बीते दिनों महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में बीजेपी नीत NDA ने जोरदार जीत हासिल की थी. महायुति गठबंधन की इस सुनामी में विपक्षी महाविकास अघाड़ी हवा में उड़ गई. 288 नगर पंचायतों और परिषदों के चुनाव में महायुति ने 207 अध्यक्ष पद जीतकर जनता के बीच अपनी पहुंच का जोरदार सबूत दिया है. वहीं महाविकास अघाड़ी के खाते में महज 44 सीटें आईं. अब सियासी दलों की निगाहें महाराष्ट्र के बीएमसी चुनावों पर टिकी है. इस चुनाव के लिए सियासी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. अब इस चुनाव में जहां महायुति गठबंधन से एनसीपी अजित पवार गुट बाहर हो गई है तो वहीं महाविकास अघाड़ी में शिवसेना यूबीटी, कांग्रेस, एनसीपी शरद पवार के साथ अब राज ठाकरे की मनसे के अलावा प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन भी शामिल हो गई है.
बीएमसी चुनाव को लेकर अब बाबा साहब अंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर की पार्टी वंचित बहुजन ने महाविकास आघाड़ी के साथ गठबंधन की घोषणा की है.एनसीपी अजित पवार इस चुनाव में फिलहाल साथी की तलाश में हैं. वहीं कांग्रेस ने पहले तो BMC चुनाव में अकेले ही उतरने का फैसला किया था लेकिन अब बदलते समीकरणों के बीच उसने गठबंधन में शामिल होकर लड़ने में ही अपनी भलाई समझी है. कांग्रेस ने सीटों के बंटवारे को लेकर कहा कि अन्य 28 नगर निगमों के लिए भी हमारी बातचीत चल रही है. अब ऐसे में सभी गठबंधन बीएमसी चुनाव में खुद की जीत का दावा कर रहे हैं. तो आइए हम आपको बताते हैं कि बीएमसी चुनाव में कौन सा गठबंधन कितना शक्तिशाली है?
बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट में सीटों पर बनी बात
बीएमसी चुनावों को लेकर महायुति गठबंधन में बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट के बीच सीट शेयरिंग पर बात बन चुकी है. मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने बताया कि आगामी बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव के लिए 227 में से 207 सीटों पर सहमति बन चुकी है. उन्होंने बताया कि गठबंधन सहयोगियों के बीच बनी सहमति के मुताबिक बीजेपी 128 पर और शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट 79 सीट पर चुनाव लड़ेगी. दोनों पार्टियां 15 जनवरी 2026 को होने वाले बीएमसी चुनाव संयुक्त रूप से लड़ेंगी. महायुति गठबंधन में तीसरी पार्टी एनसीपी अजित पवार गुट की थी लेकिन वह बीएमसी चुनाव अलग होकर लड़ रही है. शेष 20 सीटों पर बातचीत जारी है. इन सीटों के संबंध उम्मीदवारों के चयन के बाद निर्णय लिया जाएगा.
बीएमसी चुनाव क्या है विपक्षी गठबंधन की रणनीति?
बीएमसी चुनाव को लेकर कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि महाविकास अघाड़ी गठबंधन के साथ गठजोड़ कर कांग्रेस मुंबई में दलित, अल्पसंख्यक और बीजेपी-विरोधी वोटों को साथ लाने की कोशिश कर रही है. यहीं पर हम ये भी कह सकते हैं कि विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए कांग्रेस की चली गई ये सियासी चाल उनके लिए ही कहीं भारी न पड़ जाए. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कांग्रेस के पुराने सहयोगी एनसीपी शरद पवार गुट से तनाव की बात अब किसी से छिपी नहीं रह गई है. दोनों दलों को लेकर कई बैठकों के बाद भी अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है. ऐसे में कांग्रेस की रणनीति सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि महागठबंधन पर भी भारी पड़ सकती है.
सीटों के बंटवारे पर MVA में बढ़ा गतिरोध
गठबंधन के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक एनसीपी शरद पवार गुट ने 50 से 55 सीटों की मांग की थी जिस पर कांग्रेस तैयार नहीं है. इस बीच विपक्षी खेमे में एनसीपी शरद पवार गुट शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के साथ भी एक अलग गठबंधन की संभावनाएं ढूंढ रही है. हालांकि अब इस गठबंधन में इन तीनों पार्टियों के अलावा प्रकाश अंबेडकर और राज ठाकरे की भी एंट्री हो चुकी है. ऐसे में सीट शेयरिंग को लेकर एमवीए गठबंधन में सिर फुट्टौवल की नौबत साफ तौर पर दिखाई दे रही है. फिलहाल मौजूदा हालात इस बात का संकेत दे रहे हैं कि BMC चुनाव आने वाले समय में बहुकोणीय मुकाबले में बदलता हुआ दिखाई दे रहा है. इस मुकाबले में सत्ता की सियासत, सीटों की सौदेबाज़ी और गठबंधन की उठा-पटक चुनावी विमर्श पर हावी रहने वाली है.
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