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Oldest Trains In India: आज भारत में वंदेभारत, अमृतभारत और नमोभारत जैसी आधुनिक ट्रेनें चल रही हैं, लेकिन इन ट्रेनों के बीच देश में एक ऐसी ऐतिहासिक ट्रेन भी चल रही है जिसका सफर आजादी से पहले से जारी है. बता दें, ये जो 150 साल से चलती आ रही है. यह ट्रेन कालका मेल के नाम से जानी जाती थी, जिसे आज नेताजी एक्सप्रेस के नाम से पहचाना जाता है. यह ट्रेन हावड़ा से कालका तक जाती है और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से इस ट्रेन का गहरा जुड़ाव है. आइए जानते हैं इस ट्रेन से जुड़ी पूरी कहानी…

कालका मेल का ऐतिहासिक सफर

जानकारी के अनुसार, कालका मेल की शुरुआत 1866 में हुई थी, जब भारतीय रेलवे ने हावड़ा से दिल्ली तक सीधी मेल ट्रेन चलानी शुरू की थी. उस समय इसे ‘ईस्ट इंडियन रेलवे मेल’ के नाम से जाना जाता था. 1891 में जब रेलवे ट्रैक कालका तक बढ़े तो इसका नाम बदलकर कालका मेल रखा गया. यह ट्रेन ब्रिटिश अधिकारियों के लिए प्रमुख यात्री सेवा थी जो उन्हें शिमला तक पहुंचाने का काम करती थी.

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस और कालका मेल का संबंध

जानकारी के अनुसार, 1941 में, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता में नजरबंद कर लिया था. 16 जनवरी 1941 की रात नेताजी ने अंग्रेजों से बचने के लिए एक साहसिक योजना बनाई. उन्होंने पठान का वेश धारण किया और पुलिस की नजरों से बचते हुए गोमो स्टेशन पहुंचे. वहां से वे कालका मेल में सवार हुए और दिल्ली पहुंचे. दिल्ली से वे जर्मनी और जापान गए जहां से उन्होंने आजाद हिंद फौज की नींव रखी. नेताजी की यह यात्रा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई.

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सरकार ने 2021 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 124वीं जयंती पर भारतीय रेलवे ने कालका मेल का नाम बदलकर ‘नेताजी एक्सप्रेस’ रख दिया. यह ट्रेन अब हावड़ा से कालका तक रोजाना चलती है और लगभग 1700 किलोमीटर का सफर 25-26 घंटों में तय करती है. इसमें एसी, स्लीपर और जनरल कोच उपलब्ध हैं जो सभी यात्रियों के लिए सफर को सुविधाजनक बनाते हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार, आज नेताजी एक्सप्रेस के कुल 41 स्टॉपेज हैं. यह ट्रेन हावड़ा जंक्शन से शुरू होकर बर्दवान, दुर्गापुर, आसनसोल, धनबाद, गोमो, दिल्ली, गाजियाबाद, पानीपत, चंडीगढ़, और कालका जैसे प्रमुख स्टेशनों से होती हुई अपनी यात्रा पूरा करती है.