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Asim Munir Plan Behind Bangladesh Violence: बांग्लादेश में भारत के खिलाफ नफरत की आग फिर से भड़की हुई है. पिछले 24 घंटे से, हिंदुओं को चुन-चुनकर टारगेट किया जा रहा है. पिछले 24 घंटे से, हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं. उन्हें जिंदा जलाया जा रहा है. ये सब पाकिस्तान की आतंकी सेना के चीफ आसिम मुनीर के इशारे पर हो रहा है. जिस उस्मान हादी नाम के कट्टरपंथी युवक की हत्या को लेकर हिंसा भड़काई गई. उस हादी की हत्या के पीछे पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का हाथ है. आज आपको जानना चाहिए..आखिर मुनीर ने हादी की हत्या क्यों करवाई?

बांग्लादेश में कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसक भीड़ ने भारत को तोड़ने की धमकी क्यों दी ? आज आपको ये भी पता चलेगा, हादी की मौत से आसिम मुनीर का कौन सा मकसद पूरा हो गया? कैसे हादी की हत्या करवाकर मुनीर ने जमात-ए-इस्लामी के रास्ते का सबसे बड़ा कांटा हटा दिया? ये विश्लेषण पाकिस्तान और पाकिस्तान से प्रेम करने वाले कट्टरपंथियों को बहुत चुभने वाला है. 

भारत के अहसानों को भूल गया बांग्लादेश

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सोचिए जिस मुल्क को भारत ने आजाद करवाया. जिसे पाकिस्तान के जुल्मों से बचाने के लिए 3 हजार से ज्यादा भारतीय सैनिकों ने शहादत दी. उस बांग्लादेश में भारत को तोड़ने की बात हो रही है. ये साजिश उस मुल्क पाकिस्तान ने रची है. जिसके जुल्मों से आजादी के लिए कभी बांग्लादेश में सबसे बड़ा आंदोलन हुआ था. जिस पाकिस्तान ने बांग्लादेश के 30 लाख नागरिकों की हत्या की थी. 

हालांकि पाकिस्तान और बांग्लादेश में मौजूद कट्टरपंथी ताकतें जितनी नारेबाजी कर लें. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और ये नारेबाजी करने वाले मुट्ठी भर लोग कौन हैं.  ये बांग्लादेशियों के कितने बड़े दुश्मन हैं . इसकी जानकारी आपको आगे मिलेगी.

कट्टरपंथी हादी पर प्यार और दीपू को दुत्कार!

हिंसा के बाद बांग्लादेश के कार्यकारी प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस ने सिर्फ इतना कहा है कि जो लोग हिंसा के पीछे हैं. उन पर कार्रवाई होगी. ये बयान शायद दुनिया को दिखाने के लिए दिया गया है. 24 घंटे बीतने के बावजूद एक हिंदू को पीट पीट कर मारने वाली भीड़ पर कोई मामला दर्ज नहीं हुआ. यानी ये खबर इंटरनेशनल मीडिया में फैल गई तो यूनुस ने लिंचिंग की निंदा कर दी. उनके लिए एक हिंदू की मौत इतनी सस्ती थी कि उन्होंने एक बार दीपू चंद्र दास का नाम तक लेना जरूरी नहीं समझा. ना ही दीपू के परिवार के लिए उनके मुंह से संवेदना का कोई शब्द निकला. 

हां हादी उस्मान के परिवार का खर्च अब बांग्लादेश की सरकार उठाएगी. इसका एलान यूनुस सरकार ने कर दिया है. लेकिन 30 साल का एक गरीब मजदूर. जिसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि वो यूनुस के बांग्लादेश में हिंदू बनकर पैदा हुआ. उसके परिवार की यूनुस सरकार को कोई फिक्र नहीं है. सोचिए बांग्लादेश के हिंदू कितने बुरे हाल मे हैं. लेकिन हादी जैसे कट्टरपंथी, जो हिंदुस्तान और हिंदुओं से नफरत करते हैं, वो बांग्लादेश में शहीद कहलाते हैं .

बांग्लादेश में जिस छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के बाद ये हिंसक साजिश हुई. वो कौन था, उसकी मौत कैसे हुई. उसकी हत्या की पीछे पाकिस्तान की आतंकी सेना के चीफ आसिम मुनीर के हाथ होने की आशंका क्यों जाहिर की जा रही है.  इस हत्या और उसके बाद हुई हिंसा का असली मकसद क्या है. इसके लिए आपको हादी के बारे में कुछ बातें जरूर जाननी चाहिए.

कौन था मृतक शरीफ उस्मान हादी? 

शरीफ उस्मान हादी कट्टरपंथी इस्लामी संगठन इंकलाब मंच का प्रवक्ता था. हादी ने शेख हसीना का तख्तापलट करने वाले आंदोलन से अपनी पहचान बनाई. हादी के संगठन इंकलाब मंच की विचारधारा इस्लामी राष्ट्रवाद की ओर झुकी हुई है. इसीलिए आंदोलन के दौरान हादी ने अवामी लीग को पूरी तरह खत्म करने की वकालत की थी.

