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Donald Trump PM Modi Talks: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच सोमवार को फोन पर बात हुई. दोनों पक्षों की ओर से सोशल मीडिया के जरिए इस बातचीत की पुष्टि की गई. हालांकि इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक चौंकाने वाला दावा किया कि भारत, रूस से तेल खरीद बंद करेगा. आपको बताते चलें कि रूस, भारत का पारंपरिक सहयोगी है, ऐसे में ट्रंप का ये दावा लोगों की समझ से परे दिख रहा है. आपको बता दें कि अभी तक भारतीय विदेश मंत्रालय, या पीएमओ की ओर से ऐसी कोई पुष्टि नहीं की गई है.

हालांकि ट्रंप की ओर ये दावा ऐसे समय पर है जब अमेरिका ने भारत के लिए टैरिफ दर में कटौती की है. अब भारत पर लागू टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है. आइए जानते हैं कि भारत रूस से कितना तेल खरीदता है, उससे भारत को क्या फायदा होता है, भारत अगर रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करेगा तो इसका आप पर क्या असर हो सकता है.

कहां पहुंची ट्रेड डील की बातचीत, भारत वेनेजुएला से खरीदेगा तेल?

भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ी थी. हाल ही में दो दिन पहले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को यह जानकारी दी उन्होंने भरोसा जताया कि निकट भविष्य में इस मोर्चे पर अच्छी खबर दी जाएगी. आज ट्रंप ने भारत पर लगा टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किया है. वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक ये दावा भी किया जा रहा है कि रूस से तेल खरीदने पर जो 25% का एक्स्ट्रा टैरिफ लग रहा था वो भी हट गया है. इसलिए भारत, रूस के बजाए वेनेजुएला से तेल खरीदने जा रहा है, हालांकि अभी इसका ऐलान नहीं हुआ है.

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अक्टूबर, 2025 में भी ट्रंप ने किया था ऐसा दावा

आपको बताते चलें कि 15 अक्टूबर, 2025 को भी डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को महान शख्‍स बताया था. उस समय व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, ‘मैं खुश नहीं था कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे भरोसा दिलाया है कि भारत अब ऐसा नहीं करेगा.’ जबकि पीएम मोदी या भारत सरकार के किसी भी अधिकारी ने ऐसा कुछ नहीं कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर रहा है.

ग्‍लोबल एनर्जी डिप्‍लोमेसी

रूस, भारत के कच्चे तेल के आयात का सबसे बड़ा स्रोत है. अगर भारत सचमुच रूस से तेल खरीदना बंद करने का वादा करता है, तो यह ग्‍लोबल एनर्जी डिप्‍लोमेसी में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. यह ऐसे समय होगा जब अमेरिका, यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की तेल से होने वाली आमदनी को रोकने के लिए करीब 6 महीने से संघर्ष कर रहा था. भारतीय नियामक संस्थाएं और प्रमुख तेल रिफाइनरियां जोखिमों और विकल्पों का आकलन कर रही थीं.

साल 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद, भारत ने भारी छूट पर रूसी कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया. रूस, भारत के कच्चे तेल के आयात का सबसे बड़ा स्रोत बन गया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने रूस से तेल की खरीद कुछ कम की है. हालांकि इसे अमेरिका का दबाव नहीं बल्कि भारतीय तेल एजेंसियों का लिया स्वतंत्र फैसला बताया गया था. इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतस रूसी तेल आयात को 10 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) से नीचे लाने की तैयारी कर रहा है. जनवरी, 2026 में भारत का रूस से तेल आयात लगभग 12 लाख बीपीडी था, जिसके फरवरी में घटकर लगभग 10 लाख बीपीडी और मार्च में 8 लाख बीपीडी होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

भारतीय विश्लेषक मानते हैं कि उन्हें रूसी कच्चे तेल के आयात में निकट भविष्य में गिरावट की उम्मीद है, लेकिन भारत की तेल रिफाइनरियां बिना प्रतिबंध वाले तीसरे पक्ष के मध्यस्थों के माध्यम से रूसी तेल खरीदना जारी रखेंगी.

देश के खजाने पर कितना असर पड़ेगा?

भारत को रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करने पर रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है. ये भी सच है कि भारत ने रूस से रियायती दरों पर सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अरबों डॉलर बचाए हैं. ऐसे में रूस से पूरी तरह से तेल की खरीद बंद होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं.