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Wolf moon: आज 3 जनवरी को 2026 का पहला सुपरमून देखा गया है. जो आसमान में आम पूर्णिमा के मुकाबले 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार दिखाई दे रहा है. भारत में इस इसका पहला नजारा झारखंड के रांची में देखने को मिला. इसको वुल्फ मून के नाम से भी जाना जाता है. ये अद्भुत नजारा तब देखने को मिलता है जब चांद सूरज के बिल्कुल ठीक सामने उगता है, जिसकी वजह से सूरज की रोशनी चांद पर ज्यादा पड़ती है और चांद अपेक्षाकृत अधिक चमकदार दिखाई देता है. 

भारत में नए साल 2026 का पहला सुपरमून दिखाई दिया है. इसको वुल्फमून भी कहा जाता है. आप भी इसका दीदार कर सकते हैं, अगर नग्न आंखों से दिखाई न दे तो आप कैमरे और दुरबीन का उपयोग कर सकते हैं. इसको आप आधी रात के समय ज्यादा अच्छे से देख सकते हैं. 

धरती के पास चांद 
हालांकि, अभी यह झारखंड, जयपुर और असम में दिखाई दिया है. लेकिन जैसे जैसे रात होगी तो ये पूरे भारत में भी दिखाई दे सकता है. इस दौरान सुपरमून के पास एक दूसरा चमकीला तारा भी नजर आएगा जो बृहस्पति है. वैसे तो सामान्य दिनों के दौरान सूरज धरती से लगभग 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर दूर होता है. लेकिन सुपरमून के वक्त ये धरती के बेहद करीब होता है, क्योंकि चांद का ओरबिट गोली नहीं बल्कि अंडाकार होता है, जिसके कारण चांद कई बार धरती के करीब होता है और सूरज की पड़ने वाली रोशनी की वजह से ज्यादा चमकता हुआ दिखाई देता है. 

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वुल्फ मून 

सुपरमून को वुल्फ मून के तौर पर जाना जाता है. ये नाम उत्तरी गोलार्थ की पुरानी लोककथाओं से जुड़ा माना जाता है. क्योंकि जनवरी के महीने में ठंड ज्यादा होती है, जिसके चलते उत्तरी गोलार्ध में भेड़िए झुंड में इक्ट्ठा होते हैं और उनकी आवाज ज्यादा सुनाई देती है. अकसर इस तरह के नजारे डरावनी फिल्मों में दिखाए जाते हैं, जब रात के समय चांद का नजारा दिखाते हुए बैकग्राउंड से भेड़ियों की आवाज सुनाई पड़ती है.