Rahul Gandhi Speech: सोमवार को चर्चा में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोले. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने जब अपनी बात रखनी शुरू की तो हंगामा हो गया. मुद्दा चीन-भारत संबंधों का था. राहुल गांधी लोकसभा में इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखना चाहते थे. लेकिन अध्यक्ष नियम का हवाला देकर उन्हें रोकते रहे. अब हम लोकसभा में हुए इस विवाद का विश्लेषण करेंगे.
जून 2017 में भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर तनाव की स्थिति बन गई थी. 73 दिन तक चली इस तनातनी का असर 9 साल बाद भी आज लोकसभा में दिखा. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपना पक्ष रखने के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खड़े हुए तो उन्होंने डोकलाम विवाद को बिंदु बनाकर अपनी बात कहनी शुरू की. राहुल गांधी पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के हवाले से कुछ तथ्य रखना चाहते थे. इसे लेकर रक्षा मंत्री और गृहमंत्री ने आपत्ति जताई.
क्या हैं लोकसभा के वो नियम?
इस चर्चा के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार संसदीय नियम और परंपराओं की याद दिलाई. पहले आपको बताते हैं कि ये नियम क्या है. लोकसभा अध्यक्ष नेता प्रतिपक्ष को जिस नियम की याद दिला रहे थे वो है लोकसभा का नियम 349 और नियम 353. ये नियम सदन के अंदर सदस्यों के आचरण और शिष्टाचार का निर्धारण करते हैं. अब समझिए ये नियम क्या कहता है.
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नियम 349 के उपनियम 1 के मुताबिक कोई भी सदस्य सदन के कामकाज से सीधे संबंधित नहीं होने पर पुस्तक, समाचार पत्र या पत्र सदन में नहीं पढ़ेगा.
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नियम 353 कहता है कि जो व्यक्ति सदन में मौजूद नहीं है, उन पर आरोप लगाने या उनके शब्दों का संदर्भ देने से पहले सदस्य को दस्तावेजों का प्रमाणीकरण करना होगा, और स्पीकर को पूर्व सूचना देनी होगी.
अब समझिए राहुल गांधी सदन ने एक अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देकर अपनी बात कहना चाहते थे. इसलिए सत्ता पक्ष की तरफ से बार-बार ये याद दिलाया जा रहा था कि ये नियम विरुद्ध है. रक्षा मंत्री के साथ ही गृहमंत्री ने भी राहुल गांधी को नियम की याद दिलाई.
किताब, मैगजीन फिर रिपोर्ट बताया
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले किताब को कोट कर अपनी बात कह रहे थे. सत्ता पक्ष की तरफ से आपत्ति हुई तो उन्होंने मैगजीन की बात कही. फिर उसे रिपोर्ट बताया. फिर भी आपत्ति नहीं थमी तो उन्होंने सामान्य शब्दों में एक उदाहरण के जरिए अपनी बात कहने की कोशिश की. राहुल गांधी ने सदन में पुस्तक के अंश को पहले किताब, फिर मैगजीन फिर रिपोर्ट कहा.
राहुल गांधी मुद्दा तो डोकलाम विवाद का ही उठा रहे थे. उनका स्रोत भी पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की पुस्तक ही थी. लेकिन जब सत्ता पक्ष ने पुस्तक को कोट करने पर आपत्ति जताई तो राहुल गांधी ने उनसे मैगजीन का हिस्सा बताया, फिर रिपोर्ट बताया. हालांकि इससे भी सत्ता पक्ष की आपत्ति नहीं रुकी. आखिर में राहुल गांधी ने क्या कहा हम आपको बताएंगे. लेकिन पहले एक छोटी सी जानकारी उस पुस्तक को लेकर जिसे स्रोत बनाकर नेता प्रतिपक्ष आज संसद में अपनी बात कहना चाहते थे.
क्या है पूर्व जनरल की किताब?
पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की इस पुस्तक का नाम है ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’. इस पुस्तक का हार्डकवर अप्रैल 2024 से लॉन्च किया गया था. पुस्तक में चीन के साथ तनावपूर्ण संबंध और अग्निवीर योजना को रिव्यू किया गया है. जनरल एमएम नरवणे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपनी किताब पब्लिशर को छपने के लिए दे दी है.
लेकिन सेना से जुड़े होने के कारण इस पुस्तक के प्रकाशन के लिए रक्षा मंत्रालय से मंजूरी लेनी जरूरी थी. अब तक ये पुस्तक प्रकाशित नहीं हुई है. सत्ता पक्ष की मुख्य आपत्ति यही थी राहुल गांधी जिस पुस्तक की चर्चा कर रहे हैं वो प्रकाशित नहीं है. इसलिए प्रमाणित भी नहीं है. इन्हीं तर्कों पर लोकसभा में बहस हुई. चर्चा के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सदन में कहा कि राहुल गांधी को बोलने देना चाहिए.
