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Ex-Maharashtra DGP Sanjay Pandey: क्या कोई सरकारी अधिकारी इतना ताकतवर हो सकता है कि वो किसी राज्य के ताकतवर मुख्यमंत्री और उतने ही कद्दावर नेता और उप मुख्यमंत्री को ही घोटाले में फंसा दे? सवाल मुश्किल जरूर है लेकिन वाकई ऐसा हुआ है. महाराष्ट्र पुलिस के पूर्व मुखिया रह चुके संजय पांडेय पर ये आरोप लगा है कि उन्होंने शहरी भूमि सीमा (ULC) घोटाले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को झूठा फंसाने की साजिश रची थी. 

रिपोर्ट में खुलासा

संजय पांडेय पर ये आरोप निवर्तमान डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस यानी डीजीपी रश्मि शुक्ला द्वारा राज्य के गृह विभाग को सौंपी गई एक विशेष जांच रिपोर्ट का हिस्सा हैं. जिसमें पांडेय को आरोपी बताया गया है. 

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कौन हैं संजय पांडेय, विवादों से पुराना नाता?

संजय पांडे, महाराष्ट्र कैडर के 1986 बैच के IPS अधिकारी हैं, जो महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) रह चुके हैं. रिटायरमेंट के पांडेय जी  ने सियासत में एंट्री ली और कांग्रेस में शामिल हो गए. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उन्हें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) फोन टैपिंग मामले में आरोपी बनाया. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बाद में उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में इस मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था. 

क्या है ULC घोटाला मामला?

महाराष्ट्र में अर्बन लैंड सीलिंग घोटाला साल 2016 में सामने आया था. सबसे पहले इस मामले की जांच महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस ने की थी. इस मामले में बिल्डरों द्वारा शहरी इस्तेमाल के लिए रिजर्व रखी गई जमीन को बहुत कम कीमतों पर धोखाधड़ी से हासिल करने का आरोप था, जिससे कथित तौर पर राज्य सरकार को 160 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. इस केस में पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध थी. इस मामले में आगे चलकर बिल्डर श्यामसुंदर अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया. वहीं कई अन्य बिल्डरों, सरकारी अधिकारियों और टाउन प्लानिंग विभाग के अधिकारियों पर भी उनकी कथित भूमिका के लिए आरोपी बनाया गया.

बाद में, तत्कालीन ठाणे पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई. डीजीपी रश्मि शुक्ला द्वारा सौंपी नई रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व डीजीपी संजय पांडे ने कथित तौर पर इस मामले की दोबारा जांच का दुरुपयोग करके अधिकारियों और आरोपियों पर देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे का नाम लेने के लिए दबाव डाला, जिन्हें मूल जांच में चार्जशीट नहीं किया गया था. इस रिपोर्ट ने पांडे को नए कानूनी तूफान में फंसा दिया है. अब राज्य सरकार इस रिपोर्ट के नतीजों के आधार पर बड़ा एक्शन ले सकती है.