
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) समेत देशभर के कोरोना वायरस मरीजों (Corona Patient) के लिए एक अच्छी खबर है और एक बुरी खबर है. अच्छी खबर यह है की दूसरी लहर का प्रकोप अब लगभग खत्म हो चुका है, और अस्पतालों में मारामारी भी कम हो गई है. लेकिन बुरी खबर यह है कि कई मरीजों को कोरोना के बाद मिलने वाली बीमारियों की वजह से कम से कम 1 साल तक अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं.
प्राइवेट अस्पतालों में वेंटिलेटर फुल
दिल्ली का लोक नायक अस्पताल कोरोना वायरस मरीजों के लिए बनाया गया सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है. फिलहाल यहां 1000 में से 800 बेड खाली है. यानी केवल 200 पर ही मरीज भर्ती हैं. क्या कोरोना वायरस की दूसरी लहर जा चुकी है? लेकिन अगर दिल्ली के बड़े प्राइवेट अस्पतालों की तस्वीर देखें तो वहां अभी भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं. बड़े अस्पतालों में ICU और वेंटीलेटर लगभग फुल हैं. दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डीएस राना के मुताबिक, अभी भी 57 मरीज आईसीयू पर हैं और 14 के करीब मरीज वेंटिलेटर पर हैं. हालांकि डॉक्टरों को उम्मीद है कि अगले 2 हफ्ते में हालात और बेहतर हो जाएंगे.
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प्राइवेट अस्पतालों में अब भी बेड फुल क्यों हैं?
प्राइवेट अस्पतालों के बेड फुल होने के पीछे दो बड़ी वजह हैं. पहली वजह गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज अभी भी प्राइवेट अस्पतालों के इलाज पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं. दूसरी बड़ी वजह है कोरोना से रिकवर होने के बाद आने वाली दूसरी बीमारियां. अब कोरोना वायरस के मरीजों के अलावा कोविड-19 हो रिकवर हो चुके मरीज भी वापस लौट कर आ रहे हैं. डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना से रिकवर होकर आने वाली बीमारियां अब अपने आप में एक नई मुसीबत है.
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कोरोना मरीजों को ज्यादातर हुईं ये बीमारियां
सिर्फ दिल्ली के अस्पतालों की बात करें तो यहां ओपीडी के अलावा 5 से 10% मरीज ऐसे भी भर्ती हैं, जिन्हें कोरोना वायरस अवर होने के बाद भी अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ रही है. ज्यादातर मामलों में ऐसा दिल की बीमारी की वजह से हो रहा है. इसके अलावा न्यू माइकोसिस किडनी की बीमारी, ब्रेन में क्लॉटिंग, लोगों को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की नौबत आ रही है.
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पोस्ट कोविड और लॉन्ग कोविड में क्या अंतर है?
ब्रिटेन की गाइडलाइन के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के दौरान अगर चौथे हफ्ते के बाद 12 हफ्ते तक मरीज रिकवर ना हो तो उसे पोस्ट कोविड-19 कहा जाता है. वहीं, अगर 12 हफ्ते के बाद भी वह बीमार रहता है तब उसे लॉन्ग कोविड-19 माना जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली के अस्पतालों से कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों का भुज तो फिलहाल टल जाएगा. लेकिन पोस्ट कोविड-19 रिया बीमारियां आने वाले 1 साल तक परेशान कर सकती हैं और इसके लिए अलग से ट्रीटमेंट प्रोटोकोल जारी किया जाना चाहिए.
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