
MGNREGA new name G RAM G: कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने MGNREGA का नाम बदलने पर तीखा हमला बोलते हुए स्कीम से महात्मा गांधी का नाम हटाने को ‘महात्मा गांधी की दूसरी हत्या’ बताया है. चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस तब तक नए कानून का विरोध करती रहेगी जब तक पहले वाला रोजगार गारंटी ढांचा बहाल नहीं हो जाता. उन्होंने आगे कहा अंग्रेजी अक्षरों में लिखे हिंदी शब्दों का इस्तेमाल जैसे ‘विकसित भारत जी राम जी’ जैसे नाम दक्षिणी राज्यों की ग्रामीण आबादी के लिए भ्रम पैदा करेंगे. दिक्कत ये भी है कि कानून अब कहता है कि जब तक राज्य इस सटीक नाम का इस्तेमाल नहीं करेंगे, उन्हें फंड नहीं मिलेगा’.
राज्यों पर बढे़गा बोझ
उन्होंने ये भी बताया कि MGNREGA के राष्ट्रीय दायरे के विपरीत, नए नाम वाली स्कीम केवल केंद्र द्वारा चुने अधिसूचित जिलों पर लागू होगी. फंड की जिम्मेदारी राज्यों पर डाली जा रही है. उन्होंने ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर राज्यों के पास संसाधन नहीं होंगे तो कार्यान्वयन प्रभावित होगा. चार साल पहले, आवंटन 1,11,000 करोड़ रुपये था. पिछले तीन सालों से, 86,000 करोड़ रुपये. अगले साल, ये सिर्फ 65,000 करोड़ रुपये है. वहीं 65,000 करोड़ रुपये से ऊपर का कोई भी खर्च राज्य सरकार की जिम्मेदारी है.
तमिलनाडु की महिलाओं को होगा नुकसान
चिदंबरम ने कहा कि इस बदलाव से अत्यधिक गरीब लोगों को नुकसान होगा, खासकर महिलाओं और दिहाड़ी मजदूरों को. यह योजना 12 करोड़ लोगों के लिए एक सुरक्षा कवच है जो दिहाड़ी पर निर्भर हैं. तमिलनाडु में, 90 से 95 प्रतिशत मजदूर महिलाएं हैं; उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान होगा. काम के दिनों को बढ़ाकर 125 करने का केंद्र का दावा अवास्तविक है. MGNREGA 2005 में सर्वसम्मति से पारित हुआ था. इस योजना को UPA की नाकामियों का जीवित स्मारक बता चुके प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली सरकार इसे खत्म कर रही है.’
जहां एक तरफ कांग्रेस केंद्र के इस फैसले की आलोचना कर रही है तो दूसरी ओर जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इसके विरोध में उतर आए हैं. उमर अब्दुल्ला ने योजना के नए नाम की तुलना एक बॉलीवुड फिल्म से की. अब्दुल्ला ने G RAM G शॉर्टफॉर्म का मजाक उड़ाते हुए कहा कि यह उन्हें जी मम्मी जी नाम की एक पुरानी बॉलीवुड फिल्म की याद दिलाता है. अब्दुल्ला ने चिंता जताई कि नए बिल के फंडिंग बंटवारे से राज्यों पर काफी वित्तीय बोझ पड़ेगा और जम्मू और कश्मीर को अब इस योजना से कोई फायदा नहीं होगा. ये बिल संसद में पास हो गया है, जिसमें कहा गया है कि इससे ग्रामीण परिवारों के लिए सालाना गारंटीड रोजगार 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन हो जाएगा.
