Mallikarjuna Kharge reaction on Union Budget: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 संसद के पटल पर रखा. इस पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है. कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बजट पर अपनी राय दी है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बजट को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. बजट पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘मोदी सरकार के पास अब नए आइडिया खत्म हो गए हैं.’
‘बजट गरीबों के लिए जीरो’: खरगे
⦁ बजट भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के लिए एक सवाल लेकर बैठा है. इस बजट में गरीब तबके के लिए कुछ नहीं है
⦁ बजट में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए गए हैं.
⦁ इकॉनमिक सर्वे दिखाता है कि व्यापार में अनिश्चितता भारत के लिए चुनौती है, लेकिन बजट इस समस्या को मुश्किल से ही स्वीकार कर रहा है.
⦁ रुपए की गिरावट से निपटने के लिए भी सरकार के पास कोई योजना नहीं है. भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल संकट ठहरा हुआ वेतन, कमजोर उपभोक्ता मांग और निजी निवेश में सुस्ती है, लेकिन बजट में उपभोक्ता मांग को गति देने का कोई विचार नहीं दिखता है
⦁ बजट में कर्ज के बढ़ते बोझ पर भी ध्यान नहीं दिया गया है.
⦁ इस बजट में शिक्षित युवाओं में फैले व्यापक बेरोजगारी संकट के समाधान से जुड़ी कोई बात नहीं है.
⦁ वित्त आयोग की सिफारिशों का अध्ययन करना होगा, लेकिन वे गंभीर वित्तीय दबाव में चल रही राज्य सरकारों को कोई राहत देते नहीं दिख रही हैं.
⦁ असमानता ब्रिटिश राज के दौर को पार कर गई है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं किया गया है.
⦁ इसके साथ ही SC-ST, पिछड़े वर्ग, EWS या अल्पसंख्यकों के लिए किसी प्रकार की सहायता का प्रावधान नहीं किया गया है.
⦁ सरकार ने पिछले साल के आवंटित बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, सोशल जस्टिस जैसे कई जरूरी क्षेत्रों में पूरा बजट ही खर्च नहीं किया.
⦁ सरकार का नारा है- ‘सबका साथ, सबका विकास’, आंकड़े दिखाते हैं कि शिक्षा में पैसा खर्च नहीं किया. बजट पिछले साल के मुकाबले घटा दिया.’
⦁ पहले की सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य और छात्रों को स्कॉलरशिप पर ज्यादा जोर देती थीं. वित्त मंत्री ने एक भी बार स्कूलों का जिक्र नहीं किया और सामाजिक सुरक्षा और कल्याण को लेकर एक भी घोषणा नहीं की. इसके अलावा, मनरेगा की जगह आए नए कानून के बजट के बारे में कोई जिक्र नहीं किया.
⦁ ये एक थकी हुई और रिटायर हो चुकी सरकार का बजट है. पहले तो ये पैसा नहीं देना चाहते और ऊपर से मिले बजट को भी खर्च नहीं करते हैं.
⦁ पीएम मोदी गुड गवर्नेंस की बात करते हैं लेकिन वे लोगों की भलाई के लिए कोई कदम नहीं उठाना चाहते. इसलिए मैं इस बजट को रिजेक्ट करता हूं. ये लोगों के हित में नहीं है और इसका लोगों के लिए कोई उपयोग नहीं है
⦁ मोदी सरकार के इस बजट की घोषणा के बाद शेयर मार्केट गिर गया. हर क्षेत्र में यह सरकार विफल हो चुकी है. यह बजट गरीबों, युवाओं के हित में नहीं है. महंगाई कैसे कम होगी, रोजगार कैसे पैदा होंगे, इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है
⦁ ये बजट सिर्फ रिपीटेशन और रीसाइक्लिंग है. इस बजट में देश को नई दिशा देने का काम किया जाना चाहिए था, मगर वो नहीं हुआ. यहां तक कि मोदी सरकार ने अपने वादों को भी नकार दिया.
कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष खरगे ने ये भी कहा साफ है कि कई चीजों पर बढ़े हुए टैक्स की वजह से उनकी कीमतें आम लोगों की जेब ढीली कर सकती हैं.
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मल्लिकार्जुन खड़गे के आरोपों पर पीएमओ में मंत्री जितेंद्र सिंह का जवाब
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘खरगे जी को सरकार के नए आइडिया समझ नहीं आ रहे हैं उनका काम ही आलोचना करना अगर ऐसा होता तो कहते वैसा होना चाहिए वैसा होता तो कहते हैं ऐसा होना चाहिए. कांग्रेस को पुराने आइडिया में ही नया दिखाई देता है. महंगाई इसी बजट से खत्म होगी. फ्री बीज देने से आप गरीब को रिझा सकते हैं गरीबी दूर नहीं कर सकते अगले इलेक्शन तक वह फिर से गरीब हो जाता है. TAX में कमी पिछले साल ही कम हुई थी इस बजट से जम्मू कश्मीर को भी फायदा होने वाला है, क्योंकि वहां टूरिज्म-ट्रैकिंग के प्रोजेक्ट शुरू होंगे.’
