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AR Rahman Bollywood Remark Opinion: हाल ही में ऑस्कर जीत चुके म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान (AR Rahman) का कहना है कि पिछले कुछ सालों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आए पावर शिफ्ट की वजह से उन्हें कम काम मिल रहा है. उन्होंने कहा कि शायद ये बातें उनके सामने सीधे नहीं आईं, लेकिन कई बार ‘चाइनिज विस्पर’ से पता चला कि कुछ प्रोजेक्ट्स उनसे हटकर दूसरे लोगों को दे दिए गए. रहमान के मुताबिक अब इंडस्ट्री में कई ऐसे लोगों के हाथ में ताकत है, जो क्रिएटिव नहीं हैं. 

उन्होंने ये भी कहा कि इसमें कहीं न कहीं ‘धार्मिक भेदभाव या सोच’ भी हो सकती है, लेकिन ये कभी उनके चेहरे पर नहीं दिखाई गई. रहमान ने साफ कहा कि उन्हें इस बात का कोई अफसोस नहीं है. उनका कहना है कि वो काम की तलाश में नहीं रहते. अगर उनके पास कोई काम आता है, तो वे पूरी मेहनत और ईमानदारी से उसे करते हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे ज्यादा समय अपने परिवार के साथ बिताने को मिल जाता है. मैं खुद काम ढूंढने नहीं निकलता. जो मेरे हिस्से का होगा, वो अपने आप मेरे पास आएगा’. 

बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने में लग गए 7 साल

हिंदी सिनेमा में अपने शुरुआती दौर को याद करते हुए रहमान ने बताया कि उन्हें बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने में 7 साल लग गए. जबकि 90 के दशक में उन्होंने ‘रोजा’, ‘बॉम्बे’, ‘दिल से’ और ‘रंगीला’ जैसी शानदार फिल्मों का म्यूजिक कंपोज किया. बावजूद इसके वे खुद को इंडस्ट्री का बाहरी ही मानते रहे. उनका कहना है कि असली पहचान उन्हें 1999 में आई सुभाष घई की फिल्म ‘ताल’ से मिली, जिसने हर घर में जगह बना ली. रहमान ने बताया कि ‘ताल’ का म्यूजिक हर वर्ग के लोगों तक पहुंचा. 

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बॉलीवुड में हिंदी सीखने की दी गई सलाह 

रहमान ने ये भी माना कि शुरुआत में उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनापन महसूस नहीं होता था, क्योंकि वो हिंदी नहीं बोल पाते थे. उन्होंने सुभाष घई से हुई बातचीत को याद करते हुए बताया कि घई ने उन्हें हिंदी सीखने की सलाह दी थी. इसके बाद रहमान ने उर्दू सीखी, जिसे वो हिंदी म्यूजिक की जड़ मानते हैं. आगे चलकर उन्होंने अरबी और पंजाबी भाषा भी सीखी. पंजाबी सीखने में सिंगर सुखविंदर सिंह का खास असर रहा, जिनकी आवाज ने उनके म्यूजिक को नई पहचान दी.

क्या सच में बदलाव के चलते नहीं मिल रहा काम? 

एआर रहमान ने जो बातें कही हैं, वो उनके हाल के एक्सपीरियंस और इंडस्ट्री में हुए बदलाव की तरफ इशारा करती हैं. उनका कहना है कि पिछले कुछ सालों में बॉलीवुड में पावर शिफ्ट हुआ है, यानी अब फैसले ऐसे लोगों के हाथ में हैं जो जरूरी नहीं कि क्रिएटिव हों. ये बदलाव उन्हें सीधे सामने नहीं दिखा, लेकिन उन्होंने कैसी भी करके ये बातें उनके कानों तक पहुंच गईं, जिसका मतलब ये है कि अब काम सिर्फ टैलेंट या म्यूजिक क्वालिटी के बेस पर नहीं, बल्कि कनेक्शन के बेस पर मिल रहा है. 

लोगों की पसंद में आया बड़ा बदलाव 

हाल के सालों में हिंदी सिनेमा में कंटेंट और म्यूजिक की दिशा काफी तेजी से बदली है, जो लोगों के पसंद पर निर्भर करती है. पहले फिल्मों में म्यूजिक का बड़ो रोल होता था, लेकिन आज गाने सिर्फ फिल्मों में नहीं, बल्कि एल्बम के तौर पर भी लोगों के सामने पेश किए जाने लगे हैं. इतना ही नहीं, अब नई जनरेशन सॉफ्ट गानों को छोड़ ज्यादातर हिप-हॉप गानों की राह पकड़ चुके हैं. ऐसे में मेकर्स भी यंगसटर्स को ध्यान में रखकर फिल्मों में गानों का चयन कर रहे हैं, जिसके लिए वो आज के सिंगर्स को चुन रहे हैं, जिनसे लोग सीधे जुड़ पा रहे हैं.   

लोगों को पसंद आती है उनकी कंपोजिंग

इसके अलावा, इंडस्ट्री में यंग और नए निर्माता-निर्देशक आए हैं, जिनकी पसंद पुराने कंपोजरों से अलग है. इसी वजह से रहमान को लगता है कि उनके काम के मौके कम हो गए हैं, भले ही उनका टैलेंट अब भी अचूक हो. रहमान का ये भी मानना है कि इस बदलाव में कहीं न कहीं धार्मिक सोच या पर्सनल फैक्टर्स का असर भी हो सकता है. उन्होंने खुद इसे अपने ऊपर सीधे महसूस नहीं किया, लेकिन माना कि ऐसा होना संभव है. बावजूद इसके रहमान ने कहा कि उन्हें अपनी साख और मेहनत पर भरोसा है और वो काम करने से पीछे नहीं हटते.