Mamata Banerjee as lawyer in Supreme Court: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट में कमाल का नजारा देखने को मिल सकता है. आमतौर पर कोर्ट में जज, वकील और आरोपी ही मौजूद रहते हैं. लेकिन आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोर्ट में पेश होंगी. खास बात यह है कि वह खुद वकील की भूमिका में होंगी. इस बात की चर्चा टीएमसी के पोस्टर से शुरू हुई थी. पोस्टर में ममता बनर्जी को वकील के रूप में दिखाया गया था, जिसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर काफी बात हो रही है.
क्या है विवाद?
विवाद का विषय स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR है. बिहार चुनाव से यह मुद्दा चर्चा में आया है. एसआईआर को लेकर सड़क और संसद तक प्रदर्शन हो चुके हैं. चुनाव आयोग ने पूरे देश में इसे लागू करने का फैसला किया है. यूपी के बाद अब पश्चिम बंगाल की बारी है. लेकिन यहां की ममता सरकार का कहना है कि एसआईआर में तार्किक गड़बड़ियों के कारण 1.25 करोड़ वोटरों का मताधिकार प्रभावित हो सकता है. इसी वजह से पश्चिम बंगाल में एसआईआर लागू करना आसान नहीं दिख रहा है.
कहां से की है वकील की पढ़ाई?
ममता बनर्जी ने कोर्ट में पेश होने के अपने तर्क साफ किया है. उन्होंने बताया कि वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख हैं. इसलिए वह सुप्रीम कोर्ट के नियम और प्रोटोकॉल से अच्छी तरह परिचित हैं. ममता का कहना है कि वह तय नियमों के अनुसार ही कोर्ट में दलील देंगी. उन्होंने कोलकाता के जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई की है और 2003 में आखिरी बार वकील के तौर पर अदालत में पेश हुई थीं.
ममता बनर्जी का कहना है कि वह लोगों की समस्याओं को अच्छे से समझती हैं. उन्हें जमीनी स्तर पर आने वाली शिकायतों और कठिनाइयों की जानकारी है. इसी कारण वह कोर्ट में वकील की तरह दलील दे रही हैं ताकि सही पक्ष सामने आ सके. उन्होंने मुख्य याचिका में चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी कुछ निर्देशों को रद्द करने की मांग की है. उनका तर्क है कि उनकी मौजूदगी अदालती कार्यवाही के लिए जरूरी है और इससे न्यायपूर्ण फैसला सुनिश्चित होगा.
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