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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन जल्द समाप्त हो सकता है. अगले एक हफ्ते में भाजपा सरकार बनाने का दावा कर सकती है. दिल्ली में राज्य के विधायक पहुंचे हुए हैं. आज यानी 3 फरवरी को सभी विधायकों की बैठक होने वाली है. खबर है कि मैतेई समाज से मुख्यमंत्री चुने जाएंगे और दो डिप्टी सीएम बनाए जाएंगे. 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 37 विधायक हैं. उसके पास अपने दम पर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त आंकड़े हैं लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि मैतेई-कूकी संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करने के लिए भाजपा क्या समीकरण तैयार करती है जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट रहे. 

राज्य में एक साल से राष्ट्रपति शासन लागू है. भाजपा ने विधायक दल के नेता का चुनाव करने के लिए तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया है. आज पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पार्टी के विधायकों से मिलने वाला है. एक मीडिया रिपोर्ट में स्टेट भाजपा के एक नेता के हवाले से दावा किया गया, ‘रविवार को सभी विधायकों को सोमवार को मीटिंग के लिए दिल्ली आने को कहा गया था. सभी 37 विधायक मीटिंग के लिए दिल्ली में हैं. सोमवार शाम को मीटिंग होनी थी लेकिन केंद्रीय पर्यवेक्षक के बारे में ताजा घोषणा के बाद हम सभी को जानकारी मिली कि मीटिंग 3 फरवरी दोपहर 3 बजे तक के लिए टाल दी गई है.’ 

कूकी विधायक भी दिल्ली आए

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इस मामले की जानकारी रखने वाले एक और विधायक ने कहा कि 10 कूकी-जो विधायकों में से भी ज्यादातर लोग मीटिंग के लिए पहुंच गए हैं. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि नई भाजपा सरकार कूकी और मैतेई को साधने वाले किसी फॉर्मूले पर आगे बढ़ सकती है. साल 2023 में मैतेई और कूकी-जो समुदायों के बीच जातीय झड़प में कम से कम 260 लोग मारे गए और 50,000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए. दोनों समुदाय अब भी जातीय आधार पर बंटे हुए हैं और अलग-अलग जिलों में रहते हैं. 

भाजपा के सामने हैं ये तीन विकल्प

1. पार्टी के एक पदाधिकारी का बयान मीडिया में आया है. उन्होंने एचटी से कहा, ‘अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है. अगर केंद्रीय नेतृत्व मणिपुर के हित में किसी मैतेई नेता को चुनता है तो सभी को साथ आना होगा और एक-दूसरे का समर्थन करना होगा. अगर कूकी-जो विधायक समर्थन नहीं भी करते हैं तो भी पार्टी के पास जरूरी संख्या है. 

2. दूसरा विकल्प- इस कैबिनेट में कूकी-जो विधायकों को ज्यादा मंत्री पद दिए जाएं. यह भी राज्य और शांति प्रक्रिया के हित में होगा. 

3. तीसरा विकल्प यह है कि किसी तटस्थ व्यक्ति (जो न तो मैतेई हो और न ही कूकी-जो) को मुख्यमंत्री बनाया जाए, जो भले जन नेता न हो लेकिन मौजूदा हालात में सभी उसे स्वीकार कर सकते हों. 

ये नेता है रेस में 

कहा जा रहा है कि विधायक दल का नेता बनने की रेस में सबसे आगे मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों में बीरेन सिंह, टी सत्यब्रत सिंह, युमनाम खेमचंद सिंह, गोविंदास कोंथौजम, बसंत के. सिंह, के. इबोमचा सिंह और दीपू गंगमेई प्रमुख हैं.