
West Bengal Zee News Journalist Beating News: जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती वैचारिक कैद और दृष्टिभ्रम की शिकार हैं. एक वैचारिक घेरे में कैद होने के कारण उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथी और अलगाववादियों का दौर खत्म हो चुका है. अफसोस है कि महबूबा मुफ्ती अब भी उन्हीं को खुश करने की कोशिश कर रही हैं.
बंगाल चुनाव से पहले ममता का बड़ा दांव
श्रीनगर से करीब 2300 किलोमीटर दूर कोलकाता में भी ममता बनर्जी पर एक खास वर्ग को खुश करने के लिए तुष्टीकरण वाली राजनीति का आरोप लगता रहा है. लेकिन अब ममता बनर्जी ने अपनी सियासत में थोड़ा सा बदलाव किया है. ममता बनर्जी ने आज सिलीगुड़ी में प्रस्तावित महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया. सही सुना आपने ममता जी ने महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया. कार्यक्रम में साधु संत भी शामिल हुए. इस पवित्र अवसर पर ममता बनर्जी ने महाकाल का जयघोष भी किया.
महाकाल मंदिर के शिलान्यास वाली इन तस्वीरों के कई अर्थ हो सकते हैं. राजनीतिक विरोधी इसे आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ सकते हैं. ममता बनर्जी के समर्थक इसे आस्था का साक्ष्य कह सकते हैं. शायद ममता बनर्जी महाकाल मंदिर का शिलान्यास कर ये संदेश देने की कोशिश कर रही हों कि उनके शासन में भी आम नागरिक ठीक वैसे ही सुरक्षित है जैसे महाकाल के भक्त सुरक्षित होते हैं. शायद ममता जी यही संदेश दे रही हों कि उनकी सरकार महाकाल के सैद्धांतिक मूल्यों का पालन करते हुए, राज्य के सभी नागरिकों को संकट से सुरक्षित रखेगी.
उन्मादियों ने दिखा दिए राज्य के असल हालात
लेकिन दुख के साथ हमें कहना पड़ रहा है कि ममता जी आपके राज्य में आम आदमी सुरक्षित नहीं, आम आदमी के विचारों का प्रतिनिधित्व करनेवाली पत्रकारिता भी सुरक्षित नहीं है. इसका प्रमाण आज बेलडांगा से आया है. सीएम ममता जिस वक्त सिलिगुड़ी से राज्य के लोगों को निर्भय रहने का संदेश दे रहीं थी उसी वक्त 385 किलोमीटर दूर बेलडांगा में उन्मादियों ने आपातकाल लगा दिया था. ये आपातकाल पत्रकारिता पर लगाया गया.
बेलडांगा के अलाउद्दीन शेख की झारखंड में संदिग्ध मौत हो गई थी. इसके खिलाफ उन्मादी सड़क पर उतर आए. नेशनल हाईवे 12 पर हंगामा किया, प्रदर्शन किया और टायर जलाकर ट्रैफिक जाम कर दिया. इस उन्मादी प्रदर्शन को रिपोर्ट करने के लिए जी न्यूज़ संवदादात सोमा बेलडांगा पहुंचीं थीं. जानते हैं वहां क्या हुआ. उन्मादियों ने सोमा पर हमला कर दिया.
महिला रिपोर्टर के साथ कट्टरपंथियों ने की मारपीट
उनका कैमरा छिना, मोबाइल छिना और मारपीट की. एक महिला रिपोर्ट के साथ मारपीट की गई. ये शर्मनाक है. ये कानून व्यवस्था के गाल पर तमांचा है. सोचिए एक महिला मुख्यमंत्री के राज्य में एक महिला रिपोर्टर से मारपीट की गई. मारपीट में बुरी तरह घायल सोमा को मुर्शिदाबाद मेडिकल कालेज में एडमिट कराया गया है.
सोचिए ममता जी निर्भय होने का संदेश दे रही हैं. लेकिन उन्हीं के राज्य में पत्रकारिता पर आपातकाल लगा दिया गया. उन्मादी बीच सड़क पर जी न्यूज़ की महिला पत्रकार से मारपीट करते हैं. इसलिए हम कह रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में महाकाल का नहीं आपातकाल का समय है.
मानवाधिकार आयोग ने पुलिस से मांगा जवाब
पत्रकारिता पर हमला यानी स्वतंत्र आवाज को दबाने की साजिश,इसे ही आपातकाल कहा जाता है. ये आपातकाल उसी बेलडांगा में लगाया गया जहां नई बाबरी के नाम पर उन्मादियों ने शक्ति-प्रदर्शन किया था. इस उन्माद और आपातकाल के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मुर्शिदाबाद पुलिस से जवाब मांगा है
पश्चिम बंगाल में पत्रकारों पर हमला पहली बार नहीं हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2025 तक यानी ममता बनर्जी के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में पत्रकारों पर 100 से ज्यादा हमले हुए हैं. पत्रकारों को धमका कर उन्हें काम से रोकने की कोशिश हुई है. ये अघोषित आपातकाल है. ममता बनर्जी को ये समझना चाहिए कि ये अघोषित आपातकाल उनकी सरकार के लिए हानिकारक है. इसलिए उन्हें सबसे पहले उन उन्मादियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो पत्रकारों को काम करने से रोक रहे हैं. जिन्होंने जी न्यूज़ की महिला रिपोर्टर से मारपीट की.
