चाहिए लेकिन 1976 के बाद से आज तक ऐसा नहीं हुआ. वर्ष 2001 में जब ये होना था, तब इसे टाल दिया गया. अब जब 2026 तक ये हो जाना चाहिए, फिर से इसमें रुकावटें पैदा की जा रही हैं.

यहां आपको ये बात याद रखनी है कि अगर आबादी के हिसाब लोक सभा सीटें और सदस्य ना हों तो ये लोगों के साथ नाइंसाफ़ी होती है क्योंकि वो अपने जनप्रतिनिधि तक कभी पहुंच ही नहीं पाते. बीजेपी ने कहा है कि इस Tool Kit में ये भी लिखा है कि कोरोना संकट को सरकार के ख़िलाफ़ कैसे इस्तेमाल करना है?

आरोप है कि कांग्रेस ने केन्द्र सरकार की छवि को बिगाड़ने के लिए अपनी क्षेत्रीय इकाइयों को ये निर्देश दिया कि वो ऐसे अस्पतालों में कुछ Beds को Block कर दें, जहां उनकी जान पहचान है. ये Beds बाद में उन्हीं लोगों को दिए जाएं जो मदद के लिए सोशल मीडिया पर Indian Youth Congress को Tag करें. यानी सोशल मीडिया पर खुली मदद की दुकानों का भी इसमें कच्चा चिट्ठा लिखा है. हालांकि ये आरोप कितने सही हैं, हम इसकी कोई पुष्टि नहीं करते.

पत्रकारों को अपने पाले में करने का प्लान

इसमें आगे ये भी लिखा है कि अगर कोई पत्रकार सोशल मीडिया पर मदद मांगता है तो तुरंत उसकी मदद की जाए. ऐसा करके पत्रकारों को भी इस एजेंडे से जोड़ा जाए. ये जो बातें इस Tool Kit में लिखी हैं, वैसा ही हकीकत में हुआ भी.

आप सोशल मीडिया पर ऐसे कई पत्रकारों को मदद के लिए लोगों के Messages शेयर करते हुए देखते होंगे और इन पत्रकारों को मदद मिल भी जाती है. यानी अगर ये Tool Kit सही है तो ये सब इसी आधार पर हो रहा है.

ये Tool Kit गुजरात को लेकर भी बड़ी बात कहती है. इसमें लिखा है कि लोगों के बीच ये झूठ फैलाया जाए कि प्रधानमंत्री कोरोना के इस संकट में गुजरात को ज़्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं. यानी प्रधानमंत्री मोदी को नुक़सान पहुंचाने के लिए ये Tool Kit पूरे देश में 6 करोड़ गुजरातियों के ख़िलाफ़ प्रतिकूल माहौल की बात करती है.

गुजरात पर पीएम को घेरने की साजिश

इसके अलावा इसमें ये भी लिखा है कि लोगों के बीच ये झूठ फैलाया जाए कि प्रधानमंत्री ने सबसे ज़्यादा वैक्सीन गुजरात को दी हैं. जबकि ये एक कोरा झूठ है. सच ये है कि सबसे ज़्यादा वैक्सीन गुजरात को नहीं बल्कि महाराष्ट्र को मिली है. इस सूची में गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बाद चौथे स्थान पर है. समझने वाली बात ये है कि महाराष्ट्र और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है. और कांग्रेस के शासन वाले राज्यों को ही सबसे ज़्यादा वैक्सीन मिली है.

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जैसा कि हमने कहा हम बीजेपी की तरफ से लगाये गये इन आरोपों और दस्तावेज़ों की पुष्टि नहीं करते हैं लेकिन इन सभी दस्तावेज़ की जांच ज़रूर होनी चाहिए. कांग्रेस बीजेपी के आरोप से इनकार करते हुए इस Tool Kit को फर्जी बता रही है लेकिन सवाल ये भी है कि Tool Kit में जो लिखा है, बिल्कुल वैसा ही काम कांग्रेस क्यों कर रही है ? अगर इनमें लिखी बातें और कांग्रेस पर लगे आरोप सही हैं तो इससे कई सवाल खड़े होंगे.

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