
Hindu Diety Statue Destroyed By Thailand Army: थाईलैंड की सेना ने बीते दिनों कंबोडिया में घुसकर वहां स्थित हिंदू देवता भगवान विष्णु की मूर्ति को गिरा दिया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इसको लेकर कई लोग नाराजगी भी जता रहे हैं. सामने आई वीडियो में थाई सेना एक एक्सकेवेटर की मदद से 9 मीटर ऊंची इस मूर्ति को तोड़ती हुई नजर आ रही है. अब इस घटना पर भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का बयान आया है.
रणधीर जायसवाल ने जारी किया बयान
रणधीर जायसवाल ने घटना पर चिंता जताते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा,’ हमें हाल ही में निर्मित एक हिंदू धार्मिक देवता की प्रतिमा को ध्वस्त किए जाने की खबरें मिली हैं, जो थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद से प्रभावित क्षेत्र में स्थित थी. इस क्षेत्र में हिंदू और बौद्ध देवी-देवताओं का गहरा आदर और पूजा की जाती है, क्योंकि ये हमारी साझा सभ्यतागत विरासत का हिस्सा हैं. क्षेत्रीय दावों के बावजूद इस तरह के अपमानजनक कृत्य दुनिया भर के अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं और इन्हें नहीं होने देना चाहिए.’
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Our response to media queries regarding the demolition of Hindu deity statue
https://t.co/WEeDVzhUAL pic.twitter.com/hNMbKj3gNP
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) December 24, 2025
दोनों देशों से किया आग्रह
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे लिखा,’ हम एक बार फिर दोनों पक्षों से संवाद और कूटनीति की ओर लौटने, शांति बहाल करने और आगे किसी भी तरह की जानमाल की हानि और संपत्ति समेत विरासत को क्षति से बचने का आग्रह करते हैं.’
बता दें कि यह मूर्ति साल 2013 में बनाई गई थी और थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद वाले इलाके में थी. इस इलाके को थाईलैंड अपना इलाका मानता है. थाईलैंड की सेना के लिए इस मूर्ति को खंडित करने का अर्थ उस स्थान पर थाई संप्रभुता को जाहिर करने का मकसद था. उनकी सेना ने उस जमीन पर वापस कंट्रोल हासिल कर लिया है.
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कंबोडिया ने जताई नाराजगी
थाई सेना की इस हरकत पर कंबोडिया ने भी नाराजगी जाहिर की है. कंबोडियाई सरकार के प्रवक्ता किम चानपान्हा ने इसको लेकर एक बयान जारी करते हुए कहा,’यह मूर्ति एन सेस इलाके में हमारे एरिया के अंदर थी.’ गूगल मैप के मुताबिक पाया गया कि मूर्ति जिस जगह पर स्थित है वह सीमा रेखा से तकरीबन 400 मीटर दूर थी. चानपान्हा ने आगे कहा,’ हम पुराने मंदिरों और मूर्तियों को तोड़ने की निंदा करते हैं, जिनकी पूजा बौद्ध और हिंदू धर्म के लोग करते हैं.’
