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UGC new rules: यूजीसी के नियमों में हुआ बदलाव भारत के लिए चिंता का विषय है. जिन छात्रों को देश का भविष्य कहा जाता है वो UGC के नए नियम के लेकर आपस में ही उलझने लगे हैं. ये ऐसा विषय है जिसपर मीडिया से लेकर नेताओं का बड़ा वर्ग चुप है. छात्रों का आरोप है कि UGC का ये नियम कैंपस में छात्रों के बीच असमानता फैला रहा है. आरोप लग रहे हैं कि नए नियम से छात्रों में वैमनस्य बढ़ा है. नियमों में बदलाव का विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि ये बिल कैंपस में मनभेद की दीवार खड़ी कर रहा है. इसलिए अब UGC के नए नियम को बनाने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी आपको बताते हैं.

केंद्र सरकार ने 13 जनवरी 2026 को UGC के नए नियम को नोटिफाई किया. ये नियम 15 जनवरी से देश के सभी विश्वविद्यालयों में लागू हो गया. लेकिन इसे बनाने की प्रक्रिया पहले शुरू हो गई है. रोहित वेमुला की आत्महत्या से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट ने UGC को निर्देश दिया था कि 2012 के पुराने नियमों को मजबूत करने के लिए नई गाइडलाइंस बनाई जाएं. इसके बाद UGC ने एक ड्राफ्टिंग कमेटी बनाई.

जनता की राय मांगी गई

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इस कमेटी ने नए नियम का ड्राफ्ट बनाया. यूजीसी ने नए नियम के ड्राफ्ट पर 27 फरवरी 2025 को आम लोगों से राय मांगी. नए नियम पर आम लोगों की राय लेने के बाद यूजीसी ने इसे सरकार को भेज दिया. सरकार ने इस ड्राफ्ट को  संसद की शिक्षा, महिला, बाल और युवा संबंधी मामलों की संसदीय समिति को सौंपा दिया.

कमेटी में कौन-कौन?

संसद की इस समिति ने यूजीसी के ड्राफ्ट रेगुलेशंस की समीक्षा की. कमेटी के अध्यक्ष राज्यसभा में कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह हैं. इस कमेटी में बीजेपी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, शरद पवार वाली एनसीपी, अजित पवार वाली एनसीपी और सीपीएम के सांसद सदस्य हैं. कमेटी ने  8 दिसंबर 2025 को यूजीसी के ड्राफ्ट में कुछ बदलाव कर इसे सरकार को सौंप दिया. सरकार ने इस ड्राफ्ट को 13 जनवरी को नोटिफाई किया. नए नियम का समर्थन करने वाले छात्र क्या कह रहे हैं उन्हें भी सुनना जरूरी है.

ये कानून कैसे बना जानिए

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पूरी प्रक्रिया का पालन कर राजनीतिक सहमति के बाद UGC के नए नियम को नोटिफाई किया गया. आपके मन में सवाल होगा की संसद का सत्र चल नहीं रहा है. UGC के नए नियम को संसद में पेश नहीं किया गया. फिर ये कानून कैसे बन गया. इसे आसान शब्दों में समझिए. देश में UGC एक्ट 1956 में बना था. संसद ने 3 मार्च 1956 को यूजीसी एक्ट को मंजूरी दी थी. अब तक इस एक्ट के तहत 2012 के नियम लागू थे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2026 में नए नियम नोटिफाई किए गए. इसे संसद से पास कराने की जरूरत नहीं है.

UGC के नए नियम को लेकर छात्र, समर्थन और विरोधी खेमे में बंट रहे हैं. ये बंटवारा चिंता का विषय है. लेकिन चिंता के इस विषय में भी कुछ नेता अवसर देख रहे हैं. जो बंटवारा अभी यूनिवर्सिटी कैंपस तक सिमटा हुआ है उसे समाज तक पहुंचाने की विषैली कोशिश शुरू हो गई है. 

जनप्रतिनिधियों का एक सामूहिक कर्तव्य विवादित मुद्दों के हर पहलू से आम लोगों को परिचित कराना होता है. उनका कर्तव्य होता है कि आम लोगों को जागरूक करें, विवादित मुद्दों पर सहमति बनाएं. लेकिन कुछ नेता इसमें भी अपने लिए सियासत का अवसर तलाश लेते हैं. आप तय किजिए की इसे क्या कहा जाए. हम सिर्फ इतना कहेंगे कि ये देश का भविष्य कहे जानेवाले नौजवानों से जुड़ा मुद्दा है. सभी पक्षों के तर्क को सुनकर सावधानी और संवेदनशीलता के साथ इस विवाद को सुलझाना चाहिए.