इसके अलावा बांग्लादेश में शेख हसीना को मिली मौत की सजा को हादी ने एक मिसाल बताया था. हादी भारत विरोधी भी था.  उसने ग्रेटर बांग्लादेश’ के एक नक्शे का प्रचार किया. जिसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश में शामिल दिखाया गया था. फिलहाल हादी बांग्लादेश में होने वाले संसदीय चुनावों में ढाका-8 निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ रहा था. इसी दौरान उसको कुछ अज्ञात लोगों ने गोली मार दी.

हादी का प्रोफाइल बता रहा है कि उसके संगठन इंकलाब मंच” ने यूनुस को सत्ता तक पहुंचाने में मदद की. लेकिन बाद में हादी यूनुस सरकार के लिए ही सिरदर्द बन गया था. यहीं से हादी की हत्या के पीछे मुनीर की साजिश के तार जुड़ते हैं. आज भले ही हादी को मोहम्मद यूनुस शहीद बता रहे हों. उसके परिवार की फिक्र कर रहे हों. लेकिन सच्चाई ये है कि बांग्लादेश में हादी यूनुस के लिए बड़ी टेंशन था. आज आपको इसकी वजह भी जाननी चाहिए. 

दुनिया की आंखों में धूल झोंक रहे यूनुस

यूनुस सरकार पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय खासकर अमेरिका और यूरोपीय संघ का भारी दबाव था कि वह देश को कट्टरपंथ की ओर न जाने दें. लेकिन इंकलाब मंच की विचारधारा ‘इस्लामी राष्ट्रवाद’ की थी. जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक कट्टरपंथी समूह के रूप में देखा जाने लगा था.  वहीं यूनुस अपनी सरकार को उदारवादी और लोकतांत्रिक दिखाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इस मंच से दूरी बनानी शुरू कर दी.

इससे पहले मोहम्मद यूनुस के करीब माने जाने वाले छात्र नेता जैसे नाहिद इस्लाम सरकार में शामिल हो गए. उस्मान हादी और इंकलाब मंच ने खुद को “सच्चा क्रांतिकारी” बताते हुए सरकार की आलोचना शुरू कर दी. हादी की खुद चुनाव लड़ने की योजना थी. इसे देखते हुए हादी ने मोहम्मद यूनुस पर आवामी लीग के प्रति नर्मी बरतने के आरोप लगाकर अपनी लोकप्रियता बढ़ाने की ​कोशिश की.

हादी की कोशिश बांग्लादेश की कट्टरपंथी पार्टी जमात ए इस्लामी बांग्लादेश का विकल्प बनने की भी थी. इंकलाब मंच में कट्टरपंथी युवाओं की संख्या ज्यादा थी. जो आवामी लीग के खिलाफ ज्यादा आक्रामक थे. यानी पाकिस्तान की पुरानी कट्टर पार्टी जमात का विकल्प बन रहे थे.

चुनाव टालने की साजिश तो नहीं?

पाकिस्तान की करीबी जमात ए इस्लामी बांग्लादेश का विकल्प बनने की नीति हादी के खिलाफ गई. माना जा रहा है कि मुनीर ने आईएसआई की मदद से हादी की हत्या करवाकर एक तीर से कई शिकार किए. आज आपको हादी की हत्या से मुनीर को होने वाले फायदों के बारे में भी जानना चाहिए.

हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में हिंसा और अस्थिरता की आड़ में बांग्लादेश के चुनाव टालने की कोशिश हो सकती है. बांग्लादेश में बीएनपी जैसे राजनीतिक दलों की सरकार आती तो वे मुनीर के हाथ की कठपुतली नहीं बनती. ऐसे में स्थिरता के नाम पर मोहम्मद यूनुस का सत्ता में रहना मुनीर और पाकिस्तान के लिए ज्यादा फायदेमंद है.  

इधर हादी की हत्या का आरोप आवामी लीग यानी शेख हसीना की पार्टी पर लगाकर मुनीर ने कट्टरपंथियों को आवामी लीग की जड़ें और कमजोर करने का मौका दे दिया. इसी के साथ पाकिस्तान समर्थित जमाए ए इस्लामी के रास्ते के सबसे बड़े कांटे यानी इंकलाब मंच को भी साइड लाइन कर दिया. हादी की मौत के बाद इस संगठन के पास कोई लोकप्रिय चेहरा नहीं बचा.

मुनीर ने जमात ए इस्लामी को तरजीह क्यों दी?

आज आपके दिमाग में एक बात और आ रही होगी. आखिरकार मुनीर ने बांग्लादेश को नियंत्रित करने के लिए कट्टरपंथी और ज्यादा आक्रामक इंकलाब मंच की बजाय जमात ए इस्लामी को तरजीह क्यों दी. इसकी वजह 1971 में बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में छिपी है . जब सारा पूर्वी पाकिस्तान. इस्लामाबाद के कब्जे से मुक्ति चाहता था.

उस वक्त भी जमात ए इस्लामी बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ रहने की वकालत की थी. पाकिस्तान के साथ मिलकर हिंदुओं और मुजीबुर समर्थकों की हत्या की थी. जिसकी वजह से बहुत साल तक ये बांग्लादेश में हाशिए पर भी रही. लेकिन पुरानी वफादारी की वजह से मुनीर ने जमात के रास्ते से इंकलाब मोर्चा के सबसे बड़े नेता उस्मान हादी को रास्ते से हटा दिया.