‘संघ यात्रा के 100 साल’ पर मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में एक समय ऐसा आया जब मोहन भागवत ने सलमान खान की चर्चा शुरू कर दी. सामने बैठे बॉलीवुड स्टार सलमान खान मुस्कुराने लगे. दरअसल, संघ प्रमुख उस समय कह रहे थे कि भारत के मुसलमान और भारत के ईसाई दुनिया के मुसलमानों-ईसाइयों की तरह नहीं हैं. उनका अलगपन कहां से आया, वो भारत का है. आगे उन्होंने कहा कि समाज को संगठित करना होगा. समाज फैशन से चलता है. सिनेमा में, सलमान खान जी क्या पहनते हैं. कॉलेज के विद्यार्थी वैसा पहनते हैं. उन्होंने खुद ही सवाल किया कि क्यों पहनना? उन्होंने पहना है इसलिए. उन्होंने क्यों पहना? मालूम नहीं. संघ प्रमुख ने कहा कि फैशन उत्पन्न करने वाले लोग समाज के विश्वासपात्र, श्रेष्ठ, कीर्तिमान ऐसे लोग होते हैं जिनको अपनी भाषा में कहते हैं महाजन या श्रेष्ठ. जिन पर उनका विश्वास है, वे जो करते हैं, वैसा ही लोग करते हैं.
भागवत ने कहा कि संपूर्ण समाज को संगठित करना संघ का काम है. जो विरोध करते हैं उन्हें भी संगठित करना है. हम किसी का विरोध नहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि हम हिंदू समाज को संगठित करने की बात करते हैं तो प्रश्न आता है कि आपने हिंदू का नाम लिया बाकी सबको क्यों छोड़ दिया? संघ प्रमुख ने समझाते हुए कहा कि यहां समझना होगा. हम कहते हैं कि भारत में सब हिंदू हैं. हिंदू का मतलब धर्म से नहीं, पूजा या कर्मकांड मत मानिए. हिंदू संज्ञा नहीं विशेषण है. हिंदू शब्द बाहर से आया. हमारे धर्म ग्रंथों में मानव धर्म शास्त्र लिखे गए, हिंदू धर्म शास्त्र नहीं. लोक भाषा में जब कोई शब्द आता है तो संत उसे स्वीकार करते हैं. क्योंकि वह लोगों की भाषा में बात करते हैं.
भागवत ने कहा कि पहली बार इस शब्द का उपयोग करने वाले संत का नाम है- श्री गुरु नानक जी. आक्रमण हुआ पंजाब पर बाबर का. उन्होंने अत्याचार देखा और वर्णन लिखा और हिंदुस्तान लिखा. यह भी लिखा- इतना अत्याचार हुआ कि न हिंदू महिलाओं का शील बचा, न मुस्लिम महिलाओं की अस्मत बची.
भारत भूगोल का नाम नहीं है, भारत स्वभाव का नाम है. ये जोड़ने वाला स्वभाव हमारा फिर से खड़ा करना है. सब मिलकर अनुशासनबद्ध होकर देश को बड़ा करना क्योंकि हमारा देश बड़ा होने से दुनिया बड़ी होगी.
सबसे प्राचीन होने के कारण हम अग्रज हैं. हमारा चरित्र ऐसा होना चाहिए कि दुनिया के लोग आएंगे और अपने जीवन की विद्या सीखेंगे. उदाहरण से दुनिया को सिखाना. हम दुनिया की महाशक्ति नहीं बनेंगे. महाशक्ति डंडा चलाती है, चला ही रही है, दिख रहा है. ऐसा हमको नहीं बनना है. हम विश्वगुरु बनेंगे. हम भाषण से नहीं सिखाएंगे, हम उदाहरण पेश करेंगे.
