ऑरेंज गेट-मरीन ड्राइव टनल, जो मुंबई में बन रहा एक बड़ा अंडरग्राउंड रोड प्रोजेक्ट है और ईस्टर्न फ्रीवे और पश्चिमी तट के बीच सीधा लिंक देगा, उसके अलाइनमेंट में बदलाव किया गया है. 8,056 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट साउथ मुंबई की कुछ सबसे भीड़-भाड़ वाली सड़कों को बाईपास करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. टनल बोरिंग मशीन (TBM) के हाल ही में लॉन्च होने के बाद यह प्रोजेक्ट अब अपने एक्टिव कंस्ट्रक्शन फेज में चला गया है. ऑरेंज गेट-मरीन ड्राइव टनल का अलाइनमेंट दिसंबर 2025 में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) द्वारा संशोधित किया गया था.
यह बदलाव मरीन ड्राइव सिटिजन्स एसोसिएशन द्वारा उठाए गए सुरक्षा और हेरिटेज संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए किया गया था. यह सुरंग सतह से लगभग 52 मीटर की गहराई तक जाती है. इसका सबसे गहरा पॉइंट खास तौर पर लैमिंगटन रोड के पास लगभग 47-50 मीटर पर है. यह अलाइनमेंट लगभग 700 इमारतों, हेरिटेज साइट्स और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के नीचे से सुरक्षित रूप से गुजरने के लिए 12 से 52 मीटर की औसत गहराई बनाए रखता है. इसे सेंट्रल और वेस्टर्न दोनों रेलवे लाइनों के साथ-साथ मेट्रो लाइन 3 (एक्वा लाइन) के नीचे से गुजरने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
संशोधित एंट्री/एग्जिट: अब ईस्टबाउंड और वेस्टबाउंड दोनों टनल गिरगांव में एंट्री और एग्जिट करेंगे.
मरीन ड्राइव टर्मिनल: ये टनल मरीन ड्राइव पर चर्नी रोड स्टेशन के पास, जवाहर बाल भवन के पास से निकलेंगी.
अंडरग्राउंड रास्ता: ऑरेंज गेट से, यह टनल पी डी’मेलो रोड पर नीचे जाती है, और पुराने एल्फिंस्टन ब्रिज, रेलवे ट्रैक, जेजे फ्लाईओवर, भिंडी बाज़ार, खेतवाड़ी और लैमिंगटन रोड के नीचे से गुज़रती है.
मुख्य गहराई: यह टनल मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें मुंबई मेट्रो लाइन 3 भी शामिल है, को पार करने के लिए ज़मीन के नीचे लगभग 47-52 मीटर की अधिकतम गहराई तक पहुंचती है।
यह कितनी गहरी है ये टनल?
मुंबई कोस्टल रोड की सुरंगें मालाबार हिल के नीचे 72 मीटर की अधिकतम गहराई तक पहुंचती हैं. हालांकि, ऑरेंज गेट प्रोजेक्ट को खास तौर पर मुंबई के घनी आबादी वाले सेंट्रल सिटी स्ट्रक्चर से गुज़रने वाले रोड प्रोजेक्ट के लिए सबसे गहरे शहरी टनलिंग काम के तौर पर जाना जाता है. प्रोजेक्ट लगभग 15% पूरा हो चुका है. TBM को आधिकारिक तौर पर 3 दिसंबर, 2025 को लॉन्च किया गया था, और उम्मीद है कि यह रोज़ाना 3-5 मीटर की खुदाई करेगा. आधिकारिक तौर पर इसे दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है, हालांकि महाराष्ट्र सरकार जून 2028 तक इसे जल्दी पूरा करने की कोशिश कर रही है.
क्या है इस टनल की खासियत?
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कुल लंबाई: लगभग 9.96 किमी, जिसमें से लगभग 7 किमी ज़मीन के नीचे है.
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डिज़ाइन: ट्विन-ट्यूब सुरंगें, जिनमें से हर एक में दो ट्रैफिक लेन (3.2 मीटर चौड़ाई) और एक डेडिकेटेड इमरजेंसी लेन (2.5 मीटर) है.
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गहराई: यह मुंबई की सबसे गहरी शहरी सुरंगों में से एक है, जो मौजूदा मेट्रो लाइनों और इमारतों की नींव से बचने के लिए 12 से 52 मीटर की गहराई तक पहुंचती है.
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सेफ्टी फीचर्स: इसमें हर 300 मीटर पर क्रॉस-पैसेज, एडवांस्ड वेंटिलेशन, आग का पता लगाने वाला सिस्टम और AI-इनेबल्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम शामिल है.
मुंबई वालों के लिए इससे क्या फायदा होगा?
इस टनल के शुरू होने के बाद, ऑरेंज गेट और मरीन ड्राइव के बीच का सफर 25-40 मिनट से घटकर सिर्फ 5 मिनट रह जाएगा. यह टनल मुंबई कोस्टल रोड, अटल सेतु (MTHL) के साथ आसानी से जुड़ जाएगी और आने वाले नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक तेज़ी से पहुंचने में मदद करेगी. ऑरेंज गेट-मरीन ड्राइव टनल को औपचारिक रूप से कॉन्सेप्ट दिया गया और 2023 और 2024 के बीच ज़रूरी अप्रूवल वाले चरणों से गुज़र चुका है. यह प्रोजेक्ट ईस्टर्न फ्रीवे पर आने-जाने वालों के लिए ट्रैफिक जाम की समस्या को हल करने के लिए बनाया गया था, जिन्हें दक्षिण मुंबई पहुंचने के लिए लंबे रास्तों से जाना पड़ता था.
पीएम मोदी ने रखी थी इस प्रोजेक्ट की नींव
इस प्रोजेक्ट को 10 मार्च, 2023 को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) की 154वीं अथॉरिटी मीटिंग के दौरान आधिकारिक प्रशासनिक मंज़ूरी मिली थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 जनवरी, 2024 को इस प्रोजेक्ट की नींव रखी. कंस्ट्रक्शन का कॉन्ट्रैक्ट आधिकारिक तौर पर 20 जून, 2024 को लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को ‘डिजाइन और बिल्ड’ आधार पर दिया गया.
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