
Suresh Kalmadi: भारतीय ओलंपिक संघ के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार की सुबह पुणे स्थित उनके आवास पर निधन हो गया. वह 82 साल के थे. कांग्रेस पार्टी के प्रभावशाली नेता रहे सुरेश कलमाड़ी खेल प्रशासन में भी बड़ा नाम रहे. 2010 में दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित हुआ था. आयोजन समिति के अध्यक्ष के रूप में खेल के आयोजन में सुरेश कलमाड़ी की अहम भूमिका रही थी, लेकिन इसी आयोजन ने सुरेश कलमाड़ी के राजनीतिक जीवन और करियर को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया था. आइए जानते है कि कैस कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन ने एक तरफ देश का नाम और मान बढ़ाया तो वहीं दूसरी तरफ एक दिग्गज नेता के राजनीतिक करियर पर विराम लगा दिया…
बता दें, कॉमनवेल्थ गेम्स ने दिल्ली की सूरत को पूरी तरह बदल दिया था लेकिन इस आयोजन का एक बड़ा नकारात्मक पहलू भी था. सुरेश कलमाड़ी जो भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता थे ने राजधानी के कई प्रमुख स्थानों को फिर से सुसज्जित कराया था. नए स्टेडियम बनाए गए थे और सड़कों का नवीनीकरण हुआ था. इन बदलावों के चलते दिल्ली का चेहरा न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका, बल्कि शहर को नए अवसर भी मिले थे. हालांकि, इस आयोजन के दौरान खर्चों में भारी बढ़ोतरी और बुनियादी ढांचे की खराब गुणवत्ता को लेकर कई विवाद उठे. कॉमनवेल्थ गेम्स में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और यह विवाद 2010 के बाद भारतीय राजनीति में एक गर्म मुद्दा बन गया.
सुरेश कलमाड़ी पर लगे थे गंभीर आरोप
भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी पर आरोप था कि उन्होंने इस आयोजन के दौरान सरकारी धन का दुरुपयोग किया और विभिन्न ठेके और अनुबंधों में गड़बड़ियां कीं. इन आरोपों के कारण, सुरेश कलमाड़ी को न सिर्फ भारतीय ओलंपिक संघ से बाहर होना पड़ा बल्कि उन्हें कांग्रेस पार्टी से भी दूरिया बढ़ानी पड़ी. उन्हें 2011 में गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों के तहत जांच की गई. बाद में भले ही उन्हें कुछ मामलों में राहत मिली, लेकिन उनका राजनीतिक करियर इस कांड से हमेशा के लिए प्रभावित हो गया.
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इस बीच आपको बता दें कि राजनीति और खेल प्रशासन में आने से पहले कलमाड़ी ने 1960 के दशक की शुरुआत में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में दाखिला लिया और फिर भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में भर्ती हुए. उन्होंने छह साल तक वायु सेना में सेवाएं दीं और फिर 1974 तक दो साल तक एनडीए में ट्रेनर रहे. उन्होंने 1965 और 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में भाग लिया. बता दें, संजय गांधी उन्हें राजनीति में लेकर आए थे. सुरेश कलमाड़ी केंद्र की राजनीति में महाराष्ट्र से आने वाले बड़े नाम थे. वे रेल राज्य मंत्री रहे थे. वे लोकसभा में पुणे का प्रतिनिधित्व करते थे. पुणे के विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में उनकी अहम भूमिका रही थी.

