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Bangladesh Ecomomy crisis: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने जा रहे चुनावों से पहले अंतरिम सरकार के आका मुहम्मद यूनुस ने खुद को दोनों जहां के राजा होने का अहसास करते हुए एक और तुगलकी फरमान जारी किया है. उनके बस एक इसी फैसले ने पहले से ही भीषण महंगाई और बेरोजगारी दर से जूझ रही बांग्लादेशी जनता की कमर तोड़ दी है. दरअसल एक ओर बांग्लादेश बढ़ती महंगाई, गंभीर आवास संकट, जल संकट और कमजोर होती सार्वजनिक सेवाओं से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने मंत्रियों के लिए राजधानी ढाका के मिंटो रोड पर 71 लग्जरी फ्लैट्स के निर्माण को मंजूरी दी है. इस फैसले को लेकर देश में राजनीतिक और नैतिक बहस तेज हो गई है.

घर में नहीं दाने यूनुस चले…, टके सा हो गया बांग्लादेशी ‘टका’

तीन नए टॉवरों में बनने वाले  71 फ्लैट्स की कुल अनुमानित लागत 786 करोड़ टका होगी. वही फर्नीचर और साज-सज्जा पर अतिरिक्त 20 करोड़ टका खर्च होगा. प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल 8,500 से 9,300 वर्ग फुट के बीच होगा और इनमें रूफटॉप स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी. खास बात यह है कि इन सभी सुविधाओं पर होने वाला खर्च सार्वजनिक धन से वहन किया जाएगा.

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बांग्लादेश के प्रमुख अखबार न्यू एज में प्रकाशित रिपोर्ट में इस फैसले को केवल बजटीय चूक नहीं, बल्कि राजनीतिक और नैतिक विफलता बताया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जो अंतरिम सरकार सुधारों की बात करती है, वही अब अभिजात वर्ग की विशेष सुविधाओं वाले उसी पुराने ढांचे को दोहरा रही है, जिसे खत्म करने का दावा किया गया था.

हालात समझिए

रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्णय चार स्तरों पर विफल साबित होता है- यह संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण और प्रक्रिया संबंधी न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, जनता के भरोसे और नैतिक वैधता को कमजोर करता है, जुलाई 2024 की भावना से विश्वासघात करता है और चुनाव से पहले जल्दबाजी में लिए गए फैसले के जरिए अभिजात्य सत्ता को और मजबूत करता है.

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि बांग्लादेश कोई समृद्ध देश नहीं बल्कि निम्न-मध्यम आय वाला राष्ट्र है, जहां गहरी असमानता, जलवायु संकट, शहरी भीड़ और सामाजिक सेवाओं की भारी कमी जैसी लाखों समस्याएं मौजूद हैं. बांग्लादेश के 18 करोड़ लोग असुरक्षित घरों में रहने को मजबूर हैं, स्कूलों में बुनियादी संसाधनों की कमी है और अस्पताल पहले से ही अत्यधिक दबाव में हैं. ऐसे हालात में मंत्रियों के लिए सैकड़ों करोड़ टका के लग्जरी फ्लैट्स बनाना संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण के सिद्धांत के खिलाफ बताया गया है.

रिपोर्ट में यह तर्क भी दिया गया कि भले ही इन फ्लैट्स को आधिकारिक रूप से ‘सरकारी आवास’ कहा जाए, लेकिन इनका भव्य आकार और अत्यधिक सुविधाएं इस तर्क को खोखला साबित करती हैं. स्विमिंग पूल और महंगे इंटीरियर वाले ये महलनुमा फ्लैट्स किसी भी व्यावहारिक जरूरत से कहीं आगे जाते हैं और यह दर्शाते हैं कि राज्य की प्राथमिकता नागरिकों की भलाई नहीं, बल्कि राजनीतिक अभिजात वर्ग का आराम है. (IANS)