
Arab-India Cooperation Forum News: ईरान को ना तो सऊदी पर भरोसा है और ना ही पाकिस्तान पर. लेकिन खलीफा को भारत पर पूरा यकीन है. सिर्फ ईरान ही नहीं, सभी अरब देशों को लगता है कि भारत ही भविष्य है. भारत ही भरोसेमंद मित्र है. इसलिए इनमें से ज्यादातर मुस्लिम मुल्क पाकिस्तान से दूरी बना रहे हैं और भारत से दोस्ती कर रहे हैं.
इसका सबसे ताजा सबूत दिल्ली से पूरी दुनिया को मिला है. आज दिल्ली में 22 मुस्लिम देशों की बड़ी बैठक हुई. इसे आप पाकिस्तान को दिवालिया बनाने वाली बैठक भी कह सकते हैं.
दिल्ली में हुई अरब-इंडिया फोरम की दूसरी बैठक
आज दिल्ली में अरब-इंडिया को-ऑपरेशन फ़ोरम की दूसरी बैठक हुई. जिसकी अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने मिलकर की. इसमें अरब लीग के सदस्य देशों के विदेश मंत्री और अरब लीग के महासचिव भी शामिल हुए. बैठक की अध्यक्षता करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नाम लिए बगैर पाकिस्तान के पाप का जिक्र किया.
इस्लामिक देशों के प्रतिनिधियों के सामने उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सीमा पार आतंकवाद जारी है,जो अस्वीकार्य है. आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन करता है. विदेश मंत्री ने कहा कि जो आतंकवाद से प्रभावित है उसे आत्मरक्षा का अधिकार है. उन्होंने कहा कि इस वैश्विक अभिशाप से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना आवश्यक है.
आतंकवाद पर भारत के साथ मिलाया सुर
आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता पर सभी इस्लामिक देशों में एकसुर में सहमति जताई. सभी देशों ने भारत की चिंता को आगे बढ़ाया. जाहिर है कि ये पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है. भारत ने इस बैठक में गाजा, सीरिया, सुडान, लीबिया और फिलिस्तीन का जिक्र कर ये साफ संकेत दिया कि भारत वैश्विक शांति में विश्वास रखता है. जो देश पीड़ित हैं, उनको लेकर ना सिर्फ सहानुभूति रखता है बल्कि उसके विकास के लिए भी रोडमैप तैयार है.
अशांति की आहट के बीच भारत ईरान से भी संपर्क में है. अब अरब देशों के विदेश मंत्री और उनके प्रतिनिधि भारत के साथ दिल्ली में बैठक कर रहे हैं. जाहिर तौर पर यह बैठक भारत और अरब दुनिया के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी पहल है.
कब हुई थी अरब-इंडिया फोरम की शुरुआत?
अरब-इंडिया को-ऑपरेशन फोरम भारत और अरब देशों के बीच सबसे उच्च स्तरीय मंच है. 2008 में इसकी शुरुआत हुई थी. भारत अरब लीग का ऑब्जर्वर भी है, जिसमें 22 सदस्य देश आते हैं. भारत और अरब विदेश मंत्रियों की पहली बैठक 2016 में बहरीन में हुई थी और अब एक दशक बाद दूसरी बैठक दिल्ली में हुई है.
