
Sonam Wangchuk: जेल में बंद लद्दाख के क्लाइमेट एक्टिविस्ट और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक की जमानत याचिका पर सोमवार 12 जनवरी 2026 तक सुनवाई जी रहने वाली है. याचिका को उनकी पत्नी गीतांजलि जे एग्मो द्वारा दायर किया गया था. इसमें उन्होंने अपने पति को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी है. इसमें कहा गया है कि उनकी हिरासत अवैध और मनमानी है, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है.
हिरासत के कारणों की जानकारी नहीं दी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर काउंसिल कपिल सिबल ने तर्क दिया कि हिरासत में लेने वाले अधिकारियों ने वांगचुक को उनकी गिरफ्तारी के 28 दिन बाद तक हिरासत के कारणों की जानकारी नहीं दी. सिबल ने आगे कहा कि अधिकारियों को हिरासत के दिन से 5 या अधिकतम 10 दिनों के भीतर हिरासत के कारणों की जानकारी देना अनिवार्य है.उन्होंने यह भी बताया कि वांगचुक को बाद में एक पेन ड्राइव दी गई, जिसमें वे 4 वीडियो नहीं थे जिनके आधार पर अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लिया था.
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अधिकारियों पर हेरफेर का आरोप
सुनवाई के दौरान कपिल सिबल ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी जानबूझकर हेरफेर कर रहे हैं. उन्होंने सोनम वांगचुक के बचाव का तर्क देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के पति ने 24 सितंबर, 2025 को दिए गए अपने भाषण में हिंसा को समाप्त करने का आह्वान किया था और उसकी निंदा की थी. सिबल ने बताया कि हिंसा भड़कने से विचलित होकर वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल भी तोड़ दी थी.
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सोनम वांगचुक पर क्यों हो रही है कार्रवाई?
बता दें कि क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था. उनके ऊपर यह कार्रवाई लेह को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हिए हिंसक प्रदर्शन के बाद हुई थी. प्रशासन का आरोप है कि सोनम वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों को उकसाया था, जिसके चलते भड़की हिंसा में 4 लोगों की मौत हुई और 90 लोग घायल हुए.

