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Timeline Journey of the Indian Republic: 1950 में संविधान लागू होने के बाद से 2026 तक गणतंत्र की यात्रा का सफर बेहद शानदार और दिलचस्प रहा है. इतने लंबे कालखंड में भारत ने विज्ञान-प्रौद्योगिकी, कृषि, हेल्थ सेक्टर से लेकर ट्रांसपोर्ट और बैकिंग सेक्टर से लेकर खेल जगत तक कई मोर्चों पर महत्वपूर्ण प्रगति की है. देश की विकास यात्रा की बात करें तो भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकॉनमी और सैन्य ताकत है. भारत ने नई राजनीतिक पहचान स्थापित की है. इस विकास यात्रा में भारत ने कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं.

गणतंत्र की विकास यात्रा की टाइमलाइन

भारत ने बीते दो दशकों में अपना कद इतना बड़ा बना लिया है जो दुनिया को आकर्षक लगता है. कोरोना काल में कई देशों को कोविड की वैक्सीन से लेकर अमेरिका तक को खाने की टैबलेट भेजकर भारत ने ऐसा मुकाम हासिल किया है. जिन पर 140 करोड़ देशवासियों को गर्व होता है.

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कानून व्यवस्था: 1947 में 1950 के दशक तक भारत अंग्रेजी शासन व्यवस्था पर निर्भर रहा. अंग्रेजों के बनाए ‘बाबा आदम’ के जमाने के कानून भारतवासियों ने 2023 तक ढोए. 2014 में मोदी सरकार आने के बाद तेजी से काम हुआ और 2024 में भारतीय दंड संहिता/इंडियन पीनल कोड (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS) में तब्दील हो गई. बीते 10 सालों में भारत में इंस्पेक्टर राज का खात्मा हुआ. सिंगल विंडो सिस्टम लागू होने से लोगों का जीवन आसान हुआ.

शिक्षा व्यवस्था: 1950 में संविधान की स्थापना के समय से तुलना करें तो साक्षरता दर 12% से बढ़कर करीब 83 प्रतिशत हो गई है. देश भर में स्कूलों की संख्या एक लाख 40 हजार से बढ़कर 15 लाख से बहुत ज्यादा हो गई है. वहीं विश्वविद्धालय जो पहले महज 20 थे, आज उनकी संख्या 1100 के पार हो गई है.

स्वास्थ्य व्यवस्था: 1950 में देश में अंग्रेजों के बनाए बस 19 मेडिकल कॉलेज थे. 2026 में ये आंकड़ा बढ़कर करीब 850 हो चुका है. अस्पतालों की  संख्या 7000 से बढ़कर 70,000 हो चुकी है. पहले देश में महज 61,000 मान्यता प्रॉप्त डॉक्टर थे. 2026 में देश में 13.86 लाख रजिस्टर्ड एलोपैथिक मेडिकल प्रेक्टिशनर डॉक्टर मरीजों की सेवा कर रहे हैं. आयुर्वेदिक चिकित्सकों का आंकड़ा अलग है. 7.5 लाख से अधिक आयुष डॉक्टर हैं. आज मातृत्व मृत्यु दर 2000 से घटकर 100 से कम रह गई है. शिशु मृत्यु दर में भी भारी कमी आई है. औसत आयु बढ़ी है. आज भारत खुद दवाओं का बड़ा निर्माता और एक्सपोर्टर बन चुका है. कोरोना महामारी में वैक्सीन बनाकर भारत ने अपनी योग्यता साबित की है.

सड़क व्यवस्था: भारत में कुल 599 नेशनल हाईवे हैं. आज भारत में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है. 1950 में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई महज 21,378 किमी थी और 2026 आते आते इनमें अभूतपूर्व इजाफा हुआ है.

स्पेस साइंस: भारत की स्पेस एजेंसी इसरो के कामकाज की शुरुआत साइकिल और बैलगाड़ी से हुई थी. पहले रॉकेट प्रक्षेपण कार्यक्रम की शुरुआत 21 नवंबर 1963 को केरल के थुंबा से हुई थी. तब राकेट को रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन तक साइकिल से ले जाया गया था. उस समय इसको के पास खुद का ऑफिस तक नहीं था. 2025 आते आते भारत चांद के परली पार यानी दक्षिणी ध्रुव में सॉफ्ट लैंडिंग कर चुका है. भारत अपनी स्पेस कमांड बना रहा है.

