
India-Bhutan Judicial MoU: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी कि भारत और भूटान के शीर्ष अदालतों के बीच एक समझौता एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है. इस एमओयू का मेन मकसद है कि युवा वकीलों को अनुभव और एक दूसरे से कौशल सीखने और साझा करने का मौका मिले.
भूटान के क्लर्कों की भारत में नियुक्ती
इस समझौते के तहत भूटान से दो विधि क्लर्कों को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया जाएगा. ये क्लर्क तीन महीने की अवधि के लिए भारत में काम करेंगे और उन्हें भारतीय विधि क्लर्कों के समान मानदेय मिलेगा. इसके अलावा, उनकी यात्रा और रहने का खर्च सुप्रीम कोर्ट उठाएगा, ताकि वे पूरी तरह से अपने कार्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ये क्लर्क युवा और प्रतिभाशाली हैं और उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न न्यायालयों में अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा. उन्होंने यह भी बताया कि इस पहल से दोनों देशों के बीच न्यायिक सहयोग और संस्थागत संबंध मजबूत होंगे.
सीखने का मिलेगा मौका
इस योजना से न केवल भूटान के विधि पेशेवरों को सीखने का अवसर मिलेगा, बल्कि भारतीय विधि क्लर्कों को भी अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने का मौका मिलेगा. इससे दोनों देशों के न्यायिक ढांचे और प्रक्रियाओं के बीच समझ और सहयोग बढ़ेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने इस पहल को न्यायिक संस्थानों के बीच सहयोग और युवा पेशेवरों के कौशल विकास के लिए एक जरूरी कदम बताया है. सीजेआई सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि यह कार्यक्रम भविष्य में और बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा, जिससे भारत और भूटान के न्यायिक संबंध और भी मजबूत होंगे और युवा विधि पेशेवरों का करियर सशक्त होगा.
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