
परिवेश वात्स्यायन, दिल्ली: चित भी मेरी पट भी मेरी. कुछ लोगों की सोच ऐसी ही होती है कि वो सिस्टम में रहकर, सिस्टम को ही खोखला करने का तरीका ढूंढ लेते हैं. इसके बाद उसे अपने मुनाफे का सिस्टम बना लेते हैं. अब हम एक ऐसे ही शख्स से जुड़ा खुलासा करने जा रहे हैं जो हैं तो देश के जाने-माने कॉरपोरेट वकील, लेकिन उन पर आरोप हैं कि उन्होंने पेशे की आड़ में बैंकों को नुकसान पहुंचाया. वकील साहब ने ऐसा जाल बुना कि डूबती हुई कंपनियों को खुद के नाम करा लिया.
200 करोड़ रुपए की कीमत की प्रॉपर्टी, क्या महज 25 करोड़ रुपये में खरीदी जा सकती है. आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा कैसे मुमकिन है. लेकिन ये कारनामा कर दिखाया है कानून के जानकार एक शख्स ने हालांकि उसने इसके लिए जो तरीका अपनाया वो गैरकानूनी था.
आरोपी का परिचय-
नाम- आलोक धीर, पेशा- जाने-माने कॉरपोरेट वकील, आरोप- दिवालिया प्रकिया में चल रही संपत्तियों को अवैध तरीके से खरीदना.
आलोक धीर ऐसे कॉरपोरेट वकील हैं जो दिवालिया में फंसी संपत्तियों के लिए केस लड़ते हैं. लेकिन इसी केस के दौरान वो उन संपत्तियों को अपनी ही कंपनियों के जरिए हासिल करने के लिए पर्दे के पीछे खेलते हैं.
ज़ी मीडिया की स्पेशल इनवेस्टिगेटिव टीम की पड़ताल
राजस्थान के जैसलमेर में मौजूद फोर्ट रजवाड़ा और गोदावण होटल के लिए देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने 24 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था. उस होटल को चलाने वाला समूह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को वो कर्ज नहीं चुका पाया. जिसके बाद उस कर्ज को NPA घोषित करना पड़ा. बाद में आलोक धीर से जुड़ी कंपनी ALCHEMIST ARC को वो कर्ज ट्रांसफर कर दिया गया. यानी जैसलमेर के उन होटल्स के बॉस आलोक धीर बन बैठे. आरोप है कि आलोक धीर ने यहीं बड़ा खेल खेला.
मॉडस अप्रैंडी
आरोप है कि उस होटल की प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू उस वक्त 200 करोड़ रुपये थी. वो आलोक धीर की झोली में सिर्फ और सिर्फ 25 करोड़ रुपये में आ गई. जैसलमेर की जिला अदालत ने अक्टूबर 2021 में इस डील को धोखाधड़ी माना और SBI के अधिकारियों और ALCHEMIST ARC के मालिक की गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया था.
इस धोखाधड़ी के केस में साल 2021 में SBI के पूर्व चेयरमैन प्रतीप चौधरी गिरफ्तार भी हो चुके हैं. बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने ALCHEMIST ARC के मालिक की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी. हालांकि अभी भी मामला कोर्ट में पेंडिंग है, जिसमे धीर को अभी तक क्लीन चिट नहीं मिली है.
इस मामले में ज़ी मीडिया ने आलोक धीर से सवाल पूछा तो उनकी तरफ से सफाई आई.
200 करोड़ की वैलूएशन अदालत के किसी रिकॉर्ड में नहीं है. SBI के मूल्यांकन में संपत्ति की कीमत लगभग 40.69 करोड़ रुपये थी. इससे पहले आलोक धीर से जुड़ी कंपनी ALCHEMIST ARC की संदिग्ध भूमिका गुरुग्राम की एक बेशकीमती जमीन की खरीद बिक्री से जुड़ी है. Alchemist ARC के पास कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स में वोटिंग का 35 प्रतिशत अधिकार था. उस कंपनी के प्रतिनिधि ने ED के सामने बयान दिया है कि उन पर दबाव डाला गया, ताकि वो Experion Capital के पक्ष में वोट डाले.
अब सवाल है कि क्या कोई एक कंपनी किसी दूसरी कंपनी पर ऐसा दबाव डाल सकती है. जिसका प्रमोटर खुद ही एक वकील हो. आलोक धीर, धीर एंड धीर एसोसिएट्स के मैनेजिंग पार्टनर हैं. वो Alchemist ARC में नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं. धीर दिवाला प्रक्रिया से जुड़ी संस्थाओं से भी जुड़े हैं.
आलोक धीर पर हितों का टकराव का भी आरोप है. ऐसा ही एक मामला है आलोक धीर की कंपनी धीर एंड धीर एसोसिएट्स के खिलाफ भी सामने आया जिसे लेकर आरोप लगा कि धीर एंड धीर एसोसिएट्स एक तरफ मद्रास पेट्रोकेम नाम की कंपनी का केस लड़ रही थी.
वहीं दूसरी तरफ आलोक धीर की एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (ARC) ने मद्रास पेट्रोकेम का कर्ज खरीद लिया. मतलब आलोक धीर एक तरफ जिस कंपनी के लिए केस लड़ रहे थे. दूसरी तरफ अपनी ही दूसरी कंपनी के जरिए उसी कंपनी का कर्ज खरीद लिया. ये सिर्फ बिजनेस नहीं बल्कि नैतिकता का उल्लंघन है.
एक कॉरपोरेट वकील जिसका काम कंपनियों को न्याय दिलवाना है, लेकिन वो अलग-अलग मामलों में खुद कानून के कठघरे में खड़ा हो गया. वजह था पैसा और दुनिया को धोखे में रखकर मुनाफा कमाना. आरोप गंभीर हैं इसलिए अदालत तक पहुंचे हैं.
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