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Gen Z in Temples: आस्था प्रदर्शन का विषय नहीं है. लेकिन नेता अपनी आस्था का प्रदर्शन करते हैं और इसकी वजह है राजनीतिक लाभ.अब हम उस सनातनी आस्था का विश्लेषण करेंगे जो राजनीति से परे है. इस विश्लेषण को आप सनातनी होते भारत का विश्लेषण कह सकते हैं. भारत सदियों से सनातन का केंद्र रहा है. लेकिन पिछले कुछ सालों में सनातनी आस्था का ये रंग और गाढ़ा हो रहा है. कैसे देश की युवा आबादी सनातन के रंग में रंग रही है, चलिए आपको बताते हैं.

नए साल के स्वागत की तैयारी शुरू हो गई है. हिल स्टेशन और टूरिस्ट प्लेस पर नए साल के स्वागत का स्वैग अब पुराना हो गया है. ट्रेंड बदल चुका है. युवाओं के बीच नए साल का स्वागत धार्मिक शहर में करने का चलन बढ़ा है. Gen z के इस बदलते ट्रेंड को समझने के लिए पहले कुछ आंकड़ों को समझते हैं. बांके बिहारी मंदिर वृंदावन के प्रबंधन ने 5 जनवरी 2026 तक भक्तों से नहीं आने की अपील की है. 

मंदिरों में लगी लंबी लाइन

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नए साल पर यहां 12 लाख भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है. बांके बिहारी के पवित्र दर्शन के लिए 2 किलोमीटर लंबी लाइन लग रही है. काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे चुके हैं. अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए 2-2 किलोमीटर लंबी लाइन लग रही है.

उज्जैन के महाकाल मंदिर में नए साल के अवसर पर 12 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. राजस्थान के सीकर में खाटूश्यामजी जी मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को डेढ़ घंटे का समय खर्च करना पड़ रहा है. केरल के सबरीमाला मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को कंट्रोल करने के लिए स्पॉट बुकिंग को प्रतिदिन 20 हजार तक सीमित कर दिया गया है. 

उत्तर से दक्षिण तक धार्मिक शहरों में अचानक से श्रद्धालुओं की संख्या कैसे बढ़ गई. ये शहर तो पहले भी थे. लेकिन पहले भीड़ हिल स्टेशन में बढ़ती थी. अब तस्वीर बदल गई है. ये बदलते ट्रेंड और Gen z की बढ़ती आस्था का प्रमाण है. क्लियर ट्रिप के आंकड़ों के मुताबिक Gen Z ट्रैवलर्स में 650 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है. आंकड़े बताते हैं कि इनमें से ज्यादातर युवा धार्मिक स्थलों को यात्रा को प्रमुखता दे रहे हैं. पिछले कुछ सालों में युवाओं के बीच ‘श्राइनकेशन’ यानी छुट्टी लेकर तीर्थ स्थलों की यात्रा का कॉन्सेप्ट लोकप्रिय हो रहा है. साथ ही हर बड़े अवसर पर अपने आराध्य के दर्शन का ट्रेंड भी बढ़ा है. यही ट्रेंड अब नए साल के मौके पर साफ-साफ दिख रहा है.

पहाड़ों नहीं मंदिरों में जा रही जेन जी

यानी अब Gen Z पहाड़ों पर मौज-मस्ती करने नहीं जा रही है. अब सनातन के रंग में रंगी Gen Z धार्मिक स्थलों पर योग, गंगा आरती और धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो रही है. इससे प्रमाण धार्मिक शहरों में बढ़ती आस्तिकों की संख्या है. अयोध्या में दिसंबर के महीने में करीब 6 करोड़ श्रद्धालु रामलला के दर्शन करने पहुंचे. नए साल के दिन अयोध्या में 15 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है.

काशी विश्वनाथ मंदिर में नए साल के अवसर पर 8 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है.पुरी जगन्नाथ धाम में नए साल के दिन 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. ये आंकड़े Gen Z की सनातन में बढ़ती आस्था और बदलते ट्रेंड की तस्दीक करते हैं. सनातनी होती Gen Z के बीच अब “भजन क्लबिंग” जैसे नए ट्रेंड्स दिख रहे हैं. यानी Gen Z डीजे, लाइट्स और सात्विक माहौल में भजन गाकर अपनी आध्यात्मिकता को मॉडर्न तरीके से प्रदर्शन कर रही है. और अवसर मिलते ही अयोध्या, वाराणसी, उज्जैन जैसे शहरों में अपने आराध्य के दर्शन करने पहुंच रही है.

कोरोना के बाद बदल गया ट्रेंड

पहले जन्मदिन जैसे अवसर पर Gen Z के युवा मंदिर पहुंचते थे. अपने ईष्ट की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लेते थे. लेकिन कोरोना के बाद ट्रेंड बदला है. Gen Z की आस्था का मीटर उच्चतम शिखर पर पहुंच रहा है. इसलिए भारत में धार्मिक शहरों में पहुंचनेवाले श्रद्धालुओं में युवा वर्ग का हिस्सा करीब 30 प्रतिशत तक हो गया है. जेन जी का जुड़ाव खासतौर पर तकनीक से है. सनातन में बढ़ती जेन जी की अस्था का रंग उनके सर्च में भी दिख रहा है. इंटरनेट पर युवा क्या सर्च करते हैं इससे जुड़ी एक रिपोर्ट बताती है कि युवाओं के बीच अयोध्या के जुड़ी सर्च 585% तक बढ़ी है. उज्जैन से जुड़ी सर्च 359% और बद्रीनाथ से जुड़ी सर्च 343% बढ़ी है.

यानी Gen Z अब सनातन आस्था स्थलों का इतिहास और उनसे जुड़े आध्यात्मिक अनुभव की तलाश भी कर रही है. आध्यात्म को लेकर Gen Z की इस भूख का नतीजा है कि धार्मिक पर्यटन में जेन जी की हिस्सेदारी 12% तक हो रही है जो हर साल 15% के हिसाब से बढ़ रही है. ये आंकड़े इसके प्रमाण है कि देश के युवा अपनी जड़ की ओर लौट रहे हैं.