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DNA Analysis: अजित पवार का राजनीतिक क्षेत्र महाराष्ट्र तक सीमित था. उन्होंने महाराष्ट्र से बाहर अपना राजनीतिक कद बढ़ाने और अपनी पार्टी के विस्तार की कोई गंभीर मंशा नहीं दिखाई थी. 2 जुलाई 2023 को अजित पवार विपक्षी गठबंधन से निकल कर महाराष्ट्र में NDA गठबंधन की सरकार में डिप्टी सीएम बने थे. नवंबर 2024 में हुए विधानसभा 41 सीटें जीतकर उन्होंने बताया था कि महाराष्ट्र में शरद पवार वाली NCP के मुकाबले उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत है और वो महाराष्ट्र की राजनीति में एक मजबूत पक्ष हैं. 

देश की राजनीति में कांग्रेस के कमजोर होने के बाद विपक्ष के गठबंधन में मजबूत क्षेत्रिय नेताओं की ताकत बढ़ी है. अजित पवार शरद पवार के परिवार से थे. इसलिए NDA के साथ होने के बाद भी विपक्षी गठबंधन में भी उनका राजनीतिक सम्मान था. विपक्ष की नज़र भी उनपर थी. इसलिए विमान हादसे मे अजित पवार के निधन के बाद हादसे पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल उठाने वालों में सबसे प्रमुख नाम है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का. 
 
ममता बनर्जी ने क्यों उठाई जांच की मांग?

ममता बनर्जी ने साजिश की बात क्यों कही इसके निहितार्थ को समझिए. महाराष्ट्र में चंद दिन पहले हुए नगरपालिका चुनाव में शरद पवार और अजित पवार वाली एनसीपी ने पिंपरी-चिंचवाड़ म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में गठबंधन किया था. 2 जुलाई 2023 के बाद ये पहली बार था जब पवार परिवार राजनीतिक तौर पर एकजुट हुआ. गठबंधन के बाद इस राजनीतिक चर्चा ने आकार लिया कि पवार परिवार फिर एकजुट हो सकता है. शरद पवार विपक्ष के बड़े दिग्गज हैं. इसलिए विपक्षी नेताओं को उम्मीद थी कि अजित पवार भी साथ आएंगे. सियासी गलियारे में ये चर्चा भी चल रही थी NCP के दोनों गुट जल्द ही एक साथ आ सकते हैं. यानी दोनों पार्टियों का विलय हो सकता है. इसलिए ममता बनर्जी के साथ ही दूसरे विपक्षी नेता साजिश की आशंका जता रहे हैं. और विमान हादसे की जांच की मांग हो रही है.

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विपक्षी नेता हादसे की जांच की मांग रहे

विपक्षी नेता हादसे की जांच की मांग रहे हैं. इसलिए आज हम आपको ये जानकारी जरूर शेयर कर रहे हैं कि देश में विमान दुर्घटनाओं की जांच की क्या व्यवस्था है. भारत में विमान हादसे के बाद पहली जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB करता है. AAIB सभी पक्षों जैसे एयरलाइन, पायलट, एयरपोर्ट अथॉरिटी से बात कर जांच को आगे बढाता है. शुरुआती जांच के बाद AAIB जांच के लिए एक्सपर्ट्स की कमेटी बनाता है. ये कमेटी साइट के सर्वेक्षण, ब्लैक बॉक्स के विश्लेषण, गवाहों के बयान, मौसम रिपोर्ट, मेंटेनेंस रिकॉर्ड्स की जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार करती है. DGCA यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन भी हवाई हादसे की जांच कराता है.

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की फाइनल रिपोर्ट के बाद DGCA आगे की कर्रवाई करता है. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री जांच पर नज़र रखती है. जरूरी होने पर हवाई हादसे की जांच दूसरी एजेंसियों से कराई जाती है. बारामती हादसे में  एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है. 

बारामती विमान हादसे पर शरद पवार ने क्या कहा?

इसी बीच शरद पवार ने बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा है कि बारामती में जो हुआ वो हादसा है. शरद पवार परिवार के मुखिया हैं. वो साफ-साफ कह रहे हैं कि बारामती में जो हुआ वो हादसा है. इसमें राजनीति नहीं की जाए. लेकिन उन्हीं की पार्टी के बड़े नेता जयंत पाटिल ने जो कहा है वो इससे अलग है. जयंत पाटिल ने कहा है कि हाल के दिनों में ये बात हुई थी कि NCP के दोनों पक्षों को मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए. 

अजित पवार चाहते थे कि दोनों पार्टियां एक साथ आएं. और इसे लेकर हाल में मीटिंग भी हुई थी. यानी शरद पवार की पार्टी और अजित पवार की पार्टी के बीच बैठक हुई थी. और दोनों दलों के साथ आने की चर्चा भी होने लगी थी. जयंत पाटिल ने सवाल उठाया है कि दुर्घटना एयरस्ट्रीप से बाहर क्यों और कैसे हुई जयंत पाटिल ने कहा है कि हादसा इत्तेफाक नहीं है. इसकी जांच होनी चाहिए. हालांकि इस घटना में साजिश वाली थ्योरी बताने वालों को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी जवाब दिया है.

