
SIR Draft list in UP: उत्तर प्रदेश में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी हो गई. यूपी में करीब 3 करोड़ वोटरों के नाम कट गए. उत्तराखंड, झारखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्यों में जितने वोटर नहीं हैं, उतने वोटर सिर्फ यूपी में वोटर लिस्ट से बाहर हो गए. लखनऊ में तो एक तिहाई वोटर के नाम अब लिस्ट से बाहर है. शिकायतें आनी शुरू हो गई है. कहा जा रहा है कि मतदाताओं के नाम जानबूझकर नाम काटे गए हैं. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे लेकर धमकी की एक किस्त जारी कर दी है. यूपी में करीब 52 दिनों तक मतदाता सूची का शुद्धीकरण हुआ.
कैसे हुई वोटर लिस्ट की स्क्रुटनी?
दो-दो बार डेडलाइन बढ़ाई गई. आज जाकर निर्वाचन आयोग ने SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी कर दी. सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि इस ड्राफ्ट लिस्ट क्या-क्या महत्वपूर्ण बातें हैं. उत्तर प्रदेश में पहले 15 करोड़ 44 लाख वोटर थे जो अब 12 करोड़ 55 लाख बच गए हैं. इसका मतलब यह है कि SIR में 18 प्रतिशत वोट कट गए. ये जो 2 करोड़ 89 लाख नाम हटे हैं, इनमें से 2 करोड़ 17 लाख कहीं और शिफ्ट हो गए. 25 लाख 47 हजार वोटर ऐसे थे. जिन्होंने यूपी में ही दो-दो विधानसभा क्षेत्रो में अपना नाम लिखवाया था. 46 लाख 23 हजार वोटर का निधन हो गया. 6 जनवरी से 6 फरवरी तक लोग अपना नाम इसमें जुड़वा सकते हैं. अगर वैध दस्तावेज रहने के बाद भी आपका नाम कट गया है तो आप फॉर्म-6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं. नए मतदाताओं को भी फॉर्म-6 भरना होगा.
आप उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, विदेश में रहते हैं और नाम जुड़वाना चाहते हैं तो फॉर्म 6A भरना होगा. नाम हटवाना है तो फॉर्म 7 भरना होगा. निवास बदलना है या सुधार करवाना है तो फॉर्म 8 भरना होगा. निर्वाचन आयोग का कहना है कि आब्जेक्शन और क्लेम आनलाइन कर सकते है.
52 दिनों तक जो वोटर लिस्ट की शुद्धीकरण प्रक्रिया चली है, उनमें कौन-कौन से जिले ऐसे हैं, जहां सबसे ज्यादा वोट कटे हैं, उन्हें जानिए.
लखनऊ, गाजियाबाद, बलरामपुर, कानपुर, मेरठ, प्रयागराज, गौतमबुद्धनगर, आगरा, शहजहांपुर और बरेली में सबसे ज्यादा वोटर के नाम कटे हैं.
लखनऊ में 30 प्रतिशत वोटर के नाम कट गए. जबकि ललितपुर में सबसे कम 95 हजार नाम हटाए गए हैं. यानी यूपी के अलग-अलग हिस्सों में इसका प्रभाव पड़ा है. इन सभी जिलों में बीजेपी का प्रभाव ज्यादा है.
मित्रों, यूपी में 5 मुस्लिम बहुल जिले हैं. मुजफ्फरनगर, रामपुर, सहारनपुर, मुरादाबाद, और संभल. इनमें मुस्लिम मतदाता 40 से 50 प्रतिशत तक हैं. इन जिलों में 20 प्रतिशत तक वोटर कम हुए हैं. इन मुस्लिम जिलों में 28 विधानसभा सीटें हैं. 2022 में बीजेपी को सिर्फ 11 सीटें मिली थीं. इसका अर्थ है कि इन जिलों में इंडी अलाएंस का असर ज्यादा है.
यही कारण है कि SIR का राजनीतिक असर दिखना शुरू हो गया है. SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के कुछ ही देर बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया. जिसमें वो मैनपुरी को लेकर चिंतित दिखे. अखिलेश ने लिखा कि अगर चुनाव आयोग ने वैध नामों को नहीं जोड़ा तो जनता आंदोलन करेगी. मित्रों अखिलेश यादव की इस चिंता के बीच हम आपको एक विशेष जानकारी देना चाहेंगे.
2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी को 2 करोड़ 95 लाख 43 हजार वोट मिले थे. SIR के ड्राफ्ट में जितने नाम कटे हैं, उससे सिर्फ साढ़े छह लाख ज्यादा वोट अखिलेश की पार्टी को मिले थे. जो दूसरे नंबर की पार्टी है.
एक और विशेष बात ये है कि जितने वोटर के नाम कटे हैं, उसे अगर विधानसभा के हिसाब से देखें तो औसतन 71 हजार वोट होते हैं. और 2022 में 131 सीटें ऐसी थी, जहां 71 हजार से कम वोट से जीत-हार का फैसला हुआ था. लखनऊ में 12 लाख वोटर के नाम कटे हैं. वहां पर 9 विधानसभा सीट है. देखें तो हर विधानसभा सीट पर औसतन 1 लाख 33 हजार वोटर हटे हैं. लखनऊ पूर्वी विधानसभा सीट पर जहां सबसे ज्यादा वोट से बीजेपी जीती थी वो भी 68 हजार ही था. लखनऊ में 9 में से 6 सीटों पर समाजवादी पार्टी का ही कब्जा है. जाहिर तौर पर इसका असर दिखेगा.
बहुप्रतिक्षित SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद सर्वदलीय प्रतिक्रिया आ रही है. हम आपको सुनाते हैं कि कांग्रेस क्या कह रही है.
मित्रो ये एकदम शुरुआती रुझान हैं. इसी में इतनी चिंता है. जैसे-जैसे लोग अपना नाम ड्राफ्ट लिस्ट में देखेंगे, वैसे-वैसे प्रतिक्रिया और तेज होगी. मित्रो एक बड़ी सच्चाई ये है कि शहरों में एक बड़ी आबादी ऐसी है, जिसके नाम दो जगहों पर हैं. नोएडा, गाजियाबाद में ऐसे वोटर हैं, जो दूसरे राज्यों से आकर रहते हैं. उनका भी नाम यहां वोटर लिस्ट मे शामिल था. जब धीरे-धीरे सभी राज्यों में मतदाता सूची का शुद्धीकरण हो रहा है. तो लोग एक ही राज्य में, या एक ही क्षेत्र में अपना नाम स्थाई रख रहे हैं. दूसरे क्षेत्र में कट रहा है. ये भी वोटरलिस्ट में नाम कटने का बड़ा कारण है.
