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इस्लामिक परंपरा में सूफी वली (संत) की मजार (कब्र) प्रार्थना का केंद्र होती है. इसे ही दरगाह कहते हैं. सूफी संत के निधन के बाद उन्हें याद करने, मन्नतें मांगने के लिए ये दरगाह बनाई जाती है. अपने देश में प्रसिद्ध अजमेर शरीफ दरगाह इन्हीं में से एक है जहां हिंदू और मुस्लिम सभी धर्मों के लोग जाते हैं. ऐसी ही एक पीर बाबा की दरगाह पर विवाद है जो एक शहर में दो जगह है. बालेशाह पीर बाबा की कौन सी दरगाह असली है? मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है. 

एक दरगाह मुंबई के करीब मीरा भयंदर (उत्तन गांव) में है. इसके कुछ हिस्सों को अवैध बताते हुए बुलडोजर चलाने की बात हो रही थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई. दूसरी दरगाह भायंदर पश्चिम के कोलीवाड़ा क्षेत्र में है. आरोप लगाए गए हैं कि दरगाह ट्रस्ट ने सरकारी भूमि के दो सर्वे संख्या वाले क्षेत्रों पर कब्जा कर अवैध निर्माण कराया है. इसके पीछे हिंदू टास्क फोर्स की याचिका लगी हुई है. सुप्रीम कोर्ट अभी बाले शाह दरगाह से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा है. इसमें कथित अवैध निर्माणों को गिराने और जमीन पर कब्जे का केस है. 

केस में ताजा अपडेट

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अब महाराष्ट्र के उत्तन गांव की अवैध बालेशाह पीर दरगाह के खिलाफ एडवोकेट खुश खंडेलवाल की हस्तक्षेप अर्जी को सुप्रीम कोर्ट ने दरगाह की याचिका के साथ जोड़कर सुनवाई करने का आदेश दिया है. हिंदू टास्क फोर्स के संस्थापक एडवोकेट खुश खंडेलवाल ने उत्तन की अवैध बालेशाह पीर दरगाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की थी. इस मामले की सुनवाई 16 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विपुल पंचोली की पीठ के सामने हुई. 

खुश खंडेलवाल के वकील अमृत जोशी और प्रतीक कोठारी ने अदालत को बताया कि दरगाह ट्रस्ट ने जानबूझकर अपनी याचिका में खुश को प्रतिवादी नहीं बनाया जबकि उन्होंने दरगाह के अवैध निर्माण के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी, जो अब भी लंबित है. वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि इस मामले में बालेशाह पीर दरगाह ट्रस्ट हाईकोर्ट में प्रतिवादी है और मामला अंतिम सुनवाई के चरण में है. ये सभी बातें दरगाह ट्रस्ट ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से छुपाईं, जिसके कारण उसे आसानी से सुप्रीम कोर्ट से स्थगन आदेश मिल गया. 

पीर बाबा बालेशाह कौन थे?

बालेशाह पीर बाबा (हजरत सैयद बाले शाह पीर कादरी) के बारे में कहा जाता है कि वह ईरान के रास्ते कर्बला से भारत आए थे. उनकी दरगाह पर हर साल उर्स होता है. 

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अब सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश के कारण खुश खंडेलवाल की हाईकोर्ट में लंबित जनहित याचिका प्रभावित हो रही है. खुश ने अपनी हस्तक्षेप अर्जी में सुप्रीम कोर्ट को एक और तथ्य बताया कि मीरा-भायंदर क्षेत्र में बालेशाह पीर बाबा के नाम पर दो अलग-अलग जगहों पर दरगाह बनाई गई है.

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि इन दो दरगाहों में से एक उत्तन डोंगरी में है और दूसरी भायंदर पश्चिम के कोलीवाड़ा क्षेत्र में है. यह जानकारी अदालत के सामने रखे जाने के बाद सवाल उठाया गया कि एक ही बाबा की दो अलग-अलग जगह कब्र कैसे हो सकती हैं? इस मामले की अगली संभावित सुनवाई 5 जनवरी 2026 को हो सकती है.