6 बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार

अजित पवार 1982 से यानी 44 साल से महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय थे. 1991 में वो पहली बार बारामती से सांसद बने थे. वो 6 बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे. पहली बार 2010 में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में अजित पवार डिप्टी सीएम बने थे. जुलाई 2023 में शरद पवार से बगावत के बाद एनसीपी का चुनाव चिह्न घड़ी भी अजित पवार को ही मिला था. छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे जैसे दिग्गज नेता शरद पवार का साथ छोड़कर अजित पवार के साथ आ गए थे. पहले विधानसभा चुनाव और फिर नगरपालिका चुनाव में अजित पवार ने महाराष्ट्र में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई थी.

NCP का नेतृत्व कौन करेगा?

अब अजित पवार के निधन के बाद बड़ा सवाल ये है कि उनकी पार्टी का नेतृत्व कौन करेगा. ये सवाल इसलिए है क्योंकि अजित पवार के साथ आए नेता किसी विचारधारा के बंधन में एकजुट नहीं हुए थे. उन्हें एकजुट किया था अजित पवार के प्रभावशाली व्यक्तित्व और सत्ता के सम्मोहन ने. अब अजित पवार नहीं रहे. इसलिए ये सवाल है कि अब पार्टी को एकजुट कौन करेगा. इस सवाल पर चर्चा से पहले अजित पवार के राजनीतिक ताकत को समझते हैं. वो महाराष्ट्र के सहकारी क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखते थे. उनकी सियासी ताकत का सबसे ज्यादा असर पश्चिम महाराष्ट्र में था. यहां पुणे, बारामती, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, सोलापुर और सातारा में अजित प्रभावशाली थे. मराठा वोटर्स पर उनकी मजबूत पकड़ थी और अल्पसंख्यक मतादाताओं का एक हिस्सा भी अजित पवार के साथ था. 

अजित पवार की विरासत कौन संभालेगा?

आज के राजनीतिक गणित के हिसाब से अजित पवार वाली NCP ऐसी राजनीतिक ताकत हैं जो महाराष्ट्र में हर गठबंधन के लिए जरूरी है. फिलहाल वो बीजेपी के साथ है.  इसलिए प्रश्न बीजेपी के लिए भी है कि क्या अजित पवार के बाद एनसीपी एकजुट रहेगी. दरअसल अजित पवार के साथ आए नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षा असीमित है. चुनाव आयोग ने बेशक अजित पवार की पार्टी को मूल NCP माना था. लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में बरगद जैसी शख्सियत रखनेवाले शरद पवार की छत्रछाया  से अजित पवार महज 3 साल पहले बाहर निकले थे. उनकी पार्टी अभी नई थी. इसलिए ये सवाल बड़ा हो जाता है कि अजित पवार की विरासत कौन संभालेगा. अजित पवार के परिवार के दो सदस्य सक्रिय राजनीति में हैं. पत्नी सुनेत्रा पवार और बड़े बेटे पार्थ पवार

  • सुनेत्रा पवार 2024 में राज्यसभा की बनीं. 

  • उनके बड़े बेटे पार्थ पवार 2019 में मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे. 

  • सुनेत्रा पवार के पास महज 2 साल का राजनीतिक अनुभव हैं. 

  • वहीं पार्थ पवार अब तक कोई चुनाव नहीं जीते हैं. 

  • अजित पवार की NCP में प्रफुल्ल पटेल बड़े नेता हैं. 

  • अजित पवार ने प्रफुल्ल पटेल को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया. लेकिन महाराष्ट्र में जमीन पर उनकी मजबूत पकड़ नहीं है.

  • सुनील तटकरे  का संगठन कौशल परखा हुआ है, वो NCP के प्रदेश अध्यक्ष हैं. यानी को पार्टी संगठन को संभाल सकते हैं. लेकिन पार्टी के दूसरे गुट उनका नेतृत्व स्वीकार करेंगे इसमें संदेह है. 

  • धनंजय मुंडे बड़े नेता हैं मराठवाड़ा में उनकी मजबूत पकड़ भी है. लेकिन अनके पास संगठन चलाने का अनुभव नहीं है. 

  • छगन भुजबल OBC के बड़े नेता हैं. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे हैं. लेकिन NCP के दूसरे नेता छगन भुजबल का नेतृत्व स्वीकार करेंगे इसमें संदेह है.

इसलिए सहानुभूति फैक्टर को ध्यान में रखते हुए सुनेत्रा पवार को अगर NCP की कमान दी जाती है तो फिलहाल पार्टी एकजुट रहेगी. लेकिन सुनेत्रा पवार की पार्टी पर पकड़ उतनी मजबूत नहीं है जितनी अजित पवार की थी. ऐसे में पार्टी के दूसरे महत्वाकांक्षी नेता थोड़े समय बाद अलग रास्ता अपना सकते हैं या फिर शरद पवार की पार्टी में वापस लौट सकते हैं.