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Maharashtra Municipal Corporation Elections: महाराष्ट्र में होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति को मिली बड़ी संख्या में निर्विरोध जीतों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने दावा किया कि महायुति के कुल 68 पार्षद निर्विरोध चुने गए हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या भाजपा उम्मीदवारों की है. उन्होंने बताया कि आठ नगर निगमों में भाजपा के 44 उम्मीदवार निर्विरोध हैं, जबकि शिवसेना के 22 और अकेले चुनाव लड़ रही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं.

विपक्षी दलों ने महायुति की निर्विरोध जीत पर साधा निशाना

विपक्षी दलों ने इन निर्विरोध जीतों पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने के लिए पैसों और दबाव का सहारा लिया गया. शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि महायुति का विरोध करने वाले उम्मीदवारों को 5 करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई. उन्होंने दावा किया कि जलगांव में उम्मीदवारों के घरों पर पैसों से भरे बैग भेजे गए. राउत ने राज्य चुनाव आयोग (SEC) पर भी सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया और नाम वापसी की समय-सीमा के बाद भी आवेदन स्वीकार किए जाने की जांच की मांग की.

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निष्पक्ष जांच की मांग

इस बीच, कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने सवाल उठाया कि सिर्फ महायुति के उम्मीदवार ही निर्विरोध क्यों चुने जा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में धनबल और बाहुबल का इस्तेमाल किया गया है और कुछ मामलों में रिटर्निंग अधिकारियों के फैसले भी संदिग्ध हैं. कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) चुनावों में, जहां शिवसेना-भाजपा महायुति के 20 उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा रहे हैं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्य चुनाव आयोग से शिकायत की है.

AAP ने मांग की है कि एकमात्र उम्मीदवार वाले वार्डों में भी मतदान कराया जाए और NOTA को मान्य विकल्प माना जाए. इस बीच, शिवसेना (UBT) और समाजवादी पार्टी ने भी आरोप लगाया कि उनके उम्मीदवारों पर नामांकन वापस लेने के लिए भारी दबाव और लालच दिया गया. विपक्ष का कहना है कि निर्विरोध चुनावों की यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.