
कोलकाता में तीन दिन तक डटे रहे गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली लौटने से पहले भाजपा के चारों पायों (पिलर) को दुरुस्त किया. हां, बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार के मतभेद और मनभेद को दूर करते हुए शाह ने पार्टी को एकजुटता का संदेश दिया. खबर है कि शाह ने कई महीनों से दूर रहे दिलीप घोष, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार के साथ अलग से मंत्रणा की. यही चारों नेता बंगाल भाजपा के चार स्तंभ समझे जाते हैं.
शाह की बैठक में दिलीप घोष की दिखना महत्वपूर्ण है. बंगाल भाजपा की अंदरूनी पॉलिटिक्स में अभी तक एक तरह का संशय बना हुआ था. पिछले साल जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने मई के महीने में ममता बनर्जी से मुलाकात की थी तो कई तरह की अफवाह उड़ने लगी. टीएमसी में शामिल होने की भी बात की जाने लगी तब घोष ने कहा था कि लोग मेरे बारे में निगेटिव बात भी करेंगे तो मेरे लिए यह प्रचार जैसा है.
अब भाजपा के मंच पर घोष का दिखना रिश्तों पर जमी बर्फ का पिघलना कहा जा रहा है. घोष पीएम की रैली और हाल के बड़े कार्यक्रमों में नहीं दिखे थे. खबर है कि केंद्रीय पर्यवेक्षक सुनील बंसल ने दिलीप घोष को फोन किया और शाह के साथ उन्हें मिलाया गया. शाह ने चारों नेताओं को एक लक्ष्य के साथ मिलकर काम करने को कहा है. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि घोष की विधानसभा चुनावों में जिम्मेदारी क्या रहेगी.
आज कोलकाता में @BJP4Bengal के सांसदों, विधायकों के साथ आगामी चुनाव को लेकर बैठक की।
स्वाधीनता संग्राम से लेकर धार्मिक पुनर्जागरण का केंद्र रहा पश्चिम बंगाल आज TMC की तुष्टीकरण की राजनीति के कारण घुसपैठियों का अड्डा बन गया है। भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता इस विधानसभा चुनाव में… pic.twitter.com/l3XdzHtqcB
— Amit Shah (@AmitShah) December 31, 2025
शाह ने बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर नए और पुराने दिग्गज नेताओं को एक साथ मिलकर जनसंपर्क तेज करने को कहा है. घोष को भी एक प्रमुख चुनावी चेहरे के रूप में आगे रखा गया है. शाह ने वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर रणनीति पर चर्चा की. शाह की बैठक में सांसद, विधायक ही नहीं नगर निकाय पार्षद और दूसरे पदाधिकारी भी शामिल हुए.
शाह का चुनाव जीतने का प्लान
– जनप्रतिनिधि हफ्ते में कम से कम 4 दिन क्षेत्र में बिताएं.
– रोज कम से कम 5 नुक्कड़ सभाएं करें.
– चुनाव में टिकट पाने के लिए अगले दो महीने में नेताओं को अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी.