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तकनीक: तकनीक के मामले में भी बेहद शानदार कामयाबियां हासिल की हैं. 1950 में भारत की करीब 35 करोड़ आबादी के लिए मुश्किल से 50,000 टेलीफोन लाइनें थीं. 1980 के दशक में भारत में इंटरनेट आया. एक घंटे सर्फिंग करने के इंटरनेट कैफे में 50 से 60 रुपये लगते थे. उस दौर में यह केवल शिक्षा और अनुसंधान के लिए ही उपलब्ध था. आज डाटा, आटा से सस्ता हो गया है. मोबाइल के दम पर लोग दुनिया मुठ्ठी में कर रहे हैं. डिजिटल युग में 2026 में भारत में एक अरब से भी ज्यादा इंटरनेट यूजर्स हैं. ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर दुनिया के सारे काम चुटकी बजाते हो रहे हैं.

बिजली: 1950 में भारत की बिजली उत्पादन की कुल क्षमता महज 1,362 मेगावाट थी, देश कोयले से पैदा होने वाली बिजली पर निर्भर था. आज भारत में सोलर क्रांति आ चुकी है. ग्रीन एनर्जी की दिशा में भारत तेजी से आगे बढ़ा है. 21 जनवरी, 2026 को आई पीआईबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक बिजली मंत्रालय ने नई राष्ट्रीय विद्युत नीति (एनईपी) 2026 का मसौदा जारी किया. इसका मकसद 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए विद्युत क्षेत्र में बदलाव लाना है. आखिरी रूप दिए जाने के बाद, नई पॉलिसी 2005 में अधिसूचित हुई वर्तमान एनईपी की जगह ले लेगी. प्रति व्यक्ति बिजली की खपत वर्ष 2024-25 में 1,460 किलोवाट-घंटे तक पहुंच गई. जबकि आजादी के समय सिर्फ 1500 गांवों तक बिजली पहुंच पाई थी, जबकि शायद ही देश का कोई कोना हो जहां बिजली का खंभा और ट्रांसफार्मर न हो.

निर्यात: भारत के निर्यात क्षेत्र की बात करें तो साल 1950-51 में एक्सपोर्ट रेट बस 1.27 बिलियन डॉलर थी.  जो साल 2026 में बढ़कर 850 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.

सोना-चांदी-पेट्रोल: 1950 में देश के लोग 90 रुपये में 10 ग्राम सोना खरीद लेते थे, आज 90 रुपये में भरपेट साफ हाइजीनिक खाना भी नहीं मिलता. चांदी भी 2026 में रिकॉर्ड छू रही है. तेल के खेल की बात करें तो कभी 50 पैसे में एक लीटर पेट्रोल भर जाता था और आज एक लीटर तेल के लिए 96 से 98 रुपये खर्च करने पड़ते हैं.

ऑटो इंडस्ट्री: 1950 में देश में बहुत कम कारें थीं. अधिकांश सरकारी कारें थीं1980 के दशक में ऑटो सेक्टर में क्रांति आई जब 1981 में मारुति उद्योग लिमिटेड स्थापित हुई. कंपनी ने 1983 में मारुति 800 को लॉन्च किया, यह वो कार थी, जिसने भारतीय ऑटो मार्केट में क्रांति ला दी. 1991 आया और पूरे भारत के उद्योग को एक नया आयाम मिला. तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने दुनिया के लिए भारतीय बाजार के दरवाजे खोल दिए. 

76 साल में कहां पर पिछे दिखता है देश?

भारत के गणतंत्र की विकास यात्रा की टाइम लाइन में अगर कोई एक चीज है, जिसमें देश कुछ पीछे दिखता है तो वो बेरोजगारी है. हालांकि 35 करोड़ से 145 करोड़ आबादी वाले देश में सबको रोजगार मुहैया कराना आसान नहीं होता. इसके बावजूद स्किल्ड और अनस्किल्ड लोगों को रोजी रोटी कमाने का अवसर देने के लिए देश में कई उत्साहवर्धक योजनाएं चलाई जा रही हैं.