लोकसभा में आखिर हुआ क्या?
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दोपहर 1 बजकर 25 मिनट पर अपना पक्ष रखने के लिए सदन में खड़े हुए थे. दो बजकर 13 मिनट पर पहली बार लोकसभा की कार्यवाही स्थगित की गई. दोपहर तीन बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई..उन्होंने अपनी बात कहनी शुरू की तो फिर सत्ता पक्ष की तरफ से आपत्ति हुई. 9 मिनट बाद ही सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक के लिए फिर स्थगित कर दी गई. शाम 4 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो 11 मिनट बाद कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई. इस दौरान राहुल गांधी को रक्षा मंत्री राजनाथ ने 11 बार, गृह मंत्री शाह ने 7 बार टोका. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 2 बार और अनुराग ठाकुर ने 6 बार टोका. आज सदन की कार्यवाही स्थगित होने से पहले राहुल गांधी ने क्या कहा हम आपको बताएंगे लेकिन पहले आपको बताते हैं कि क्यों विपक्ष सदन में नियम को सत्ता पक्ष और लोकसभा अध्यक्ष पर सवाल उठा रहा था.
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अगस्त 2023 में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस और न्यूज़क्लिक पर चीन से फंडिंग लेने का आरोप लगाया था.
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हालांकि आज जब राहुल गांधी अपनी बात कहना चाहते थे तो निशिकांत दुबे ने लोकसभा में नियम 349 का हवाला दिया.
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बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने दिसंबर 2024 में कांग्रेस सांसद शशि थरूर की 1989 में प्रकाशित एक उपन्यास का संदर्भ देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था. तब शशि थरूर ने नियम 353 का हवाला देते हुए अपना नाम लेने और पुस्तक का संदर्भ देने पर आपत्ति जताई थी.
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दिसंबर 2025 में राज्यसभा में बीजेपी सांसद सुजीत कुमार ने स्कूल के सिलेबस में शामिल NCERT के किताबों का हवाला देते हुए ब्रिटिश वायसराय और गवर्नर जनरल को “लॉर्ड” कहने का विरोध किया. यहां ये जरूर याद रखना चाहिए कि उन्होंने कोई आरोप नहीं लगाए थे सिर्फ पाठ्यक्रम में सुधार की बात कही थी.
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राज्यसभा में बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 11 दिसंबर 2025 को फ्रीडम हाउस रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए हिंदू धर्म और लोकतंत्र के बीच संबंधों की व्याख्या की थी.
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3 अप्रैल 2025 को सुधांशु त्रिवेदी ने वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान मौलाना आजाद की पुस्तक India Wins Freedom से उदाहरण दिए थे.
सदन में सांसद अक्सर पुस्तकों का अंश कोट कर अपनी बात को और तर्कसंगत और धारदार बनाते रहे हैं. फिर आज क्यों हंगामा हुआ उसे समझना जरूरी है. दरअसल राहुल गांधी आज जो मुद्दा उठा रहे थे, वो देश की रक्षा तैयारियों से जुड़ा था. ये बेहद संवेदनशील भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़ा मुद्दा था. पूर्व सेनाध्यक्ष की पुस्तक के प्रकाशन को अब तक मंजूरी नहीं मिली है. यानी उसके तथ्य अब तक प्रमाणित नहीं है.
इस संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक बयान से देश की रक्षा और विदेश नीति से जुड़े हितों पर असर पड़ सकता है. इसलिए राहुल गांधी के बयान पर सत्ता पक्ष लगातार सवाल उठा रहा था. लोकसभा स्पीकर भी इसलिए राहुल गांधी को नियम का हवाला देकर रोक रहे थे.
सदन के बाहर भी इस विवाद पर हंगामा हुआ. राहुल गांधी पूर्व आर्मी चीफ की पुस्तक का हवाला देकर सवाल खड़ा कर रहे थे तो बीजेपी ने सोमवार को जनरल नरवणे का एक पुराना बयान पोस्ट किया. इस बयान में जनरल नरवणे ने कहा है कि भारत ने अपनी एक इंच जमीन भी नहीं कोई है.
मंगलवार को जब संसद शुरू होगी तब इस पर फिर से विपक्ष के हंगामे के आसार हैं. हालांकि किसी एक विषय पर बार बार आपत्ति और हंगामा करने से बेहतर है कि किसी मुद्दे पर सार्थक चर्चा हो. सभी पार्टियों के सांसद मिलकर जनउपयोगी मुद्दों पर बहस करें और उसे निष्कर्ष तक पहुंचाएं. यही देशहित में भी है.
